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Gold-Silver Price: क्यों इतनी तेजी से बढ़ रहा सोना-चांदी का दाम, क्या आगे भी जारी रहेगी ऐसी ही रफ्तार?

Thu, 29 Jan 2026 08:12 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 29 Jan 2026 08:12 PM IST
सार

ट्रंप के टैरिफ युद्ध के चलते दुनियाभर में सोना और चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत में पहली बार चांदी की वायदा कीमतें चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा छू गई हैं। बाजार विश्लेषकों की मानें तो वैश्विक स्तर पर जिस तरह का माहौल है, उस लिहाज से चांदी की कीमत कम होने की संभावना नहीं दिखती। 

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Gold-Silver Price: Why are gold and silver prices rising so rapidly
सोने-चांदी का भाव - फोटो : Adobestock

विस्तार

सोना-चांदी के दाम हर दिन तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली में जो 24 कैरट सोना 20 जनवरी 2026 को 14,991 रुपये प्रति ग्राम था। महज 9 दिन में रिकार्ड 17,900 प्रतिग्राम है। वहीं चांदी 29 जनवरी को दिल्ली में 4.10 लाख रुपये प्रति किग्रा रही। 20 जनवरी को 3.20 लाख रुपये प्रति क्रिगा थी। बड़ा सवाल है कि आखिर कब तक सोना-चांदी के दाम इस तरह बढ़ेंगे। इसके कारण क्या हैं?

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राष्ट्रपति ट्रंप की अनिश्चितता ने बढ़ाए सोना-चांदी के दाम
राष्ट्रपति ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने टैक्स वॉर छेड़ दिया है। रूस-यूक्रेन, इस्राइल के साथ फिलिस्तीन के हमास, लेबनान के हिजबुल्ला, यमन के हूती और ईरान का टकराव। मध्य एशिया लाल सागर का ब्लॉक होना और लगातार राष्ट्रपति ट्रंप का अनिश्चित रूख सोना-चांदी को लगातार मंहगा बना रहा है। सारथी आचार्य कहते हैं कि चांदी का दाम बढ़ने का एक बड़ा कारण इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में इसका बढ़ता औद्योगिक उपयोग भी है, लेकिन इसके अलावा सोना-चांदी दशकों से सुरक्षित निवेश रहे हैं। इसलिए डॉलर की अनिश्चितता को देखते हुए देशों ने भी सोना-चांदी का भंडारण शुरू कर दिया है।
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बताते चलें रूस का यूक्रेन के साथ टकराव शुरू होने के बाद उसके सोने को जब्त कर लिया गया था। इसके बाद लंदन समेत तमाम देशों में सोना रखने वाले देशों के केन्द्रीय बैंक ने अपना सोना वहां से निकालकर खुद भंडारण शुरू कर दिया। इसके बाद से ही सोने के दाम लगातार बढ़ना शुरू हो गए। सारथी आचार्य कहते हैं कि अभी भी यह तय नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप कल क्या करेंगे? किसके ऊपर कितना टैक्स थोपेंगे? संयुक्त राष्ट्र को खत्म करके वह ‘बोर्ड ऑफ पीस’बनाने की राह पर कैसे चलेंगे? दूसरे वह अपने यहां भी बढ़ रहे तनाव, दबाव को साधने के लिए दुनिया के देशों के साथ किस तरह का क्या व्यवहार करेंगे। 
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प्रो. एस.के. सिंह का कहना है कि जब भी अनिश्चितता बढ़ती है, लोग सुरक्षित विकल्प की तरफ भागते हैं। इस समय करेंसी को लेकर अनिश्चितता का दौर चल रहा है। भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसलिए सोना-चांदी दोनों सुरक्षित विकल्प के रूप में अजमाए जा रहे हैं। इसके लिए अमेरिका की जिम्मेदारी सबसे अधिक है।

ये भी पढ़ें:  चांदी की कीमतें कैसे बढ़ीं?: 21 साल पहले ₹10 हजार किलो थी, 12 महीने में ऐसे तय किया 86 हजार से चार लाख का सफर

सबसे बड़ा सवाल: जब दुनिया अमेरिका को 37 ट्रिलियन डॉलर लौटाएगी तो कैसे डील करेगा?
अर्थशास्त्री सारथी आचार्य कहते हैं कि दुनिया में इस समय सवाल के सिवा कुछ नहीं है। सवाल का जवाब या समाधान अभी गायब है। अमेरिका के पास भी इसका जवाब नहीं है कि उससे दुनिया जब 37 ट्रिलियन डॉलर का हिसाब मांगेगी तो वह कैसे लौटाएगा? क्योंकि उसके पास 37 ट्रिलियन डॉलर का डेफसिट है और यह दुनिया के देशों के पास है। कारोबारी डालर पर कुंडली मारकर बैठ रहे हैं। दुनिया में डॉलर की मांग घट रही है। कमजोर हो रहा है। जापान का येन मजबूत हो रहा है। चीन अपनी मुद्रा को आगे बढ़ा रहा है। रूस चाहता है कि ब्रिक्स देश अपनी मुद्रा में कारोबार करें। ऐसे में एक न एक दिन तो लोग अमेरिका से उसकी मुद्रा के बदले हिसाब करेंगे। इस परिस्थिति ने भी अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में बड़े भू-चाल को जन्म दिया है।


डॉलर में कारोबार 70 प्रतिशत से गिरकर 50 प्रतिशत पर आया
दुनिया के कारोबार में डॉलर का दबदबा था। अब अमेरिकी डॉलर में कारोबार 70 प्रतिशत से गिरकर 50 प्रतिशत पर आ गया है। यह बड़ी गिरावट अमेरिकी हुक्मरानों के लिए चिंता की बात है। वैश्विक अर्थव्यवस्था गहरे दरार के दौर से गुजर रही है। बॉन्ड्स की स्थिति चिंतनीय है। भरोसा कमजोर हो रहा है। जापान का येन मजबूत हो रहा है। चीन की मुद्रा युआन जोश दिखाना चाह रही है। यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के तालमेल ने अस्थिरता को बढ़ाया है। इन सभी के असर से तमाम देश सोने के भंडारण को मजबूत कर रहे हैं।

अभी तो इसी रफ्तार से भागेगा सोना-चांदी
सोना-चांदी के दाम अभी इसी रफ्तार से ही भाग सकते हैं। अगले साल तक इस तरह की तेजी बने रहने के आसार हैं। इसका सबसे बड़ा कारण वैश्विक अनिश्चितता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर अमेरिका के हमले के बाद इसमें बड़ी तेजी आ सकती है। इसके साथ-साथ क्रूड ऑयल के भी दाम बढ़ सकते हैं। क्योंकि ईरान के रास्ते आपूर्ति होने वाले रूसी तेल पर बड़ा ब्रेक लग जाएगा। इसका भी असर सोना-चांदी के दाम पर पड़ सकता है। इसकी संभावना को देखकर तमाम देशों ने सोना-चांदी को संकट के समय किए जाने वाले निवेश का भरोसा रखकर इसका भंडारण शुरू कर दिया है। वहीं, रूस अपना सोना बेच रहा है। रूस के नेशनल वेल्थ फंड(एनडब्ल्यूएफ) ने पिछले तीन वर्षों में अपने 71 प्रतिशत सोना बेच दिया है। रूस को ऐसा तेल और गैस से होने वाली कमाई में गिरावट के कारण करना पड़ा। ताकि वह यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के खर्च से ऊबर सके। अब उसके पास 160 टन के करीब सोना रह गया है। यह पहले 555 टन था।

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