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यूपीए सरकार के एजेंडे पर लौटी सरकार, समस्या के समाधान के लिए अब होगी कश्मीरियों से बात

Tue, 24 Oct 2017 07:28 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Tue, 24 Oct 2017 07:28 AM IST
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Government return on UPA government agenda start talk on kashmir issue
पीएम मोदी और मनमोहन सिंह
केन्द्र सरकार ने फिर बातचीत के जरिए कश्मीर की समस्या सुलझाने की पहल की है। इसके लिए खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा को कैबिनेट सचिव स्तर का दर्जा देकर प्रमुख वार्ताकार नियुक्त किया गया है। इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले से की घोषणा के अगले कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने लाल किला की प्राचीर से कहा था कि कश्मीर की समस्या का समाधान न गाली से होगा, न गोली से। इसका समाधान वहां के लोगों को गले लगाने से होगा।
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इससे पहले केन्द्र सरकार ने 2010 में कश्मीर में हिंसा भड़कने के बाद समस्या के समाधान को लेकर तीन वार्ताकारों को नियुक्त किया था। इनमें वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पडगांवकर, पूर्व सूचना आयुक्त एमएम अंसारी और प्रो. राधाकुमार शामिल थी। तब पी. चिदंबरम केन्द्रीय गृहमंत्री थे। 
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इन वार्ताकारों ने 2011 में अपनी रिपोर्ट दी थी और इसे तत्कालीन केन्द्र सरकार ने काफी गंभीरता से लिया था। इसके बाद मई 2014 में एनडीए की सरकार सत्ता में आई। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर समस्या के समाधान को लेकर केन्द्र सरकार का शुरू का निर्णय सही नहीं रहा। कश्मीर, पाकिस्तान, अलगाववादियों को लेकर केन्द्र सरकार के भिन्न नजरिए से समस्या उलझती चली गई।
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क्या सही है वार्ता की पहल
केन्द्र सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि कश्मीर में समस्या के समाधान के वार्ता की पहल का यह सही समय है। सेना मुख्यालय के सूत्र का कहना है कि नियंत्रण रेखा पर आए दिन घुसपैठ का प्रयास करते हुए आतंकी मारे जा रहा हैं। सेना मुख्यालय का कहना है कि आतंकियों के खिलाफ उसका लगातार रवैया काफी सख्त रहा है।

घाटी के भीतर सीमापार से घुसपैठ कर चुके आतंकियों के साथ भी सुरक्षा बलों की आए दिन मुठभेड़ जारी है। इस साल अभी तक करीब 160 आतंकियों के मारे जाने की सूचना है। खुद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि हर रोज सुरक्षा बल 4-5 आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार रहे हैं। इस तरह से आतंकियों के खिलाफ सरकार का रवैय्या काफी सख्त है।

घाटी और कश्मीर में चल रही आतंकी गतिविधियों के लिए वित्तीय मदद पहुंचाना टेढ़ी खीर हो गया है। हाल में एनआईए ने भी एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस मामले की तहकीकात कर रही है और केन्द्रीय गृह मंत्रालय तथा केन्द्र सरकार लगातार फंडिग पर शिकंजा कस रही है।
 

क्या कहते हैं नेता

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Mehbooba Mufti - फोटो : File Photo
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केन्द्र सरकार के कदम को सकारात्मक बताया है। महबूबा मुफ्ती ने दिनेश्वर शर्मा को वार्ताकार नियुक्त किए जाने का स्वागत किया है। वहीं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर सवाल उठाया है। 

अब्दुल्ला के अनुसार जो लोग ताकत के बल पर कश्मीर की समस्या का समाधान करना चाहते थे, यह उनकी हार को दर्शा रहा है। पूर्व केन्द्रीय गृहमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भी केन्द्र सरकार के इस निर्णय को उसकी नाकामी से जोड़ा है। चिदंबरम ने कश्मीर पर वार्ताकार नियुक्त करने के फैसले को सरकार के नीतियों की हार बताया है।

दिनेश्वर शर्मा ही क्यों?

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दिनेश्वर शर्मा - फोटो : ani
खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा केरल कॉडर के 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।  शर्मा 1999-03 तक खुफिया ब्यूरो में बतौर संयुक्त निदेशक (इस्लामिक आतंकवाद डेस्क) उनका काम शानदार रहा है। 2003-05 में सीआरपीएफ में आईजी थे और दिनेश्वर शर्मा के पास ही केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल का जम्मू-कश्मीर का प्रभार था। 

बीएसएफ की अकादमी में पूर्व निदेशक के तौर पर काम कर चुके दिनेश्वर इसके बाद खुफिया ब्यूरो में एडिशनल और स्पेशल डायरेक्टर बने थे। तेज तर्रार अफसर रहे शर्मा 2008 से लेकर खुफिया ब्यूरो के निदेशक के पद से अवकाश प्राप्त करने तक ऐजेंसी से ही जुड़े रहे। 

ऐसा माना जाता है कि शार्म के पास जम्मू-कश्मीर के हर क्षेत्र से जुड़ी अच्छी-खासी जानकारी है। इस क्रम में एक और तथ्य है। वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ काम कर चुके विश्वासपात्र अफसरों में से हैं।
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