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गंगा स्वच्छता को जमीन पर उतारने के लिए जनता के बीच जाएगी सरकार
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2016 01:13 AM IST
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गंगा नदी
- फोटो : अमर उजाला
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पीएम मोदी के नमामि गंगे अभियान को जमीन पर उतार पाने में नाकाम रही सरकार अब जनता की शरण में जाने की तैयारी में है। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्री उमा भारती ने ऐलान किया है कि वह गंगा स्वच्छता के मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएंगी।
उमा ने कहा है कि जनभागीदारी बढ़ाने के लिए वे अक्टूबर से सप्ताह में तीन दिन गंगा किनारे के गावों में पदयात्रा कर जनता को जागरूक करेंगी। बताया जा रहा है कि उनकी यह पदयात्रा 21 अक्टूबर से शुरू होगी। उमा ने कहा कि जनभागीदारी के लिए उनके पदयात्रा के प्रस्ताव में श्रीश्री रविशंकर, स्वामी राम देव, गायत्री परिवार के प्रमुख प्रणव पांड़या, बिशप और पटना साहिब के प्रमुख ग्रंथी से भी सहयोग का वायदा मिला है।
ये सभी लोग उनकी यात्रा में सहयोग कर जनता को गंगा स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास करेंगे। वैसे उमा के इस पदयात्रा को सियासी चश्में से भी देखा जा रहा है। अगले वर्ष के शुरू में यूपी और उत्तराखंड विधानसभा का चुनाव है। गंगा स्वच्छता के जरिए उमा की पदयात्रा को दोनों प्रदेशों में भाजपा की सियासी जमीन मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
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उमा ने कहा है कि जनभागीदारी बढ़ाने के लिए वे अक्टूबर से सप्ताह में तीन दिन गंगा किनारे के गावों में पदयात्रा कर जनता को जागरूक करेंगी। बताया जा रहा है कि उनकी यह पदयात्रा 21 अक्टूबर से शुरू होगी। उमा ने कहा कि जनभागीदारी के लिए उनके पदयात्रा के प्रस्ताव में श्रीश्री रविशंकर, स्वामी राम देव, गायत्री परिवार के प्रमुख प्रणव पांड़या, बिशप और पटना साहिब के प्रमुख ग्रंथी से भी सहयोग का वायदा मिला है।
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ये सभी लोग उनकी यात्रा में सहयोग कर जनता को गंगा स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास करेंगे। वैसे उमा के इस पदयात्रा को सियासी चश्में से भी देखा जा रहा है। अगले वर्ष के शुरू में यूपी और उत्तराखंड विधानसभा का चुनाव है। गंगा स्वच्छता के जरिए उमा की पदयात्रा को दोनों प्रदेशों में भाजपा की सियासी जमीन मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
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जनभागीदारी के बिना गंगा की स्वच्छता संभव नहीं है
उमा भारती
नमामि गंगे अभियान के अपने प्रयासों की जानकारी देते हुए उमा ने कहा कि उन्होंने पहले से ही तय कर रखा था कि जनभागीदारी के बिना गंगा की स्वच्छता संभव नहीं है। इसीलिए सरकार की पूरी कार्ययोजना बनने के बाद वे अब जनता के बीच उतर रही हैं।
इससे पहले उमा ने पीएम मोदी से गोमुख से गंगा सागर तक की पदयात्रा करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन अब उन्होंने अक्टूबर से अपना जनताभागीदारी प्रयास शुरू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि अक्टूबर 2016 से अक्टूबर 2018 तक वे माह का तीन दिन गंगा किनारे गांवों में पदयात्रा में गुजारेंगी। हालांकि अक्टूबर 2016 में अभियान को लोकप्रिय बनाने के लिए सप्ताह का तीन दिन पदयात्रा में लगाएंगी।
वहीं उमा ने देश-विदेश में रह रहे भारतवंशियों से ऐलान किया है कि गंगा की स्वच्छता के लिए वे अपना योगदान दें। गंगा के लिए उन्होंने लोगों से दान करने की अपील की है। साथ ही उन्होंनो जनता से आह्वान किया है कि गंगा स्वच्छता की कार्ययोजना तैयार है। परियोजना का खर्च व्यय कर लोग अपने परिवार के व्यक्तियों की नाम पट्टी गंगा किनारे होने वाले इन कामों पर लगाएं। उन्होंने कहा कि जरूरी होगा तो ही वे सरकार की राशि खर्च करेंगी। वरना जनता के धन से ही गंगा को स्वच्छ बनाने का प्रयास करेंगी।
इससे पहले उमा ने पीएम मोदी से गोमुख से गंगा सागर तक की पदयात्रा करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन अब उन्होंने अक्टूबर से अपना जनताभागीदारी प्रयास शुरू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि अक्टूबर 2016 से अक्टूबर 2018 तक वे माह का तीन दिन गंगा किनारे गांवों में पदयात्रा में गुजारेंगी। हालांकि अक्टूबर 2016 में अभियान को लोकप्रिय बनाने के लिए सप्ताह का तीन दिन पदयात्रा में लगाएंगी।
वहीं उमा ने देश-विदेश में रह रहे भारतवंशियों से ऐलान किया है कि गंगा की स्वच्छता के लिए वे अपना योगदान दें। गंगा के लिए उन्होंने लोगों से दान करने की अपील की है। साथ ही उन्होंनो जनता से आह्वान किया है कि गंगा स्वच्छता की कार्ययोजना तैयार है। परियोजना का खर्च व्यय कर लोग अपने परिवार के व्यक्तियों की नाम पट्टी गंगा किनारे होने वाले इन कामों पर लगाएं। उन्होंने कहा कि जरूरी होगा तो ही वे सरकार की राशि खर्च करेंगी। वरना जनता के धन से ही गंगा को स्वच्छ बनाने का प्रयास करेंगी।