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देश के 40 करोड़ श्रमिकों के पास सीधे पहुंचेगी सरकारी मदद, पीएमओ बना रहा है ये खास नीति

Thu, 28 May 2020 05:52 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 28 May 2020 05:52 PM IST
सार

लॉकडाउन 1.0 के बाद जब विभिन्न राज्य सरकारों ने श्रमिकों के खाते में राशि डालने की घोषणा की तो हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए थे। कई राज्य तो ऐसे रहे, जहां लाखों की संख्या में भी पंजीकृत मजदूर नहीं मिले...

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Government assistance will soon reach 40 crore workers of the country directly, Prime Minister's office is making this special policy
श्रमिक - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

कोरोना वायरस के संक्रमण ने केंद्र और राज्य सरकारों को कई तरह की सीख दी हैं। लॉकडाउन के दौरान विभिन्न वर्गों के लिए राहत पैकेज की घोषणाएं हुई, मगर श्रमिकों की समस्या हल होने में लंबा समय गया है।
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इस वर्ग को बहुत ज्यादा मदद नहीं दी जा सकी। वजह, इस वर्ग का असंगठित होना रहा है। केंद्र और राज्य सरकार, किसी के पास यह जानकारी नहीं थी कि कहां पर कितने मजदूर काम करते हैं। पता चला कि 48 करोड़ मजदूर हैं, लेकिन उनमें से 40 करोड़ ऐसे हैं जो जिनका कहीं कोई पंजीकरण ही नहीं है।

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मतलब, सरकार उन्हें राहत राशि या दूसरी तरह की कोई आर्थिक मदद देना चाहे तो कैसे दे। अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन मजदूरों की सुध ली है। देश के किसी भी सेक्टर में काम करने वाले असंगठित श्रमिकों का डाटा तैयार किया जाएगा।
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यह डाटा केंद्रीय स्तर पर एकत्रित होगा, लेकिन इसे संबंधित राज्यों के साथ साझा करेंगे। इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में किसी भी आपदा की स्थिति में केंद्र एवं राज्य सरकार सीधे इन श्रमिकों तक राहत राशि पहुंचा सकेंगी।
 

केंद्र सरकार में श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि कैबिनेट के समक्ष भी यह मुद्दा उठा है। हालांकि यह पहल इतनी आसान नही है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय इस दिशा में कदम आगे रख चुका है।

चाहे वो कोई भी क्षेत्र हो, सरकार हर श्रमिक का डाटा तैयार करेगी। करीब 8 करोड़ ऐसे श्रमिकों की जानकारी केंद्र सरकार के पास है, जो संगठित क्षेत्र के तहत काम करते हैं। बाकी 40 करोड़ श्रमिकों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।

लॉकडाउन 1.0 के बाद जब विभिन्न राज्य सरकारों ने श्रमिकों के खाते में राशि डालने की घोषणा की तो हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए थे। कई राज्य तो ऐसे रहे, जहां लाखों की संख्या में भी पंजीकृत मजदूर नहीं मिले।

सरकार की शर्त थी कि केवल पंजीकृत श्रमिक के खाते में ही राहत राशि जाएगी। भवन निर्माण एवं कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा मजदूर काम करते हैं, लेकिन यहां गिनती के श्रमिक भी पंजीकृत नहीं हैं।

श्रमिकों के कल्याण के लिए कैबिनेट ने कई तरह के सुझाव दिए थे, जिनमें प्रवासी श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय डाटाबेस बनाने की जरूरत पर खास बल दिया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बाबत काम शुरू कर दिया है।


 

डाटा बेस तैयार होने के बाद हर एक श्रमिक को विशिष्ट पहचान नंबर प्रदान किया जाएगा। जब इन श्रमिकों का डाटा तैयार हो जाएगा तो उसके बाद कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा योजना का लाभ इन्हें मिल सकेगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय का मकसद है कि देश में काम कर रहा हर प्रवासी मजदूर साामजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाए।

 

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