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Enemy Properties: शत्रु संपत्तियां बेचने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश, गृह मंत्रालय के अधिकारी भी मिलीभगत में शामिल
Tue, 19 Jul 2022 08:02 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 19 Jul 2022 08:02 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों, सीईपीआई और गृह मंत्रालय और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ विभागीय जांच और सीबीआई जांच शुरू की है।
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सीबीआई जांच का एलान
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने कुछ अधिकारियों और उत्तर प्रदेश सरकार और भारत के लिए शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन (सीईपीआई) कार्यालय में काम करने वालों के खिलाफ कुछ शत्रु संपत्तियों की अवैध बिक्री और इन्हें पट्टे पर देने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। मिश्रा ने कहा कि सीईपीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा किसी भी उद्देश्य के लिए शत्रु संपत्ति का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
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विभागीय और सीबीआई जांच शुरू
उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि समय-समय पर शिकायतें मिलती हैं जिन्हें मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार सुलझाया जाता है। मामलों की पड़ताल के आधार पर सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों, सीईपीआई और गृह मंत्रालय और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ विभागीय जांच और सीबीआई जांच शुरू की है। मंत्री ने कहा कि शत्रु संपत्ति को पट्टे पर देना या बेचना शत्रु संपत्ति नियम, 2015 और शत्रु संपत्ति (संशोधन और सत्यापन) अधिनियम, 2017 के तहत किया जाता है।
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देश में 12,611 शत्रु संपत्तियां
मिश्रा ने कहा कि कुल 12,611 प्रतिष्ठान, जिन्हें शत्रु संपत्ति कहा जाता है। ये संपत्तियां उन लोगों द्वारा छोड़ी गई हैं जिन्होंने पाकिस्तान और चीन की नागरिकता ले ली है। उन्होंने कहा कि सीईपीआई के पास मौजूद 12,611 संपत्तियों में से 12,485 पाकिस्तानी नागरिकों से संबंधित थीं और बाकी 126 चीनी नागरिकों की थीं। शत्रु संपत्ति उन लोगों की हैं जिन्होंने विभाजन के दौरान और 1962 के युद्ध के बाद भारत छोड़ने के बाद पाकिस्तान और चीन की नागरिकता ले ली थी। शत्रु संपत्तियां सीईपीआई के पास निहित हैं, जो शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के तहत बनाया गया एक प्राधिकरण है।
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सबसे अधिक शत्रु संपत्तियां उत्तर प्रदेश (6,255 संपत्तियां) में पाई गई हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल (4,088 संपत्तियां), दिल्ली (659), गोवा (295), महाराष्ट्र (208), तेलंगाना (158), गुजरात (151), त्रिपुरा (105) का स्थान है। बिहार (94), मध्य प्रदेश (94), छत्तीसगढ़ (78) और हरियाणा (71), केरल (71) उत्तराखंड (69), तमिलनाडु (67), मेघालय (57), असम (29), कर्नाटक (24), राजस्थान (22), झारखंड (10), दमन और दीव में चार और आंध्र प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक-एक शत्रु संपत्तियां हैं। अब तक करीब 2700 करोड़ रुपये की चल संपत्तियों का निस्तारण किया जा चुका है और यह राशि भारत सरकार की संचित निधि में जमा की जा चुकी है।