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ईज ऑफ डूइंग बिजनेसः टॉप 50 देशों में जगह बनाने के लिए 200 सुधार करेगी मोदी सरकार
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Wed, 01 Nov 2017 06:40 PM IST
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औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के सचिव रमेश अभिषेक ने कहा है कि केंद्र सरकार 200 से अधिक सुधारों को मान्यता दिलाने के लिए विश्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रही है, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत शीर्ष 50 देशों में शुमार होगा।
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अभिषेक ने सीआईआई इन्वेस्ट नॉर्थ सम्मेलन से इतर बताया कि हम इस साल पहले ही 122 सुधारों को लागू कर चुके हैं और इन्हें मान्यता दिलाने के लिए विश्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
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हम इस साल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित 90 और सुधार शुरू करने जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक द्वारा मंगलवार को जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट में भारत 130वें स्थान से 100वें स्थान पर पहुंच गया। भारत ने 30 पायदानों की छलांग कराधान, लाइसेंसिंग, निवेशक सुरक्षा तथा दिवालियापन प्रस्ताव में सुधारों की बदौलत लगाई।
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वर्ल्ड बैंक की रैंकिंग में 100वें नंबर पर पहुंचा भारत
कारोबार करने में सहूलियत 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में जबरदस्त 30 पायदान का सुधार हुआ है। इस साल की रिपोर्ट में भारत दुनिया भर के 189 देशों में 100वां स्थान हासिल किया है। इस सूची में पिछले वर्ष भारत का स्थान 130वां था। विश्व बैंक ने यह रिपोर्ट मंगलवार को जारी की।
विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट जारी होने के बाद केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से बातचीत में इसे ऐतिहासिक बताया और कहा कि इस समय भारत में कुछ और सुधार हो रहे हैं, इसलिए मान रहे हैं कि आने वाले वर्षों में स्थिति में इसी तरह का सुधार दिखेगा।
सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण फैसले ले लिया है जबकि कुछ पर काम चल रहा है। इसलिए आने वाले साल में इसमें और सुधार दिखेगा। जेटली के मुताबिक 2014 की रिपोर्ट में भारत का स्थान 142 वां था। इस तरह से अब तक भारत का स्थान 42 पायदान ऊपर हो चुका है।
उन्होंने कहा कि विश्व बैंक की रिपोर्ट में उन्हीं मसलों को शामिल किया जाता है, जिस पर एक जून तक न सिर्फ फैसला हो जाता है बल्कि अर्थव्यवस्व्था में उसका असर भी दिखने लगता है।
विश्व बैंक ने इस वर्ष की रिपोर्ट में भारत का विशेष रूप से उल्लेख किया है कि यहां महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल रिफार्म हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में तो एक जून से पहले हुए काम को शामिल करने की की परंपरा है और उनका मूल्यांकन इतना कठिन है कि सिर्फ सुधार ही नहीं देखते बल्कि उसका असर भी देखते हैं।
इस वर्ष एक जुलाई से जीएसटी लागू हुआ है और इसका असर बाद में दिखना शुरू हुआ है। इसलिए माना जा रहा है कि अगले साल रैंकिंग में और सुधार होगा।
जेटली ने बताया कि इस साल छोटे अंशधारकों के हित की रक्षा के मामले में भारत का स्थान चौथा रहा है। कारोबारियों को क्रेडिट दिलाने में भारत का स्थान 29वां रहा है जबकि बिजली कनेक्शन दिलवाने में भी भारत का स्थान 29वां रहा है।
सबसे बड़ी छलांग कराधान के मसले पर सुधार में रहा है। पिछले वर्ष भारत 189 देशों में 172वें स्थान पर था जबकि इस वर्ष 53 पायदान चढ़ कर 119वें स्थान पर आ गए। अगले वर्ष और सुधार होगा क्योंकि जीएसटी लागू हो गया है।
विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट जारी होने के बाद केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से बातचीत में इसे ऐतिहासिक बताया और कहा कि इस समय भारत में कुछ और सुधार हो रहे हैं, इसलिए मान रहे हैं कि आने वाले वर्षों में स्थिति में इसी तरह का सुधार दिखेगा।
सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण फैसले ले लिया है जबकि कुछ पर काम चल रहा है। इसलिए आने वाले साल में इसमें और सुधार दिखेगा। जेटली के मुताबिक 2014 की रिपोर्ट में भारत का स्थान 142 वां था। इस तरह से अब तक भारत का स्थान 42 पायदान ऊपर हो चुका है।
उन्होंने कहा कि विश्व बैंक की रिपोर्ट में उन्हीं मसलों को शामिल किया जाता है, जिस पर एक जून तक न सिर्फ फैसला हो जाता है बल्कि अर्थव्यवस्व्था में उसका असर भी दिखने लगता है।
विश्व बैंक ने इस वर्ष की रिपोर्ट में भारत का विशेष रूप से उल्लेख किया है कि यहां महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल रिफार्म हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में तो एक जून से पहले हुए काम को शामिल करने की की परंपरा है और उनका मूल्यांकन इतना कठिन है कि सिर्फ सुधार ही नहीं देखते बल्कि उसका असर भी देखते हैं।
इस वर्ष एक जुलाई से जीएसटी लागू हुआ है और इसका असर बाद में दिखना शुरू हुआ है। इसलिए माना जा रहा है कि अगले साल रैंकिंग में और सुधार होगा।
जेटली ने बताया कि इस साल छोटे अंशधारकों के हित की रक्षा के मामले में भारत का स्थान चौथा रहा है। कारोबारियों को क्रेडिट दिलाने में भारत का स्थान 29वां रहा है जबकि बिजली कनेक्शन दिलवाने में भी भारत का स्थान 29वां रहा है।
सबसे बड़ी छलांग कराधान के मसले पर सुधार में रहा है। पिछले वर्ष भारत 189 देशों में 172वें स्थान पर था जबकि इस वर्ष 53 पायदान चढ़ कर 119वें स्थान पर आ गए। अगले वर्ष और सुधार होगा क्योंकि जीएसटी लागू हो गया है।