फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Google dedicated Doodle to hematologist Lucy Wills on her 131st birthday

गूगल ने प्रसिद्ध रक्त विशेषज्ञ लूसी विल्स को किया याद, भारत से था ये खास रिश्ता

Fri, 10 May 2019 08:53 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 10 May 2019 08:53 AM IST
विज्ञापन
Google dedicated Doodle to hematologist Lucy Wills on her 131st birthday
Lucy Wills - फोटो : Google
गूगल आज प्रसिद्ध रुधिर विज्ञानी (हीमेटॉलजिस्ट) लूसी विल्स के 131वें जन्मदिन को मना रहा है। इनका भारत से खास रिश्ता रहा है। गूगल ने रंगबिरंगे डूडल के जरिए लूसी विल्स को लैब में काम करते दिखाया है। उनके पास प्लेट में ब्रेड का टुकड़ा और चाय की प्याली भी दिख रही है। लूसी ने भारत में महिलाओं के शरीर में होने वाले खून की कमी (अनीमिया) के रोकधाम को लेकर कई रिसर्च काम किया था। 
विज्ञापन


लूसी विल्स का जन्म 10 मई 1888 को इंग्लैंड में हुआ था। लूसी ने चेल्टेनहम कॉलेज ऑफ यंग लेडिज में दाखिला लिया। यह कॉलेज उन दिनों विज्ञान और गणित विषय में महिला छात्रों को प्रशिक्षित करने वाले पहले ब्रिटिश बोर्डिंग स्कूलों में से एक था।
विज्ञापन


1911 में उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के न्यूहैम कॉलेज में वनस्पति विज्ञान और भूविज्ञान में प्रथम श्रेणी प्राप्त किया। 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के शुरू होने पर लूसी ने दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में नर्स के रूप में अपनी सेवाएं दीं। यहीं से उनका मेडिसिन की तरफ रुझान बढ़ गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


साल 1928 में लूसी मुंबई के टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करने वाली गर्भवती महिलाओं को हो रहे गंभीर अनीमिया की जांच के लिए भारत आईं। जांच के बाद उन्होंने इस बीमारी के पीछे खराब आहार को सबसे बड़ी वजह माना। जिसके कारण मिल में काम करने वाली इन महिलाओं को मैक्रोसाइटिक अनीमिया बीमारी हो रही थी। इस बीमारी में महिलाओं के गर्भधारण करने पर लाल रक्त कणिकाओं का आकार सामान्य से काफी ज्यादा हो जाता है।


लूसी ने अनीमिया की रोकधाम के लिए बंदरों और चूहों पर कई प्रयोग किए। उनके खाने में यीस्ट मिलाकर देने से ये जीव भी खून की कमी को दूर कर पा रहे थे। इस प्रयोग को विल्स फैक्टर के नाम से जाना जाता है। खाने में मिलाए गए यीस्ट को फॉलिक एसिड के नाम से जाना जाता है जिसका प्रयोग अब भी किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed