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Good Governance Dialogue: गोवा में पाञ्चजन्य ने किया सागर मंथन का आयोजन, अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन पर चर्चा

Wed, 25 Dec 2024 10:13 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 25 Dec 2024 10:13 PM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष पर पाञ्चजन्य ने 'सागर मंथन सुशासन संवाद 2024' का आयोजन किया। गोवा में हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, पर्यावरणविद् गोपाल आर्य और अन्य प्रमुख वक्ताओं ने सुशासन, विकास और पर्यावरण के मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।  

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Goa Panchajanya organized Sagar Manthan Dialogue, discussion good governance of Atal Bihari Vajpayee
पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर पाञ्चजन्य की ओर से 'सागर मंथन सुशासन संवाद 2024' का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मंगलवार 24 दिसंबर को  दक्षिणी गोवा स्थित नोवाटेल डोना सिल्विया में हुआ, जिसमें गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। 

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कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उसके बाद पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने वाजपेयी के योगदानों का जिक्र करते हुए सभा को संबोधित किया और मुख्यमंत्री से सीधी बात की शुरुआत की। इस दौरान मुख्यमंत्री सावंत ने गोवा की सांस्कृतिक पहचान को लेकर कहा कि पूरे भारत में ब्रिटिश का राज था, लेकिन गोवा में 450 साल तक पुर्तगालियों ने राज किया। गोवा में सबसे अधिक धर्मांतरण हुआ और यहीं पर सबसे अधिक मंदिर भी तोड़े गए। इसके बावजूद राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने का काम किसी ने किया है तो यहां के लोगों ने किया है। सूरज, समुद्र और रेगिस्तान (सन, सी और सैंड) से आगे निकलकर आध्यात्मिक पर्यटन और मंदिर पर्यटन को आगे बढ़ाया है।

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2037 तक सौ फीसदी विकसित राज्य होगा गोवा: प्रमोद सावंत
गोवा के विकास को लेकर सावंत ने कहा, बीते 10 साल के कार्यकाल में जो ढांचागत विकास हमने किया है, वह 50 साल में भी नहीं हुआ। सतत विकास के मामले में हम देश में चौथे नंबर पर हैं। प्रधानमंत्री के हर घर नल से जल, हर ग्राम सड़क, 100 फीसदी बिजली सहित 13 फ्लैगशिप कार्यक्रमों में 80 फीसदी से अधिक में हम 100 फीसदी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने विकसित गोवा को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 2047 तक विकसित भारत की बात कर रहे हैं, लेकिन 2047 से 10 साल पहले 2037 तक ही गोवा 100 फीसदी विकसित राज्यों में से एक होगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सुशासन और विकास के कई मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। 

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बेहतर जीवन की तलाश में दिल्ली छोड़ने को मजबूर लोग: गोपाल आर्य
वहीं, कार्यक्रम के 'प्रकृति भी प्रगति भी' नामक सत्र में पर्यावरणविद् एवं अखिल भारतीय पर्यावरण गतिविधि के प्रमुख गोपाल आर्य ने अपने विचार साझा किए, जहां उन्होंने कहा कि भारत वह देश है, जहां प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। पहाड़ों, नदियों और वृक्षों की पूजा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। लेकिन, आज जब हम प्रकृति और पर्यावरण की बात करते हैं, तो यह सोचना जरूरी है कि हम कहां गलत हो रहे हैं। आर्य ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से 500 के बीच है। दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो गया है। साथ ही उन्होंने दिल्ली के कचरे के पहाड़ों, दूषित पेयजल का जिक्र करते हुए कहा कि लोग बेहतर जीवन की तलाश में शहर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

Goa Panchajanya organized Sagar Manthan Dialogue, discussion good governance of Atal Bihari Vajpayee
राम माधव - फोटो : अमर उजाला

