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दोकलम में चीन की मौजूदगी को लेकर हरकत में सरकार, सेना प्रमुख-NSA ने किया भूटान का गुपचुप दौरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 19 Feb 2018 07:49 AM IST
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दोकलम में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी की खबरों के बीच सरकार में हरकत तेज हो गई है। इसी क्रम में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, विदेश सचिव विजय गोखले और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस महीने की शुरुआत में चुपचाप भूटान का असाधारण दौरा किया। इस दौरान भूटानी नेतृत्व के साथ अहम रणनीतिक मुद्दों पर गहन बातचीत की गई।
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सेना प्रमुख, एनएसए और विदेश सचिव ने दो सप्ताह पहले किया भूटान का गुपचुप दौरा
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इसका फोकस दोकलम पठार के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी और रक्षा ढांचे के निर्माण पर रहा। सरकार के कई सूत्रों के अनुसार, यह दौरा 6 और 7 फरवरी को हुआ और प्रमुख भारतीय अधिकारियों तथा भूटान सरकार के बीच बैठकों से सकारात्मक परिणाम सामने आए। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग की समीक्षा की तथा इसे मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया।
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तीन बड़े अधिकारियों के असाधारण दौरे में दोकलम पठार के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी पर रहा फोकस
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जनरल रावत, एनएसए डोभाल और गोखले का यह दौरा दोकलम गतिरोध के बाद भारत की ओर से भूटान का पहला शीर्ष स्तरीय दौरा था। भूटान और भारत दोनों ही पक्षों ने इस दौरे को गोपनीय रखा। इस दौरे से तीन दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भूटानी समकक्ष सेरिंग तोबगे के साथ गुवाहाटी में एक निवेश सम्मेलन से इतर बातचीत की थी। सूत्रों ने बताया कि भूटानी पक्ष ने भूटान तथा चीन के बीच सीमा वार्ताओं की स्थिति के बारे में भारतीय पक्ष को अवगत कराया और इस बात पर जोर दिया कि थिंपू दोकलम ट्राई-जंक्शन में शांति चाहता है।
भारत का तर्क दोकलम विवाद में उसका पक्ष भी सुना जाए
चीन और भूटान इस इलाके में विवाद के समाधान के लिए बातचीत कर रहे हैं। भारत का तर्क है कि इस ट्राई-जंक्शन से तीन देश जुड़े हैं, इसलिए इस मुद्दे पर उसका पक्ष भी सुना जाना चाहिए। खासकर 2012 में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते की पृष्ठभूमि में ऐसा होना चाहिए। तब से अब तक दोनों देशों में 20 दौर की वार्ता हो चुकी है।
भूटान के भारत से करीबी राजनयिक व सैन्य संबंध
भूटान के चीन के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। भारत के करीबी मित्र और पड़ोसी के तौर पर भूटान के नई दिल्ली के साथ राजनयिक और सैन्य संबंध रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि इस दौरे में सेना और विदेश मंत्रालय के कुछ अन्य प्रमुख अधिकारी भी गए थे। विदेश सचिव की भूटान यात्रा के बारे में पूछे जाने पर एक राजनयिक सूत्र ने इसे नियमित दौरा बताया। पिछले नौ माह में यह जनरल रावत का दूसरा भूटान दौरा था।
सेना प्रमुख ने की उत्तरी सीमा पर ध्यान देने की वकालत
जनरल रावत चीन के साथ लगने वाली करीब 4,000 किमी लंबी सीमा पर भारत द्वारा पर्याप्त ध्यान दिए जाने की बात कहते हैं। पिछले माह उन्होंने कहा था कि समय आ गया है जब देश को अपना ध्यान पश्चिम से उत्तरी सीमा की ओर करना चाहिए। सेना के सूत्रों ने बताया कि चीन के सैनिक उत्तरी डोकलाम में हैं। वह इलाके में अपना आधारभूत ढांचा मजबूत कर रहा है।
चीन सीमा पर भारत भी पुख्ता कर रहा सैन्य मौजूदगी
भारतीय सेना भी चीन-भारत सीमा पर कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों में अपने सैनिकों की मौजूदगी को मजबूत कर रही है। सीमा पर सैन्य ढांचा भी बढ़ाया जा रहा है। जनरल रावत पिछले साल अप्रैल में भूटान गए थे। इसके बाद विदेश सचिव एस जयशंकर ने गत अक्तूबर में भूटान का दौरा किया था। पिछले साल नवंबर में भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने भारत का दौरा किया था।
73 दिन चला था दोकलम गतिरोध
पिछले साल दोकलम में भारत और चीन के सैनिक 73 दिन तक आमने सामने थे। यह गतिरोध 16 जून को तब शुरू हुआ, जब भारतीय सेना ने चीनी सेना द्वारा विवादित दोकलम ट्राई-जंक्शन पर किए जा रहे सड़क निर्माण कार्य को रोक दिया। भूटान और चीन के बीच दोकलम को लेकर विवाद है। भारत और चीनी सेना की तनातनी 28 अगस्त को खत्म हुई।