श्रीनगर पहुंचे अमेरिका समेत 16 देशों के राजनयिक, कश्मीर की मौजूदा स्थिति का लेंगे जायजा
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जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के बाद भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ आई जस्टर समेत 16 देशों के राजनयिक मौजूदा स्थिति का मुआयना करने गुरुवार को श्रीनगर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में रहने वाले ये राजनयिक विशेष विमान में श्रीनगर के तकनीकी हवाई-अड्डे पर पहुंचे, जहां अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
ये सभी राजनयिक दौरे के दौरान उपराज्यपाल जीसी मुर्मू और सिविल सोसायटी के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। अमेरिका के अलावा प्रतिनिधिमंडल में बांग्लादेश, वियतनाम, नार्वे, मालदीव, दक्षिण कोरिया, मोरक्को, नाइजीरिया और अन्य देशों के राजनयिक भी शामिल होंगे। ब्राजील के राजदूत को भी राज्य के दौरे पर जाना था लेकिन दिल्ली में अपनी व्यस्तता के चलते उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया।
Sources: A delegation of 15 foreign envoys reached Srinagar and are currently being briefed by Indian Army on security situation. Delegation includes envoys from USA,Argentina,South Korea,Uzbekistan,Bangladesh,Norway,Maldives,Niger and Morocco. #JammuAndKashmir pic.twitter.com/GilcvzVmX1
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) January 9, 2020
यूरोपीय संघ के राजनयिक बाद में करेंगे दौरा
यूरोपीय संघ के देशों के राजनयिकों ने सरकार को अवगत कराया कि वे किसी अलग तिथि को इस केंद्र शासित राज्य का दौरा करेंगे। साथ ही इन देशों के राजनयिकों ने तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती से भी मुलाकात कराने पर जोर दिया है जिस पर सरकार विचार कर रही है।
विदेशी राजनयिकों ने की थी मांग
अधिकारियों के मुताबिक, बृहस्पतिवार को राज्य के दौरे पर जाने वाले राजनयिक सिविल सोसायटी के सदस्यों से मुलाकात करेंगे और उन्हें विभिन्न एजेंसियों द्वारा राज्य के सुरक्षा हालात के बारे में भी अवगत कराया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि कई देशों के राजनयिकों ने सरकार से कश्मीर के दौरे का अनुरोध किया था। यह दौरा कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रोपगेंडा की हकीकत से विदेशी राजनयिकों को अवगत कराने की सरकार की कोशिशों के तहत हो रहा है।
23 यूरोपीय सांसदों ने की थी यात्रा
इससे पहले यूरोपीय संघ के 23 सांसदों ने राज्य का दौरा कर हालात की जानकारी ली थी। हालांकि इस दौरे की व्यवस्था एक गैर सरकारी एनजीओ की ओर से की गई थी।