सैटेलाइटों और स्पेक्ट्रम सौदे में सरकार की हार, देना पड़ सकता है भारी जुर्माना
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मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने इस मामले में एक फैसले में कहा है कि भारत सरकार ने दो सैटेलाइटों और स्पेक्ट्रम संबंधी सौदे को रद्द कर अनुचित व्यवहार किया। इस कारण सरकार को देवास को करोड़ों रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है।
इससे पहले सितंबर 2015 में इस मामले में इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के मध्यस्थता निकाय ने एंट्रिक्स से देवास को 4432 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई करने को कहा था। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए पांच साल पहले 2011 में सौदे को रद्द कर दिया था।
देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि ट्रिब्यूनल ने उसे एस बैंड स्पेक्ट्रम के व्यावसायिक इस्तेमाल से भारत सरकार के रोकने और अनुबंध तोड़ने को अनुचित करार दिया है।
सोमवार को आए इस फैसले में ट्रिब्यूनल ने यह भी पाया कि भारत ने देवास के विदेशी निवेशकों के साथ एक सामान और उचित व्यवहार करने की अपनी प्रतिबद्धता को भी तोड़ा। उधर, इसरो ने कहा है कि उसे अभी तक फैसले की विस्तृत प्रति प्राप्त नहीं हुई है।
इस सौदे के कारण इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर और पांच वरिष्ठ वैज्ञानिकों को नौकरी गंवानी पड़ी थी। देवास ने कहा है कि एंट्रिक्स के साथ उसके सौदे को रद्द करने के मामले में यह दूसरे अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल का फैसला है। उसने कहा कि भारत की ओर से नियुक्त ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह फैसला दिया है।
सुरक्षा हित में सौदे को रद्द किया गया था : सरकार
(एजेंसी/नई दिल्ली) सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि एंट्रिक्स-देवास सौदे को जरूरी सुरक्षा हित को ध्यान में रखते हुए रद्द किया गया था। इस फैसले के पीछे उचित कारण थे और सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने काफी विमर्श के बाद ऐसा किया था।
अंतरिक्ष विभाग ने एक बयान में कहा है कि निर्धारित मुआवजा दायित्व निवेश मूल्य के 40 फीसदी के बराबर होगा और अभी तक यह राशि कितनी होगी इसकी गणना नहीं की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि सरकार आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए इस पर भी विचार करेगी।
बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने कहा है कि इस मामले में भारत सरकार की अनिवार्य सुरक्षा हित का प्रावधान एक सीमा तक लागू होता है। मुआवजा का तय दायित्व निवेश मूल्य का 40 फीसदी होगा।