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Study: जलवायु परिवर्तन से वैश्विक जीडीपी को होगा भारी नुकसान, 2060 तक हो सकता है 24.7 ट्रिलियन डॉलर का घाटा

Wed, 20 Mar 2024 07:19 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Wed, 20 Mar 2024 07:19 AM IST
सार

नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार वैश्विक सप्लाई आपूर्ति शृंखलाओं पर जलवायु परिवर्तन से अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान का चार्ट बनाने वाला यह पहला शोध है। यह उन क्षेत्रों को प्रभावित करेगा जो बढ़ते तापमान से  प्रभावित होंगे।

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Global GDP suffer huge losses climate change There could be loss 24.7 trillion dollars
जलवायु परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलवायु परिवर्तन से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडब्ल्यूपी) का नुकसान तेजी से बढ़ेगा। इस वजह से 2060 तक दुनिया की जीडीपी को 24.7 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यह तथ्य यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक नए अध्ययन में उजागर हुआ है।
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नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार वैश्विक सप्लाई आपूर्ति शृंखलाओं पर जलवायु परिवर्तन से अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान का चार्ट बनाने वाला यह पहला शोध है। यह उन क्षेत्रों को प्रभावित करेगा जो बढ़ते तापमान से  प्रभावित होंगे। आपूर्ति शृंखलाओं में पहले से अज्ञात रुकावटें जलवायु परिवर्तन के कारण आर्थिक नुकसान को और बढ़ा देंगी।
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धरती लगातार हो रही गर्म, बिगड़ रहे हालात
जैसे-जैसे धरती गर्म होती है उत्पादन के साथ-साथ आर्थिक रूप से इसकी स्थिति उतनी ही खराब होती जाती है। समय के साथ जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है आर्थिक नुकसान तेजी से बढ़ता है। जलवायु परिवर्तन वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुख्य रूप से गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी लागत, बहुत अधिक गर्मी होने पर काम रुकने और आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से आने वाले निवेश में आर्थिक रुकावट डालता है।
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2060 में लू से 5.90 लाख मौतें
प्रत्यक्ष मानव लागत भी इससे अछूती नहीं रहेगी। 2060 में अत्यधिक लू के 24 फीसदी दिन ज्यादा होंगे। लू के कारण सालाना 5.90  लाख अतिरिक्त मौतें होंगी, जबकि उच्चतम परिदृश्य के तहत दोगुने से अधिक लू की घटनाएं होंगी और साल में लू की घटनाओं से 11.2 लाख अतिरिक्त मौतें होने की आशंका है।


अर्थव्यवस्था जितनी जुड़ेगी असर उतना ही व्यापक
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था आपस में जितनी अधिक से अधिक जुड़ती जा रही है, दुनिया के एक हिस्से में व्यवधान का असर दुनिया के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है। एक क्षेत्र में फसल की विफलता, श्रम में कमी और अन्य आर्थिक व्यवधान दुनिया के अन्य हिस्सों में कच्चे माल की आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं जो उन पर निर्भर हैं। इस वजह से दूर-दराज के क्षेत्रों में निर्माण और व्यापार में बाधा उत्पन्न होती है। जलवायु परिवर्तन से इन व्यवधानों के अधिक बढ़ने के साथ-साथ उनके आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण और मात्रा निर्धारित करने वाला यह पहला अध्ययन है।
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