ग्लाइड बम का सफल परीक्षण, जल्द सेना में होगा शामिल
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स्वदेशी निर्मित हल्के भार वाले ‘ग्लाइड’ हम का शुक्रवार को ओडिशा के चांदीपुर में सफल परीक्षण हुआ। ऐसे हथियारों को विकसित करने में यह एक बड़ा कदम है। सॉ (स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन) बम को बृहस्पतिवार को भारतीय वायुसेना के एक विमान से चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) पर गिराया गया।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दिशासूचक बम को विमान से गिराया गया और सटीक नेविगेशन प्रणाली के माध्यम से उसका मार्गदर्शन किया गया। बहुत ही सटीकता के साथ 70 किमी से अधिक दूरी के अपने लक्ष्य तक पहुंचने में यह कामयाब रहा। इसमें कहा गया कि विभिन्न स्थितियों में इसके तीन परीक्षण किए गए जो सभी सफल रहे।
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इस दिशासूचक बम को अनुसंधान केंद्र इमरात (आरसीआई) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने वायुसेना और डीआरडीओ के अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर इसका निर्माण किया है। सफल परीक्षण के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने डीआरडीओ वैज्ञानिकों और वायुसेना को बधाई दी।
रक्षा विभाग आर एंड डी के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष एस क्रिस्टोफर ने ने टीम को बधाई दी कहा कि सॉ जल्द ही सैन्य बलों को उपलब्ध कराया जाएगा।
जानिए क्या है ग्लाइड बम?
जिससे लड़ाकू विमानों की उम्र बढ़ जाएगी। क्योंकि विमान को नुकसान की कम संभावना होगी। और लक्ष्य पर सटीक वार से आस-पास के नुकसान को भी कम किया जा सकता है। डीआरडीओ ग्लाइड बम दो प्रकार के होते हैं जिनमें पहला गरुथमा है जिसकी सीमा 100 किमी की है और दूसरा गरुडा है जिसकी सीमा 30 किमी है।