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देश भर के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए राहत की खबर

Thu, 16 Jun 2016 05:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 16 Jun 2016 05:32 AM IST
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good news for university teachers

देश भर के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए राहत की खबर है कि अब ट्यूटोरियल और प्रैक्टिकल वर्क पढ़ाई के घंटे (डायरेक्ट टीचिंग ऑवर्स)में शामिल होगा। यूजीसी ने एकेडमिक परफॉरमेंस इंडेक्स (एपीआई) में चौथे संशोधन को पास कर दिया है।

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एपीआई लागू तो रहेगा पर एडहॉक शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी। इसके साथ ही दूसरे संशोधन के कैप को हटा दिया है। अब एक क्षेत्र में किए गए काम का भी शिक्षक को लाभ मिलेगा। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर को 16 घंटे और एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर को 14-14  घंटे ही पढ़ाना होगा।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की  516वीं बैठक में यूजीसी के वर्ष  2010 में एपीआई के चौथे संशोधन को पास कर दिया गया है। यूजीसी के एपीआई पर मई में तीसरे संशोधन के बाद शिक्षक यूनियन ने विरोध शुरू कर दिया था। इसी के चलते मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूजीसी को रिव्यू करने की सिफारिश की थी।
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मंत्रालय में बुधवार देर शाम प्रेस कांफ्रेंस में चौथे संशोधन में पास बिंदुओं की जानकारी दी गयी। एपीआई लागू तो रहेगा, लेकिन उसका असर किसी शिक्षक की नौकरी पर नहीं पड़ेगा। मतलब एडहॉक शिक्षकों की नौकरी बनी रहेंगी।

अब टयूटोरियल और प्रैक्टिकल व फील्ड वर्ग के घंटे भी वर्कलोड यानी पढ़ाई के घंटों में शामिल होंगे। शिक्षकों के पढ़ाने के घंटे वर्ष  2010 की तर्ज पर यानी पुराने नियमों के तहत ही लागू होंगे। वहीं, एपीआई के दूसरे संशोधन में  13 जून 2013 को कैप लगाया गया था, जिसे हटा दिया गया है।

यानी अब रिसर्च, पीएचडी स्कॉलर्स की सुपरविजन, पुस्तक लेखन या प्रोजेक्ट वर्क आदि में से किसी एक में भी काम किया होगा और उसके प्वाइंट जुड़ेंगे तो उसका लाभ एपीआई में मिलेगा। इससे पहले सभी क्षेत्रों में काम करने पर प्वाइंट मिलते थे।


वहीं, रिसर्च पेपर किस जनरल में छापने हैं, इसके चयन का अधिकार  अब विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल पर छोड़ दिया गया है। विवि जनरल के नाम का चयन करने के बाद यूजीसी की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजेगा और यह कमेटी तय नामों की लिस्ट में से किसी एक का चयन करके विश्वविद्यालय का वापस करेगा। वहीं, कॉलेज में प्रिंसिपल की पुर्ननियुक्ति की संभावना भी बढ़ गयी है। क्योंकि चौथे संशोधन में इसकी भी सिफारिश की गई है। 

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