मनरेगा में सरकार ने आज दिए 1200 करोड़, 11.78 करोड़ लोगों ने लिया योजना का लाभ
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट (मनरेगा) के तहत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने 1200 करोड़ का भुगतान और किया है। जानकारी के मुताबिक कुछ अन्य योजनाओं से शेष बची लगभग 500 करोड़ राशि का भुगतान भी जल्दी ही कर दिया जाएगा। इसके पिछले हफ्ते में भी इस मद में 3,900 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया था। सरकार के आंकड़े के मुताबिक साल 2018-19 में 11.78 करोड़ लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मंत्रालय ने मनरेगा के तहत सरकार से 10 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त देने की मांग की थी। लेकिन वित्त मंत्रालय से केवल छह हजार करोड़ रुपये मिलने का ही आश्वासन मिला था। ध्यान देने की बात है कि 2019-20 के अंतरिम बजट में सरकार ने मनरेगा के लिए 60 हजार करोड़ रुपये देने की बात कही है। इससे ग्रामीण आर्थिक व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
गरीब राज्यों में तेजी से लिया योजना का लाभ
मनरेगा योजना देश के गरीबों में किस हद तक लोकप्रिय है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गरीब राज्यों में योजना का नब्बे फीसदी तक लाभ लिया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में पूरे देश में त्रिपुरा इस मामले का लाभ लेने में सबसे आगे है। यहां कुल 10,52,785 रजिस्टर्ड मजदूरों में से 91.51 फीसदी यानी 9,63,430 लोगों ने इस योजना के तहत रोजगार प्राप्त किया। दूसरे नंबर पर मिजोरम है जहां 2,45,505 रजिस्टर्ड लोगों में से 2,09,647 यानी लगभग 85.39 फीसदी लोगों ने रोजगार प्राप्त किया। नागालैंड में इस योजना में लगभग अस्सी फीसदी लोगों ने रोजगार प्राप्त किया।
बड़े राज्यों में प्रतिशत अवश्य कम है, लेकिन कुल संख्या के मामले में यहां लाखों मजदूरों ने रोजगार प्राप्त किया। अगर उत्तरप्रदेश की बात करें तो यहां कुल 1,06,48,452 लोगों ने मगनरेगा के तहत रोजगार प्राप्त किया। कुल रजिस्टर्ड 2,35,05,018 मजदूरों का यह लगभग 45.30 फीसदी है। दूसरे बड़े राज्य राजस्थान में भी इस योजना के तहत 99,98,180 लोगों ने रोजगारा पाया जो कुल संख्या 2,32,41,008 का 43.02 फीसदी है। इस योजना के तहत 2018-19 में 204.19 करोड़ श्रम दिवसों का कार्य किया जा चुका है। सरकार का अनुमान है कि श्रमिकों के कार्य से 4.68 करोड़ परिवारों को लाभ मिला है।
योजना की खासियत
यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना से देश के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मजदूरों को ऐसे समय में रोजगार दिया जाता है जब उनके पास कोई काम नहीं होता। यह रोजगार उनके द्वारा मांगे जाने पर उनके मूल निवास के एक सीमित दूरी के दायरे में ही उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है। निश्चित दूरी से अधिक दूरी पर भेजने पर उसे अतिरिक्त भुगतान किया जाता है। इस योजना से गरीबों को काफी लाभ हुआ है, यही कारण है कि सरकार इस मद में लगातार लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही है।