GST Evasion: ईडी ने गुजरात की कंपनी के 25 ठिकानों पर मारा छापा; 122 करोड़ की जीएसटी चोरी का आरोप
ईडी ने बताया कि मामले में 25 स्थानों पर छापा मारा गया था। छापेमारी के दौरान आधार कार्ड से मोबाइल नंबर बदलने के लिए फॉर्म,फर्जी संस्थाओं से जारी किए गए फर्जी बिल और डिजिटल सबूत और 29 लाख रुपये नकद और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे।
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प्रवर्तन निदेशालय ने जीएसटी चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गुजरात की कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है। ईडी ने इस मामले में कई शहरों में छापेमारी कर 29 लाख रुपये की नकदी जब्त की है। जांच एजेंसी ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। एजेंसी ने बताया कि गुजरात की कंपनी पर 122 करोड़ रुपये की कथित जीएसटी चोरी का आरोप है।
दो जून को मारा था छापा
जांच एजेंसी ने बताया कि मोहम्मद एजाज बोमर और अन्य के खिलाफ एक मामले में दो जून को अहमदाबाद, भावनगर, बोटाद, गांधीधाम और मुंबई और बेंगलुरु में 25 स्थानों पर छापा मारा था। छापेमारी के दौरान आधार कार्ड से मोबाइल नंबर बदलने के लिए फॉर्म,फर्जी संस्थाओं से जारी किए गए फर्जी बिल और डिजिटल सबूत और 29 लाख रुपये नकद और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे।
इस छापेमारी में उन संंस्थाओं पर फोकस किया गया था, जिनके आधार पर नकली जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) फर्में बनाई गई थीं। इतना ही नहीं इन संस्थाओं का उपयोग फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) देने के लिए किया गया था।
इस मामले में पहले गुजरात की भावनगर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में यह मामला ईडी ने अपने हाथ में ले लिया। उसने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धाराओं के तहत दोबारा मामला दर्ज किया।
1102 करोड़ रुपये के जारी किए गए नकली चालान
इस मामले में पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट के मुताबिक,आरोपी ने सरकारी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता का वादा करने वाले कई व्यक्तियों के आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर बदल दिए। बाद में पैन तथा फिर जीएसटी पंजीकरण हासिल करने के लिए इन आधार विवरणों का इस्तेमाल किया। ईडी ने चार्जशीट के हवाले से यह भी बताया है कि 461 फर्जी फर्मों के इस्तेमाल से 1,102 करोड़ रुपये से अधिक के नकली चालान जारी किए गए और 122 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई।
ऐसे करते थे धोखाधड़ी
ईडी ने यह भी बताया है कि आरोपी जीएसटी पंजीकरण प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों के माध्यम से फर्जी संस्थाएं बना रहे थे। बाद में, इन फर्जी संस्थाओं द्वारा कमीशन के आधार पर फर्जी चालान बनाकर लाभार्थियों को आईटीसी दिया गया। इन फर्जी चालान का भुगतान बैंकिंग चैनलों के जरिए किया गया था। इस तरह बाद में फर्जी संस्था के ऑपरेटर और लाभार्थी के बीच में नकदी में राशि ली जाती थी।
ईडी ने रियल्टी समूहों IREO और M3M पर छापे मारे
वहीं, एक अन्य मामले में ईडी ने रियल्टी समूहों IREO और M3M पर छापे मारे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को इसके बारे में जानकारी दी है। जांच एजेंसी ने कहा कि मुंबई में रियल इस्टेट कंपनियों आईआरईओ और एम3एम पर छापेमारी के दौरान फेरारी, लेम्बोर्गिनी और बेंटले समेत 60 करोड़ रुपये की लग्जरी कारें और 5.75 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण जब्त किए हैं।
संघीय एजेंसी ने बयान में यह भी कहा कि दिल्ली और गुरुग्राम में उनके सात ठिकानों पर एक जून को तलाशी ली गई थी। ईडी ने यह आरोप भी लगाया है कि एम3एम समूह के मालिक, नियंत्रक और प्रवर्तक बसंत बंसल, रूप कुमार बंसल, पंकज बंसल और अन्य प्रमुख व्यक्ति छापे के दौरान जानबूझकर जांच से बचते रहे।
एजेंसी पिछले कुछ सालों से निवेशकों और ग्राहकों के फंड को डायवर्ट करने, बेईमानी से निकालने और गबन करने के आरोप में IREO समूह की जांच कर रही है। इस मामले की जांच के दौरान पता चला कि M3M समूह भी ऐसी गतिविधियों में संलिप्त है। इस समूह के माध्यम से बड़ी मात्रा में सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि का गबन किया गया था।
एम्ब्रेयर हथियार सौदे में अधिकारियों को दी गई थी 57.6 लाख डॉलर की रिश्वत
सीबीआई ने एम्ब्रेयर भ्रष्टाचार मामले में हथियारों के सौदागर अरविंद खन्ना, वकील गौतम खेतान और कारोबारी अनूप गुप्ता के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। सीबीआई के मुताबिक ब्राजील के पक्ष में डीआरडीओ के साथ तीन-विमान सौदे को अंतिम रूप देने के लिए अधिकारियों को 57.6 लाख अमेरिकी डॉलर रिश्वत दी गई थी।
सीबीआई की एक विशेष अदालत में हाल ही में दाखिल आरोपपत्र में एजेंसी ने खन्ना, खेतान और गुप्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधान) के तहत आरोप लगाये। सीबीआई ने एफआईआर में नामित एनआरआई कारोबारी विपिन खन्ना की मौत के बाद उसके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के हवाई-वाहित रडार सिस्टम स्थापित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले तीन विमानों का सौदा 2008 में ब्राजील की फर्म एम्ब्रेयर के साथ किया गया था।
सीबीआई के मुताबिक, डीआरडीओ में अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए सिंगापुर स्थित इंटरदेव के माध्यम से एंब्रायर की सहायक कंपनियों से विपिन खन्ना को कथित तौर पर 57.6 लाख अमेरिकी डालर की रिश्वत दी गई थी। सीबीआई ने एफआईआर में 3 जुलाई, 2008 को हुए सौदे में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में एम्ब्रेयर और इंटरदेव पीटीई लिमिटेड के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने ब्राजील के एक अखबार में एम्ब्रेयर पर सऊदी अरब और भारत में सौदे करने के लिए बिचौलियों के इस्तेमाल वाले आरोपों के बाद सितंबर 2016 में जांच शुरू की थी।