{"_id":"5b1f0cd54f1c1b315d8b4856","slug":"government-will-investigate-stop-whatsapp-calling-in-violent-areas","type":"story","status":"publish","title_hn":"आतंकियों के खुलासे के बाद हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में व्हाट्सएप कॉलिंग होगी या नहीं, जांच करेगी सरकार ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
आतंकियों के खुलासे के बाद हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में व्हाट्सएप कॉलिंग होगी या नहीं, जांच करेगी सरकार
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Tue, 12 Jun 2018 05:29 AM IST
विज्ञापन
व्हाट्सएप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार जम्मू-कश्मीर जैसे हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में व्हाट्सएप कॉलिंग सेवा बंद करने से पहले इसके औचित्य की जांच करेगी। ऐसी खबरें हैं कि आतंकी सीमापार अपने आकाओं के संपर्क में रहने के लिए इस सेवा का इस्तेमाल करते हैं जिसे देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है।
यह मुद्दा गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक बैठक के दौरान उठा था। बैठक में 2016 में नागरोटा सैन्य शिविर पर आतंकी हमले से जुड़े कुछ आतंकियों की हाल में हुई गिरफ्तारी का मुद्दा उठा, तो तय किया गया कि व्हाट्सएप कॉलिंग पर रोक लगाई जाए या नहीं, पहले इसकी व्यावहारिकता परखी जाएगी। बता दें कि इस मामले में गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने जम्मू कश्मीर पुलिस को बताया था कि वे व्हाट्सएप कॉल के जरिये सीमापार से निर्देश पाते थे।
बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, सुरक्षा एजेंसियों और जम्मू कश्मीर पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इन अधिकारियों ने कीपैड जिहादियों द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइटों पर भड़काऊ और राष्ट्रदोही पोस्ट डाले जाने पर भी चर्चा की, जिन वजहों से किसी घटना को सांप्रदायिक रंग देकर या अफवाह फैलाकर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है। अधिकारियों ने कहा कि कॉल करने के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की समस्या बढ़ा दी है। उन्हें पता नहीं चल पाता कि कहां से कहां कॉल की जा रही है।
विज्ञापन
अधिकारियों ने खाड़ी समेत उन देशों का उदाहरण भी दिया, जहां बैठक के दौरान व्हाट्सएप वॉयस या वीडियो कॉलिंग की अनुमति नहीं होती है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बैठक में आतंकियों द्वारा दी जा रही सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के प्रभावी उपायों पर चर्चा की गई। इस दौरान सोशल मीडिया साइटों पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक को लेकर भी चर्चा हुई।
विज्ञापन
यह मुद्दा गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक बैठक के दौरान उठा था। बैठक में 2016 में नागरोटा सैन्य शिविर पर आतंकी हमले से जुड़े कुछ आतंकियों की हाल में हुई गिरफ्तारी का मुद्दा उठा, तो तय किया गया कि व्हाट्सएप कॉलिंग पर रोक लगाई जाए या नहीं, पहले इसकी व्यावहारिकता परखी जाएगी। बता दें कि इस मामले में गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने जम्मू कश्मीर पुलिस को बताया था कि वे व्हाट्सएप कॉल के जरिये सीमापार से निर्देश पाते थे।
विज्ञापन
बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, सुरक्षा एजेंसियों और जम्मू कश्मीर पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इन अधिकारियों ने कीपैड जिहादियों द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइटों पर भड़काऊ और राष्ट्रदोही पोस्ट डाले जाने पर भी चर्चा की, जिन वजहों से किसी घटना को सांप्रदायिक रंग देकर या अफवाह फैलाकर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है। अधिकारियों ने कहा कि कॉल करने के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की समस्या बढ़ा दी है। उन्हें पता नहीं चल पाता कि कहां से कहां कॉल की जा रही है।
विज्ञापन
अधिकारियों ने खाड़ी समेत उन देशों का उदाहरण भी दिया, जहां बैठक के दौरान व्हाट्सएप वॉयस या वीडियो कॉलिंग की अनुमति नहीं होती है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बैठक में आतंकियों द्वारा दी जा रही सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के प्रभावी उपायों पर चर्चा की गई। इस दौरान सोशल मीडिया साइटों पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक को लेकर भी चर्चा हुई।