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कोरोना का कहर: जान जोखिम में डाल कर काम कर रहे हैं केंद्र सरकार के लाखों कर्मी, मांगे 20 लाख रुपये और एक नौकरी

Fri, 23 Apr 2021 05:56 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 23 Apr 2021 05:56 PM IST
सार

कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्पलाई एंड वर्कर्स के महासचिव आरएन पाराशर के अनुसार आरएन पाराशर ने कहा, सरकारी कर्मी ड्यूटी पर कोरोना से मारा जाता है तो उसके परिवार को बीस लाख रुपये दिए जाएं। साथ ही, उसके परिवार में से किसी एक सदस्य को नौकरी मिले।

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Government Employees union demands Rs 20 lakh should give to his family if he succumbed from Corona
दफ्तर में काम करता एक सरकारी कर्मचारी - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

कोरोना अपना कहर बरपा रहा है, अस्पतालों की स्थिति अच्छी नहीं है। ऐसे में कोविड संक्रमण हो गया तो अस्पताल में जगह भी नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार के मंत्रालयों और निदेशालय स्तर के कुछ कार्यालयों को छोड़ दें तो बाकी विभागों में कर्मचारियों के लिए रोस्टर सिस्टम लागू नहीं किया गया है। सभी कर्मियों को दफ्तर में आना पड़ता है।

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'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्पलाई एंड वर्कर्स' ने 22 अप्रैल को कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे अपने पत्र में उक्त बातों का जिक्र किया है। अधिकांश सरकारी कर्मियों को वर्क फ्रॉम होम की छूट नहीं है। अगर कोई सरकारी कर्मी ड्यूटी पर कोरोना संक्रमित हो जाता है तो अस्पताल में भर्ती होने के लिए उसे प्राथमिकता नहीं मिलती। यदि कोई कर्मी अस्पताल में इलाज कराना चाहता है या घर पर आइसोलेशन में है तो उसकी अनुपस्थिति लगा दी जाती है।
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'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्पलाई एंड वर्कर्स' के महासचिव आरएन पाराशर के अनुसार, कोरोना की दूसरी लहर बहुत ज्यादा खतरनाक है। तीन लाख से ज्यादा पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। कोरोना का नया रूप युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। देश के अस्पतालों में बेड, आईसीयू बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर आदि की कमी है।
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ऐसे में केंद्र सरकार के ज्यादातर कार्यालयों में, केवल मंत्रालयों और निदेशालयों को छोड़कर बाकी जगहों पर कर्मियों को पूरी संख्या में बुलाया जा रहा है। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करने के बावजूद अनेक कर्मी कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। मौजूदा समय में देश के सभी हिस्सों में स्थित अस्पतालों की बुरी हालत है। कोरोना मरीजों की वजह से बेड खाली नहीं हैं।

कैबिनेट सचिव से आग्रह किया गया है कि वे सभी विभागों के सचिवों और एचओडी को कर्मियों की सुरक्षा बाबत आवश्यक निर्देश जारी करें। कर्मियों के लिए 50 फीसदी और 30 फीसदी का रोस्टर ड्यूटी सिस्टम लागू किया जाए। यदि कोई कर्मी कोरोना से संक्रमित हो जाता है, तो उसे अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्राथमिकता मिले।

कोविड के इलाज में हुए खर्च की पूरी अदायगी सरकार करे। निजी अस्पतालों में सीजीएचएस रेट पर इलाज शुरू कराया जाए। जो कर्मी अस्पताल में या होम आइसोलेशन में हैं, उन्हें ड्यूटी पर मानें। कर्मियों की स्पेशल लीव मंजूर की जानी चाहिए। यदि कोई कर्मचारी लॉकडाउन या कर्फ्यू वाले क्षेत्र में रहता है तो उसे ड्यूटी पर माना जाए।

महासचिव आरएन पाराशर ने कहा, सरकारी कर्मी ड्यूटी पर कोरोना से मारा जाता है तो उसके परिवार को बीस लाख रुपये दिए जाएं। साथ ही, उसके परिवार में से किसी एक सदस्य को नौकरी मिले। केंद्रीय कार्यालयों में कोरोना से बचाव के साधन जैसे सैनिटाइजिंग मशीन, सैनिटाइजर, मास्क, दस्ताने और पीपीई किट मुहैया कराई जाए।


सरकारी कर्मियों ने कोरोना की पहली लहर का डट कर सामना किया था। अब दूसरी लहर में भी वे सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। ऐसे में सरकार का फर्ज बनता है कि वह अपने कर्मियों की सुरक्षा का ध्यान रखे।

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