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मी टू पर जजों की कमेटी के स्थान पर जीओएम बनाने की तैयारी कर रही सरकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 18 Oct 2018 04:13 AM IST
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मी टू के तहत सामने आ रहे यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए जजों और कानूनविदों की कमेटी नहीं बनाई जाएगी। सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसकी जगह पर मंत्रियों का समूह (जीओएम) बनाने की तैयारी है और इसकी अधिसूचना जल्द ही जारी हो सकती है। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के स्तर पर एक आंतरिक कमेटी भी गठित की जाएगी।
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सूत्रों का कहना है कि जीओएम का गठन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में किया जाएगा। पहले ऐसे संकेत थे कि इसकी अध्यक्षता कोई वरिष्ठ महिला मंत्री करेगी। यह कदम महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी के उस एलान के बाद उठाया जा रहा है जिसमें उन्होंने मी टू के तहत अपनी व्यथा सामने लाने वाली महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए जस्टिस वर्मा कमेटी की तर्ज पर एक कमेटी के गठन की बात कही थी। इसमें चार वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी और कानूनविद को शामिल किया जाना था। हालांकि केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।
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सूत्रों के मुताबिक, जीओएम और मंत्रालय के स्तर पर बनने वाली प्रशासनिक कमेटी का कार्यकाल तीन महीने का हो सकता है। जीओएम महिला हिंसा को लेकर संवैधानिक और कानूनी अधिकारों का फ्रेम वर्क तैयार करेगी। वहीं, कमेटी व्यक्तिगत सुनवाई की जगह महिलाओं के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों और उसमें कमी की स्थिति का आकलन करेगा। इसके अलावा कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने को लेकर क्या काम हो रहा है तथा क्या और होना चाहिए, इसे लेकर कानून के नजरिये और सामाजिक न्याय के लिहाज से स्थितियों का आकलन करेगी।
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