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Ground Report Chhath: यमुना के घाटों पर अद्भुत सफाई देख लोग हैरान, लेकिन बढ़ गई पीएम मोदी की चुनौती

Mon, 27 Oct 2025 07:31 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 27 Oct 2025 07:31 PM IST
सार

इस बार पूर्वांचली समुदाय के लोगों को न केवल यमुना किनारे छठ महापर्व मनाने की आजादी मिली, बल्कि इस दौरान इतनी शानदार व्यवस्था की गई कि इसे देख लोग हतप्रभ थे। इस व्यवस्था करने के लिए लोग दिल की गहराइयों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली सरकार और दिल्ली भाजपा को धन्यवाद देते हुए दिखाई पड़े। 
 

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Ground Report Chhath: People are amazed by amazing cleanliness on Yamuna ghats
य़मुना नदी के किनारे छठ मनाती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में बसे पूर्वांचली समुदाय के लोगों को इस साल का छठ महापर्व हमेशा याद रहेगा। छठ पर्व तो वे हमेशा से मनाते आए हैं, और आगे भी मनाते रहेंगे। लेकिन इस बार का छठ महापर्व उनके लिए किसी आजादी के उत्सव जैसा था। अब तक यमुना में प्रदूषण होने के आधार पर उन्हें यमुना के किनारे छठ मनाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। इससे इस पूरे समुदाय के मन में गहरा दुख था, पर सरकार के निर्णय के आगे लोग बेबस थे। लेकिन इस बार पूर्वांचली समुदाय के लोगों को न केवल यमुना किनारे छठ महापर्व मनाने की आजादी मिली, बल्कि इस दौरान इतनी शानदार व्यवस्था की गई कि इसे देख लोग हतप्रभ थे। इस व्यवस्था करने के लिए लोग दिल की गहराइयों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली सरकार और दिल्ली भाजपा को धन्यवाद देते हुए दिखाई पड़े। 
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पिछले दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से यमुना को साफ करने का वादा किया था। उन्होंने वादा किया था कि यमुना साफ होगी। यहां भी अहमदाबाद की साबरमती नदी पर बने रिवर फ्रंट की तरह यहां भी रिवर फ्रंट बनेगा और लोग पूरे परिवार के साथ यहां समय बिताने के लिए आ सकेंगे। उन्होंने वादा किया था कि पूर्वांचल के लोग यमुना के किनारे छठ महापर्व मना सकेंगे। वीरेंद्र सचदेवा की दिल्ली भाजपा की टीम ने पीएम के इस वादे को जन-जन तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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छठ पर यमुना की सफाई से बढ़ी लोगों की उम्मीद
लेकिन इसके बाद भी चुनावों के समय इस तरह के वादों की परंपरा और काम की कठिनाई को देखते हुए कुछ लोग मान रहे थे कि यह एक चुनावी वादा भर है और यमुना को साफ करने का काम शायद ही कभी पूरा हो। लेकिन छठ पर यमुना के घाटों पर जिस तरह की साफ-सफाई देखने को मिल रही है, पूरी सरकार जिस तरह से सतर्क और तत्पर दिखाई दे रही है, उसे देखते हुए अब लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लोगों को लग रहा है कि यदि यमुना के घाटों को साफ किया जा सकता है तो यमुना को साफ करने का सपना भी पूरा होगा। इसमें समय लग सकता है, लेकिन इसके पीछे सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण छठ पर हुई साफ-सफाई से मिल गया है। 
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लोग यह भी मान रहे हैं कि यमुना की सफाई आसान काम नहीं है। उन्हें पता है कि यह एक दिन में होने वाला काम नहीं है। इससे भी बढ़कर आम जनता की भागीदारी के बिना ऐसे कार्य पूरे नहीं हो सकते। लेकिन इसके बाद भी लोगों को उम्मीद है कि यमुना की सफाई का काम पूरा होगा। इस पूरी उम्मीद का आधार लोगों की प्रधानमंत्री मोदी के प्रति बढ़ती विश्वसनीयता ही है।   

'पीएम मोदी हैं, इसलिए भरोसा है' 
एक छठ व्रती अंकुर शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि अभी दिल्ली में भाजपा की सरकार आए केवल आठ-नौ महीने ही हुए हैं। यदि वे इतने कम समय में छठ महापर्व को मनाने के लिए इतनी व्यवस्था कर सकते हैं तो वे कुछ समय में यमुना को साफ करने का काम भी कर दिखाएंगे। लोगों ने कहा कि इस बात पर इसलिए भी भरोसा है क्योंकि इस काम में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह रुचि ले रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जिस तरह उन्होंने (मोदी) साबरमती नदी को साफ करने का काम किया था, वे यमुना की सफाई का काम भी कराएंगे और लोगों को साफ-स्वच्छ यमुना मिल सकेगी। 
 
