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मलयाली कवियित्री कमला दास को गूगल ने डूडल के जरिए किया याद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Feb 2018 08:10 AM IST
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कमला दास
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आज गूगल अपने डूडल के जरिए कवियित्री कमला दास के काम को याद कर रहा है। मलयाली कवयित्री एक दिलचस्प महिला थीं। वह 60 के दशक में कलकत्ता की उन आवाजों में से एक थीं जो कठिन समय में भी मुखर थी। उनका जन्म केरला के थ्रिसूर जिले के पुन्नायूरकुलम में 31 मार्च 1934 को हुआ था। उनके माता पिता मलयाली कवि वीएम नायर और नालापट बालामनी अम्मा थे। उनके पिता मातृभूमि के पूर्व प्रबंध संपादक भी थे।
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कमला दास का बचपन कलकत्ता में बीता जहां उनके पिता वालफोर्ड ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम किया करते थे। अपनी मां की तरह उन्होंने लिखना शुरू किया। उनके अंकल नालापट नारायण मेनन भी एक प्रतिष्ठित लेखक थे जिसका गहरा असर कवियित्री के जीवन पर पड़ा। छोटी उम्र से ही उन्हें कविता से प्यार हो गया था। 15 साल की उम्र में कमला दास की शादी माधव दास से हो गई थी जो पेशे से बैंकर थे। उन्होंने अपनी पत्नी को लिखने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने अंग्रेजी और मलयालम में अपने काम को प्रकाशित करना शुरू कर दिया।
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आज ही के दिन पर कमला दास ने अपनी ऑटोबायोग्राफी 'माई स्टोरी' रिलीज की थी। उनकी जिंदगी और काम काफी बोल्ड थे। उन्होंने कई उपनामों के जरिए लेखन कार्य किया। जब उन्होंने अपने काम को प्रकाशित करवाना शुरू किया तो माधवीकुट्टी नाम का इस्तेमाल किया और अमी उनका पेट नाम था। इस्लाम कबूल करने के बाद उन्होंने अपना नाम सुरैय्या रख लिया। साल 2009 में उनका निधन हो गया था। अपने काम के लिए साल 1984 में उन्हें साहित्य एकेडमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
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