सभी पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध चाहता है भारत: राम माधव
ऐसे ही 'नया विश्व और भारत उदय' सत्र में राजनेता, लेखक, विचारक और थिंक टैंक 'इंडिया फाउंडेशन' के अध्यक्ष राम माधव ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत ने आज विश्व में अपनी विशेष पहचान बना ली है। पिछले 10 वर्षों के शासन में सरकार ने इसमें बहुत बड़ा योगदान दिया है। चीन के साथ भारत के संबंध को लेकर उन्होंने कहा कि चीन हमारा पड़ोसी देश है। हम अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। वैसे दुनिया में कभी भी भारत ने युद्ध नहीं चाहा। युद्ध भारत पर थोपा गया था, हमेशा संघर्ष थोपा गया था। अन्यथा भारत बहुत शांतिपूर्ण देश है। इसके अलावा उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति सहति कई अहम मुद्दों पर प्रकाश डाला। 

जनता की समस्याओं का समाधान निकालना ही सुशासन: नवनीत सहगल
इस दौरान प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल ने सुशासन और प्रशासन के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्या का हल निकालना ही सुशासन है। अटल बिहारी वाजपेयी लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए चिंतित रहते थे। जब भी बात आती है शासन और सुशासन की तो स्वाभाविक तौर पर सरकार की नीतियों की बात होती है। उन्होंने कहा कि जब मैं कलेक्टर या एसडीएम था तो हम लोग गांवों में जाया करते थे, जहां कई महिलाओं को समय पर पेंशन नहीं मिलती थी। लेकिन, अब सरकार ने प्रणाली (सिस्टम) को ही बदल दिया है। जनधन के 53 करोड़ खाते खुलने से सीधे लोगों के खाते में पैसे पहुंच जाते हैं। इसके अलावा कई मुद्दों पर भी सहगल ने अन्य  अपनी बात रखी। 

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रिवाबा जडेजा - फोटो : अमर उजाला

शक्ति के बिना नहीं की जा सकती सुशासन की कल्पना: रिवाबा जडेजा
'सुशासन की शक्ति' सत्र में गुजरात से विधायक रिवाबा जडेजा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सुशासन की कल्पना, शक्ति के बिना नहीं की जा सकती है। वेदों में भी शक्ति के बगैर हम आराध्य को नहीं मानते हैं, जैसे गौरी-शंकर, राधा-कृष्ण, लक्ष्मी नारायण। हम जिन देवताओं की उपासना करते हैं। वे स्वयं को शक्ति के साथ जोड़कर देखते हैं। हम भी उसे उसी तरह से देखते हुए विकास की बात करेंगे, महिला सशक्तिकरण की बात करेंगे। सुशासन के छह स्तंभ हैं- न्याय, समानता, प्राकृतिक संतुलन, समृद्धि, शांति और सौहार्द और सामाजिक कल्याण।

भारत का सबसे बड़ा कृषि उत्पाद गेहूं-चावल नहीं, बल्कि दूध: जयेन मेहता
इसी तरह 'सहकार असरकार' सत्र में अमूल के प्रबंधन निदेशक जयेन मेहता ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि अमूल की यात्रा 200 लीटर से दूध के साथ शुरू हुई। आज यह 310 लाख लीटर दूध डेली एकत्र करती है। सालाना 10 अरब डॉलर का कारोबार करने वाली संस्था के मालिक 36 लाख किसान हैं। उन्होंने कहा कि सहकार के मॉडल ने भारत को विश्व का नंबर वन दुग्ध उत्पादक देश बनाया है। आज हमारे देश में सबसे बड़ा कृषि उत्पाद गेंहू या चावल नहीं, बल्कि दूध है।

नाटक और कला का मकसद समाज को शिक्षित और जागरूक करना: चंद्रप्रकाश द्विवेदी
'सुशासन का धर्म'सत्र में भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के प्रतिष्ठित निर्माता-निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि भारतीय परंपरा में नाटक और कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक करना भी था। उन्होंने कहा कि प्रजापति ब्रह्मा ने नाट्यशास्त्र की रचना इसलिए की, ताकि समाज में मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान का प्रसार हो, लेकिन आज फिल्मों का धर्म केवल मनोरंजन तक सीमित हो गया है। उन्होंने इसे पुनः समाज को शिक्षित करने और सकारात्मक संदेश देने की ओर उन्मुख करने का आह्वान किया।

इस दौरान पाञ्चजन्य के प्रबंध निदेशक अरुण गोयल ने कार्यक्रम में आए अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव और वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनैठा ने किया।

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