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कोरोना संक्रमण : लक्षण रहित बच्चों को इलाज की जरूरत नहीं, जानें कुछ अहम सवाल

Sat, 01 May 2021 06:30 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 01 May 2021 06:30 AM IST
सार

  • मध्यम लक्षण वाले बच्चों को अस्पताल में इलाज की जरूरत
  • बुखार 100 डिग्री से अधिक तो बिना देरी के डॉक्टरी सलाह लें

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government issued a new protocol for corona infection and treatment in children
सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : istock

विस्तार

कोरोना महामारी के बेकाबू प्रकोप के बीच केंद्र सरकार ने बच्चों में कोरोना संक्रमण और इलाज के लिए नया प्रोटोकॉल जारी किया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि अधिकतर बच्चों को संक्रमण के हल्के लक्षण हैं, कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि लक्षण रहित बच्चों को इलाज की जरूरत नहीं है। इनके स्वास्थ्य की निगरानी बहुत जरूरी है।

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केंद्र सरकार ने कहा है कि बच्चों में या तो लक्षण नहीं है या बहुत हल्का लक्षण है। सामान्य लक्षणों बुखार, खांसी, सांस में तकलीफ, गले में खराश, आदि समस्या हो सकती है। कुछ बच्चों में पाचन संबंधी तकलीफ भी संभव है।
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कुछ बच्चों में मल्टी सिस्टम इन्फलैमेट्री सिंड्रोम (एमआईएस) की तकलीफ हो रही है। ऐसे बच्चों को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है। इस तरह की तकलीफ से गुजरने वाले बच्चों को 100.4 डिग्री का बुखार भी हो सकता है।
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बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े कुछ अहम सवाल

सवाल: घर में हल्के लक्षण वाले से पीड़ित बच्चों का इलाज कैसे करें?

जवाब : बच्चे को बुखार है तो उसके वजन और उम्र के अनुसार डॉक्टर हर चार से छह घंटे पर पैरासीटामॉल दवा दे सकते हैं। गले में खरास होने पर गुनगुने पानी से गरारा कर सकते हैं।

शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए तरल पदार्थ अधिक मात्रा में देना है। हल्के लक्षण वाले कोरोना संक्रमित बच्चों को एंटीबायोटिक देने की जरूरत नहीं है। अभिभावक अपने अनुसार बच्चों को हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, रेमडेसिविर और डेक्सामेथासन आदि दवाएं न दें।

सवाल : बच्चों में कोरोना के सामान्य लक्षणों को कैसे पहचानें?
जवाब:
बच्चे का ऑक्सीजन लेवल 90 फीसदी है तो वो सामान्य श्रेणी में आएगा। दो माह से कम बच्चे को संक्रमण होने पर सांस लेने की दर प्रति मिनट 60 से कम नहीं होनी चाहिए। दो से बारह माह के बच्चे में ये दर 50 से अधिक होनी चाहिए। एक से पांच वर्ष के उम्र के बच्चों में ये दर 40 प्रति मिनट होनी चाहिए।

इसी तरह पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में सांस लेने की दर तीस बार प्रति मिनट होना चाहिए। सामान्य लक्षण वाले बच्चों को निमोनिया की भी तकलीफ हो सकती है। हालांकि कोरोना जांच जरूरत नहीं है।

मध्यम लक्षण वाले बच्चों को बिना देरी किए कोविड अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराना होगा। बच्चे के बुखार से लेकर ऑक्सीजन के स्तर को मापते रहना होगा। तरल पदार्थ अधिक मात्रा में देना है जिससे शरीर में पानी की कमी न हो।

सवाल : कोरोना संक्रमित गंभीर बच्चे की पहचान कैसे होगी?
जवाब:
बच्चे का ऑक्सीजन लेवल 90 फीसदी से कम है तो उसे गंभीर संक्रमण है। खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से उसके होंठ नीले पड़ सकते हैं। सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। बेचैनी और घबराहट के साथ वो बार-बार अच्छा महसूस न होने की बात कहेगा।


इस तरह की तकलीफ वाले बच्चों के सीने में गंभीर संक्त्रस्मण हो सकता है। कुछ बच्चों में झटका आने के साथ थकान की भी तकलीफ हो सकती है। ऐसे बच्चों का इलाज अस्पताल में ही संभव है

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