ऑपरेशन सिंदूर पर सियासत जारी: खरगे बोले- जवानों की बहादुरी के पीछे छिप रहे पीएम; संसद के विशेष सत्र की मांग की
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय जेट गिराए जाने के दावे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष को बिना विश्वास में लिए और सच्चाई बताने के बजाए पीएम चुनावी तूफान में हैं। उन्होंने कहा कि वे सशस्त्र बलों की वीरता का व्यक्तिगत श्रेय ले रहे हैं और उनकी बहादुरी के पीछे छिप रहे हैं।
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सिंगापुर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉप अनिल चौहान भारतीय फाइटर जेट गिरने के दावों पर दिए बयान पर भारत में सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर बार-बार सवाल उठाने वाली कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र को घेरा है। कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि सीडीएस ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष की शुरुआत में भारतीय सेना का नुकसान हुआ था। कांग्रेस ने कहा कि इसे लेकर केंद्र ने विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने इस दौरान मांग करते हुए यह भी कहा कि पार्टी कारगिल समीक्षा समिति की तर्ज पर एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा हमारी रक्षा तैयारियों की व्यापक समीक्षा की मांग करती है। साथ ही उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाने को भी कहा।
मोदी सरकार ने देश को गुमराह किया- खरगे
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सिंगापुर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) द्वारा शनिवार को दिए साक्षात्कार के बाद कुछ अहम सवाल उठे हैं जिनका जवाब मिलना ही चाहिए। इसके लिए संसद का विशेष सत्र जरूरी है। कांग्रेस विशेष सत्र की मांग करती है। मोदी सरकार ने देश को गुमराह किया है। युद्ध का कोहरा अब छंट रहा है। हकीकत सामने आनी चाहिए देश की वायुसेना के पायलट दुश्मन से लड़ते हुए अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे। इस दौरान क्या भारतीय सेना को कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन हमारे पायलट सुरक्षित हैं।
खरगे ने कहा कि वह सैन्य कौशल सैनिकों के दृढ़ साहस और बहादुरी को सलाम करते हैं। हालांकि, इसमें एक व्यापक रणनीतिक समीक्षा समय की जरुरत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध विराम कराने के अपने दावे को फिर दोहराया है। यह शिमला समझौते का सीधा अपमान है।
प्रधानमंत्री मोदी चुनावी तूफान में सशस्त्र बलों की वीरता का व्यक्तिगत श्रेय ले रहे
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ट्रंप के बार-बार किए गए दावों और अमेरिकी वाणिज्य सचिव द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दायर हलफनामे को स्पष्ट करने के बजाय, प्रधानमंत्री मोदी चुनावी तूफान में हैं, देश के सशस्त्र बलों की वीरता का व्यक्तिगत श्रेय ले रहे हैं, उनकी बहादुरी के पीछे छिप रहे हैं और सहमत युद्ध विराम की रूपरेखा को चकमा दे रहे हैं, जिसकी घोषणा विदेश सचिव ने 10 तारीख को ट्रंप के ट्वीट के बाद की थी। क्या भारत और पाकिस्तान अब फिर से एक हो गए हैं? युद्ध विराम समझौते की शर्तें क्या हैं? 140 करोड़ देशभक्त भारतीयों को यह जानने का हक है।
कारगिल युद्ध की समीक्षा की तर्ज पर समिति बनाएगी केंद्र?
इससे पहले कांग्रेस पार्टी ने कहा कि था कि 29 जुलाई को 1999 को कारगिल युद्ध समाप्त होने के तीन दिन बाद वाजपेयी सरकार ने सामरिक विशेषज्ञ के सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में समिति का गठन किया और कारगिल युद्ध की समीक्षा की । समिति ने पांच माह बाद अपनी रिपोर्ट दी थी, जो कि संसद के दोनों पटलों पर रखी गई, क्या मोदी सरकार अब सिंगापुर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ द्वारा किए गए खुलासे के मद्देनजर ऐसा कुछ करेंगे।