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बंगाल: राज्यपाल धनखड़ ने सात मार्च रात दो बजे बुलाई विधानसभा की बैठक, समय पर बोले- यह कैबिनेट ने तय किया
Thu, 24 Feb 2022 04:16 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 24 Feb 2022 04:16 PM IST
सार
राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने सात मार्च 2022 को रात के दो बजे बंगाल विधानसभा की बैठक बुलाई है। राज्यपाल ने इस संबंध में ट्वीट कर समय को लेकर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने लिखा कि यह असामान्य है, लेकिन यह कैबिनेट का निर्णय है।
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बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की ममता सरकार और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच चल रहे टकराव के बीच राज्यपाल ने सात मार्च 2022 को रात दो बजे बंगाल विधानसभा की बैठक बुलाई है। राज्यपाल ने इस संबंध में ट्वीट किया कि संविधान के अनुच्छेद 174(1) को लागू करते हुए कैबिनेट के निर्णय को स्वीकार किया गया है। इसके मद्देनजर विधानसभा की बैठक 7 मार्च, 2022 को देर रात दो बजे बुलाया गया है। उन्होंने आगे लिखा कि आधी रात के बाद दो बजे विधानसभा की बैठक असामान्य है और यह अपने आप में ऐतिहासिक है, लेकिन यह कैबिनेट का फैसला है।
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वहीं, जब बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी से राज्यपाल द्वारा दो बजे विधानसभा की बैठक बुलाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि टाइपिंग में कोई गलती हुई होगी, जिसे सही किया जा सकता था। राज्य सरकार ने जब सूचना भेजी थी, उस वक्त दोपहर 2 बजे का उल्लेख किया गया था।
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गौरतलब है कि ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच लगातार विवाद चल रहा है। बताया जा रहा है कि धनखड़ ने 19 फरवरी को राज्य विधानसभा सत्र का आयोजन सात मार्च से करने के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को लौटा दिया था। राज्यपाल ने कहा कि प्रस्ताव में संवैधानिक नियमों का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने इस बात की जानकारी ट्विटर पर साझा भी की थी।
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राज्यपाल ने कहा था कि विधानसभा सत्र सात मार्च से कराने की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सिफारिश को संवैधानिक अनुपालन के लिए वापस करना पड़ा। सरकार विधानसभा सत्र का आह्वान कैबिनेट की ओर से बनाए गए प्रस्ताव पर करती है जो संविधान की धारा 166(3) के तहत नियमों पर आधारित होता है।
धनखड़ ने उस पत्र की प्रति भी अपने ट्वीट में संलग्न की थी, जो उन्होंने प्रस्ताव को वापस भेजते हुए सरकार को लिखा है। राज्यपाल ने कहा था कि संवैधानिक अनुपालन के लिए प्रस्ताव की फाइल को वापस भेजना एकमात्र विकल्प था। मामले में निराशा व्यक्त करते हुए टीएमसी के प्रवक्ता सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यपाल पर प्रशासनिक काम में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया था।