Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार का संसद में पहला बयान, कहा- यह पाकिस्तानी आतंकी हमले का जवाब था
ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर के सवालों पर गुरुवार को सरकार ने संसद में शुक्रवार को पहली बार जवाब दिया। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में कहा, ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान की ओर से किए बर्बर आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ था।
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विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि यह सैन्य अभियान पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा किए गए एक बर्बर सीमा-पार पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था।
मंत्री ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करना और उन आतंकियों को खत्म करना था। जिन्हें भारत में घुसपैठ के लिए भेजा जा सकता था। भारत की कार्रवाई केंद्रित, संतुलित और गैर-उत्तेजक रही।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारत की कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने न केवल भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि नागरिक क्षेत्रों पर भी हमला करने की कोशिश की। इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान हमलों का जवाब देते हुए पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया।
सपा सांसद ने पूछे ये सवाल
सपा संसद ने लिखित सवाल में पूछा था कि ऑपरेशन सिंदूर अंतरराष्ट्रीय दबाव में घोषित किया गया था, इस संबंध में वास्तविक स्थिति क्या है? उन्होंने दूसरा सवाल पूछा- ऑपरेशन सिंदूर में युद्धविराम की अचानक घोषणा से सेना के मनोबल पर क्या प्रभाव पड़ा, जब हमारी सेनाएं महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त कर रही थीं, लेकिन अचानक युद्धविराम की घोषणा देश की जनता की भावनाओं और मनोबल के खिलाफ थी। उपरोक्त की वास्तविक स्थिति क्या है?
सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने किया था संपर्क- सरकार
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल में विदेश मंत्रालय से यह जानकारी मांगी गई थी कि क्या यह सच है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम अमेरिका के हस्तक्षेप के कारण हुआ, जबकि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान में बढ़त बना ली थी और सिर्फ तीन दिन के भीतर इसे रोका गया।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया, हमारे सभी वार्ताकारों को एक ही संदेश दिया गया कि भारत का दृष्टिकोण....लक्ष्य केंद्रित, संतुलित और तनाव न बढ़ाने वाला है। मंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान, 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सीधे संपर्क के परिणामस्वरूप गोलाबारी और सैन्य गतिविधि रोकने पर सहमत हुए। इस संपर्क की पहल पाकिस्तानी पक्ष द्वारा की गई थी।उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान और पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के अपने मुख्य लक्ष्य 8 मई को ही हासिल कर लिए थे।
अमेरिका से व्यापार को लेकर कोई बात नहीं हुई- कीर्तिवर्धन सिंह
मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमला होने से लेकर 10 मई तक, अमेरिका सहित, विभिन्न स्तरों पर विभिन्न देशों के साथ कई कूटनीतिक बातचीत हुई। उन्होंने बताया, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस को 9 मई को इस बात से अवगत करा दिया गया था कि अगर पाकिस्तान कोई बड़ा हमला करता है तो भारत 'माकूल जवाब' देगा। हमारी व्यापार वार्ता का मुद्दा (भारत-पाकिस्तान) संघर्ष से संबंधित बातचीत के संदर्भ में नहीं उठा था।
उन्होंने जवाब में बताया, तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के किसी भी प्रस्ताव के संबंध में, हमारा दीर्घकालिक रुख यही है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी लंबित मुद्दे पर केवल द्विपक्षीय चर्चा की जाएगी। यह बात सभी देशों को स्पष्ट की जा चुकी है जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति को इससे अवगत कराना भी शामिल है।
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चीन के समुद्री शक्ति बनने के लक्ष्य से भारत पूरी तरह अवगत
वहीं, विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि चीन के समुद्री शक्ति बनने के लक्ष्य से भारत पूरी तरह अवगत है। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्रभावित करने वाले सभी घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रखता है।
मंत्री ने कहा, भारत अपने हितों की रक्षा के लिए उचित उपाय करता है। हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ हमारे संबंध व्यापक और दीर्घकालिक हैं और किसी तीसरे देश के साथ उनके संबंधों से स्वतंत्र हैं।
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद सार्क वार्ता जारी रखने में बाधक
कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में बताया कि सीमा पार से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद सार्क वार्ता जारी रखने के प्रयास में बाधक है। इस वजह से क्षेत्र में व्यापार एवं परिवहन संपर्क प्रयासों को लेकर महत्वपूर्ण बैठकें नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा, भारत सार्क में घनिष्ठ सहयोग प्राप्त करने के लिए विविध क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों का समर्थन करता रहेगा। सार्क में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान व श्रीलंका हैं।