'छठ का महत्त्व समझे बिना लगाया प्रतिबंध' 
प्रयागराज की आनंदिनी त्रिपाठी ने अमर उजाला से कहा कि इस समय पूरी दुनिया में पर्यावरण संकट बढ़ रहा है। धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है। बढ़ता तापमान लोगों की जिंदगी के साथ जलीय जीवों और पौधों की कई प्रजातियों को नष्ट होने का कारण बन रहा है। प्राकृतिक संतुलन बिखरने से आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया को पर्यावरण के अनुकूल जीवन जीने का संदेश देना चाहिए। इसके लिए छठ महापर्व जैसे त्योहार लोगों को सीख दे सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि छठ पर्व में एक भी सामान बाजार से खरीदकर नहीं उपयोग किया जाता था। सभी घर पर पैदा होने वाली चीजें ही उपयोग की जाती हैं। ऐसे में छठ से यमुना के गंदा होने का कोई प्रश्न नहीं पैदा होता है, लेकिन दुखद है कि सरकार से लेकर अदालतों तक ने इसके महत्त्व को सही तरीके से नहीं समझा और यमुना किनारे छठ मनाने पर प्रतिबंध लगा दिया।  

घाटों पर दिखी अद्भुत सफाई-सुरक्षा 
आईटीओ के पास बने छठ घाट पर सफाई की अद्भुत व्यवस्था दिखाई पड़ी। विकास मार्ग से ही लाल-हरे कालीन से छठ व्रतधारियों का स्वागत किया जा रहा था। जगह-जगह पर दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान किसी अनहोनी को रोकने के लिए सतर्क खड़े थे। पूरी चेकिंग के बाद ही किसी को घाट पर प्रवेश करने की अनुमति मिल रही थी। दिल्ली पुलिस के जवानों ने पूरे छठ घाट को सीसीटीवी कैमरों की जद में ले रखा था और एक टीम पूरे घाट पर लगातार नजर रखे हुए थी। 

वासुदेव घाट पर छठ व्रती लोगों के लिए न केवल यमुना में साफ-सफाई की गई थी, बल्कि यमुना के घाट के किनारे कृत्रिम घाट भी बनाए गए थे। लोग इन घाटों में भी बड़े सुरक्षित तरीके से अपना व्रत करते हुए दिखाई पड़े। किसी अनहोनी को रोकने के लिए दिल्ली जल बोर्ड के गोताखोर नौकाओं के साथ तैनात थे और लगातार पहरा दे रहे थे। लोगों की भारी संख्या को देखते हुए यमुना के दोनों किनारों पर जगह-जगह घाट बनाए गए थे। इस दौरान हर जगह टेंट, पानी और सुरक्षा की पूरी तैनाती दिखी।  

'बिना गलती पूर्वांचलियों को सजा दे रही थी पूर्ववर्ती सरकार'
छठ मनाने आई वाराणसी की स्वाति मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि छठ से कोई प्रदूषणकारी अपशिष्ट नहीं निकलता है, लेकिन इसके बाद भी यमुना किनारे छठ मनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ऐसा लगता था कि पिछली सरकार ने बिना किसी गलती के उन्हें कोई सजा सुना दी हो। लेकिन अच्छी बात है कि अब दिल्ली सरकार और अदालतों ने उनकी बातों को समझा है और अब उन्हें यमुना किनारे व्रत मनाने की अनुमति मिली है।   

हमारे लिए हिंदुत्व राजनीति का मुद्दा नहीं- भाजपा विधायक
पटपड़गंज से भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी ने अमर उजाला से कहा कि फरवरी 2025 में सत्ता में आने के बाद दिल्ली सरकार ने लोगों को होली, कांवड़ यात्रा, नवरात्रि, दशहरा, रामलीलाओं के मंचन से लेकर दिवाली और छठ पर्व जैसे त्योहार मनाने में हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। आज भी उनकी सरकार की यही कोशिश जमीन पर दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि आगे भी हर व्रत-त्योहार में उनकी कोशिश लगातार जनता को अधिक से अधिक सुविधाएं देने की रहेगी। 


क्या भाजपा दिल्ली में भव्य तरीके से छठ मनाकर बिहार में मतदाताओं को लुभाना चाहती है? अमर उजाला के इस प्रश्न पर रविंदर सिंह नेगी ने कहा कि  सनातन की सेवा करना उनके लिए राजनीति का मुद्दा नहीं है। यह उनके लिए जनता से किया गया वादा है जिसे उन्हें हर हाल में पूरा करना है। उन्होंने कहा कि इसके पहले की सरकार एक वर्ग विशेष के तुष्टिकरण के लिए फैसले लेती थी। हिंदुओं को पटाखे चलाने से लेकर छठ मनाने तक की अनुमति नहीं दी जाती थी। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती थी, लेकिन अब लोगों को अपना व्रत-त्योहार मनाने की पूरी आजादी है।    
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