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गूगल ने डूडल बनाकर पद्मश्री डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी की 100वीं जयंती पर किया याद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 01 Oct 2018 04:14 AM IST
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Dr. Govindappa Venkataswamy
आज पद्मश्री डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी की 100वीं जयंती है। इस खास मौके पर सोमवार को गूगल ने 'डूडल' बनाकर उन्हें याद किया है। डॉ गोविंदप्पा ने अपना सारा जीवन लोगों की जिंदगी से अंधापन दूर करने में समर्पित कर दिया। वह एक प्रसिद्ध नेत्र रोग चिकित्सक थे।
वेंकटस्वामी को उनके करीबी दोस्त और प्रशंसक 'डॉ वी' के नाम से पुकारते थे। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1918 को तमिलनाडु के किसान परिवार में हुआ और देहांत 7 जुलाई 2006 को मदुरई में हुआ था। डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी ने अपने नेत्र चिकित्सकीय जीवन में लाखों लोगों को आंखों की रोशनी दी है।
वेंकटस्वामी ने चेन्नई में स्टेनली मेडिकल कॉलेज से अपनी मेडिकल डिग्री प्राप्त की और भारतीय सेना की मेडिकल कोर में शामिल हो गए। इसी दौरान उन्हें रूमेटोइड गठिया (rheumatoid arthritis) बीमारी ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। इसके बाद उन्होंने शल्य चिकित्सा करने में असमर्थ होने पर नेत्र विज्ञान का अध्ययन करना शुरू कर दिया। वह अपने गठिया वाले हाथों के लिए विशेष रूप से निर्मित यंत्रों का उपयोग करते थे।
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इन उपकरणों की सहायता से डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी एक दिन में 100 मोतियाबिंद की सर्जरी करने में सक्षम हुए। धीरे-धीरे वेंकटस्वामी देश के सबसे सफल मोतियाबिंद सर्जन के रूप में प्रसिद्ध हो गए। उन्होंने करीब 25 साल तक मोतियाबिंद सर्जरी करने का प्रशंसनीय काम किया।
डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी 'अरविंद आंखों के अस्पताल' (Aravind Eye Hospitals) के संस्थापक हैं और इसके पूर्व अध्यक्ष थे। इसे दुनिया के सबसे बड़े आंखों की देखभाल के अस्पताल के तौर पर जाना जाता है। वेंकटस्वामी को उनके सराहनीय कार्यों के लिए वर्ष 1973 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान दिया गया था।
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वेंकटस्वामी को उनके करीबी दोस्त और प्रशंसक 'डॉ वी' के नाम से पुकारते थे। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1918 को तमिलनाडु के किसान परिवार में हुआ और देहांत 7 जुलाई 2006 को मदुरई में हुआ था। डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी ने अपने नेत्र चिकित्सकीय जीवन में लाखों लोगों को आंखों की रोशनी दी है।
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वेंकटस्वामी ने चेन्नई में स्टेनली मेडिकल कॉलेज से अपनी मेडिकल डिग्री प्राप्त की और भारतीय सेना की मेडिकल कोर में शामिल हो गए। इसी दौरान उन्हें रूमेटोइड गठिया (rheumatoid arthritis) बीमारी ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। इसके बाद उन्होंने शल्य चिकित्सा करने में असमर्थ होने पर नेत्र विज्ञान का अध्ययन करना शुरू कर दिया। वह अपने गठिया वाले हाथों के लिए विशेष रूप से निर्मित यंत्रों का उपयोग करते थे।
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इन उपकरणों की सहायता से डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी एक दिन में 100 मोतियाबिंद की सर्जरी करने में सक्षम हुए। धीरे-धीरे वेंकटस्वामी देश के सबसे सफल मोतियाबिंद सर्जन के रूप में प्रसिद्ध हो गए। उन्होंने करीब 25 साल तक मोतियाबिंद सर्जरी करने का प्रशंसनीय काम किया।
डॉ गोविंदप्पा वेंकटस्वामी 'अरविंद आंखों के अस्पताल' (Aravind Eye Hospitals) के संस्थापक हैं और इसके पूर्व अध्यक्ष थे। इसे दुनिया के सबसे बड़े आंखों की देखभाल के अस्पताल के तौर पर जाना जाता है। वेंकटस्वामी को उनके सराहनीय कार्यों के लिए वर्ष 1973 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान दिया गया था।