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मंगल ग्रह पर जिंदगी तलाशेगी यह यूनिवर्सिटी, इसरो ने दी बड़ी जिम्मेदारी

Fri, 09 Sep 2016 04:10 AM IST
डॉ. राकेश राय/ अमर उजाला, गोरखपुर
डॉ. राकेश राय/ अमर उजाला, गोरखपुर Updated Fri, 09 Sep 2016 04:10 AM IST
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Gorakhpur University will explore life on the planet, ISRO gave responsibility
- फोटो : amarujala

वातावरण में ब्लैक कार्बन और एयरोसोल के अध्ययन पर चल रहे कार्य से खुश होकर इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग को एक और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इस बार इसरो ने विभाग को मंगल ग्रह पर जिंदगी की संभावना तलाशने को कहा है।

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इसरो ने तीन साल के अध्ययन के लिए बाकायदा 22 लाख रुपये भी जारी कर दिए हैं। इसरो के अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के बाद मंगल पर मिथेन का अध्ययन करने वाला देश का दूसरा सेंटर होगा गोरखपुर यूनिवर्सिटी का भौतिकी विभाग। 
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विभाग के शोधकर्ता डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद द्वारा पृथ्वी पर वातावरण में मिथेन की मौजूदगी पर बेहतरीन कार्य करने से प्रभावित उनके शोध निर्देशक प्रो. शांतनु रस्तोगी ने मंगल पर मिथेन की मौजूदगी के अध्ययन का फैसला लिया। प्रो. शांतनु की अगुवाई में विभाग की ओर से पिछले साल ‘स्टडी ऑफ पासिबल रिमोट सेंसिंग ऑफ मिथेन ऑन मार्स यूजिंग डाटा प्रोडक्ट ऑफ मिथेन सेंसर ऑफ मार्स’ प्रोजेक्ट पर कार्य के लिए इसरो में आवेदन किया गया। विषय से प्रभावित होकर इसरो की अहमदाबाद विंग (स्पेस एप्लिकेशन सेंटर) ने पिछले जुलाई महीने में प्रो. शांतनु को प्रोजेक्ट की मौखिक प्रस्तुति के लिए बुलाया।

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मिथेन की मौजूदगी करेगी जिंदगी की तस्दीक

Gorakhpur University will explore life on the planet, ISRO gave responsibility

प्रस्तुति का आधार इतना मजबूत था कि इसरो ने यूनिवर्सिटी को मंगल पर मिथेन के अध्ययन की जिम्मेदारी सौंप दी और सप्ताह भर पहले इसके लिए धन भी आवंटित कर दिया। इसरो की ओर से अध्ययन के लिए विभाग को तीन साल का समय दिया गया है।

इस दौरान अध्ययनकर्ता पांच नवंबर 2013 को मंगल पर भारत की ओर से भेजे गए मंगलयान में लगे पांच यंत्रों में एक मिथेन सेंसर ऑफ मार्स (एमएसएम) से मिले डाटा का अध्ययन और विश्लेषण करेंगे। अध्ययन की पहले सालाना रिपोर्ट भेजनी होगी और तीन साल बाद अंतिम विश्लेषण से इसरो को अवगत करना होगा। विभाग को अध्ययन से मिले परिणाम का मॉडल प्रस्तुत कर मंगल मिशन में इसरो का सहयोग भी करना होगा। 

मिथेन एक बायो प्रोडक्ट गैस है। यदि यह किसी भी स्थान पर मौजूद है तो इसका मतलब है कि वहां जीवों की मौजूदगी है। इसीलिए मंगलयान में लगे पांच यंत्रों में एमएसएम लगाया गया है जो मंगल पर मिथेन की मौजूदगी पर कार्य कर रहा है।

"यह यंत्र मंगल पर जमीन के ऊपर और नीचे हर स्थान पर मिथेन तलाश रहा है। इस यंत्र से मिले डाटा पर अध्ययन के लिए ही इसरो ने हम पर भरोसा जताया है। अध्ययन के लिए हमें इसरो की ओर से एक पासवर्ड दिया जाएगा, जिससे एमएसएम का डाटा इंटरनेट के माध्यम से हम सीधे पा सकेंगे, जिस पर अध्ययन और विश्लेषण करना होगा। इसके लिए कुछ रिसर्च एसोसिएट को भी जोड़ा जाएगा, जो अध्ययन में सहयोग करेंगे। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है।"
- प्रो. शांतनु रस्तोगी, पि्रंसिपल इन्वेस्टीगेटर, अध्ययन प्रोजेक्ट (मिथेन सेंसर ऑफ मार्स)

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