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किसानों का गुस्सा रोकने के लिए धान की रिकॉर्ड खरीद कर रही है सरकार, लेकिन 72 घंटे बाद भी नहीं दे रही दाम

Wed, 18 Nov 2020 04:26 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 18 Nov 2020 04:26 PM IST
सार

  • अच्छी खरीद के बाद भी फसलों का मूल्य मिलने में हो रही डेढ़-दो महीनों की देरी
  • 72 घंटे में फसलों के दाम मिलने के दावे गलत साबित हो रहे हैं
  • बासमती चावल के दाम एक हजार रुपये तक नीचे गिरे

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Government is procuring records of paddy on MSP to stop farmers movement
Narela Mandi - फोटो : AmarUjala (सांकेतिक)

विस्तार

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किसानों के लिए यह दिवाली काफी अच्छी साबित हुई है। सरकार ने पिछले वर्ष की इसी समयावधि की तुलना में इस बार धान की 20.3 फीसदी ज्यादा खरीद की है। इसका सबसे ज्यादा फायदा पंजाब-हरियाणा के किसानों को मिला है जहां से लगभग 70 फीसदी धान की खरीद की गई है। हालांकि, इसके बाद भी किसानों की सरकार से नाराजगी जारी है। किसानों ने आरोप लगाया है कि धान की फसल की ज्यादा खरीद कर सरकार उनके आंदोलन को कमजोर करना चाहती है, लेकिन वे नए कृषि कानूनों के वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं।

कितनी हुई खरीद

सरकार ने इस साल पंजाब-हरियाणा में 26 सितंबर से और अन्य राज्यों में एक अक्टूबर से धान की खरीद शुरू कर दी थी। इस सीजन में 15 नवंबर तक 281.28 लाख टन धान की खरीद की जा चुकी है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 20.3 फीसदी ज्यादा है। कुल खरीद में पंजाब-हरियाणा के किसानों का हिस्सा लगभग 70 फीसदी है।

कम मिल रही है कीमत

किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि सरकार ने गैर-बासमती धान की फसल के लिए 1868 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। लेकिन खुले बाजार में इसकी कीमत 1400-1500 रुपये से ज्यादा नहीं मिल रही है। पूसा बासमती 1121 और पूसा बासमती 1509 का मूल्य तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए, लेकिन बाजार में इसे 2000 रुपये से ज्यादा का दाम नहीं मिल रहा है। इस प्रकार गैर-बासमती धान की फसल पर किसानों को प्रति क्विंटल 300-400 रुपये और बासमती चावल पर एक हजार रुपये प्रति क्विंटल का घाटा हो रहा है।

पिछले वर्ष हुई थी इतनी खरीद

कृषि मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में कुल 760.40 लाख मिट्रिक टन धान की खरीद की गई थी। इसमें पंजाब से सबसे ज्यादा 162.33 लाख मिट्रिक टन, तेलंगाना से 111.26 लाख मिट्रिक टन, आंध्रप्रदेश से 79.68 लाख मिट्रिक टन और ओडीशा से 70.57 लाख मिट्रिक टन की खरीद की गई थी।

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72 घंटे में नहीं मिल रहे दाम

भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि नियमों के अनुसार फसल की खरीद के 72 घंटे के अंदर किसान को उसका पैसा मिल जाना चाहिए। लेकिन पंजाब-हरियाणा के अनेक किसानों का पैसा खरीद के डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी नहीं मिला है। किसानों का आरोप है कि पंजाब-हरियाणा में ही सबसे ज्यादा खरीद के पीछे यही कारण है कि सरकार धान की ज्यादा खरीद कर नाराज किसानों का गुस्सा कम करने की कोशिश कर रही है, जबकि देश के अन्य राज्यों में भी किसानों को पैसे की जरूरत है और उनकी फसलों की खरीद भी जल्द से जल्द की जानी चाहिए।

26 नवंबर को दिल्ली घेरने की तैयारी

किसानों ने नए कृषि कानूनों के विरोध में 26 नवंबर को दिल्ली घेरने का एलान कर रखा है। इसके लिए पंजाब के अंबाला बॉर्डर से किसान 25 नवंबर को कूच करेंगे। कोंडली बॉर्डर के रास्ते किसानों का दिल्ली में प्रवेश करने का कार्यक्रम है। किसानों ने आंदोलन के लिए दिल्ली के रामलीला ग्राउंड की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने इनकार कर दिया था।

वहीं, दिल्ली में कोरोना की गंभीर स्थिति देखकर सरकार बड़ी भीड़भाड़ इकट्ठा करने पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में किसान आंदोलन के भविष्य पर भी कोरोना के संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इस पर एक-दो दिन में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

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