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Hindi News ›   India News ›   Girls Marriage Legal Age: Only one woman in the committee of 31 MPs, male MPs will decide the legal age of marriage of girls

Girl's Marriage Legal Age: 31 सांसदों की समिति में सिर्फ एक महिला, लड़कियों की शादी की वैध उम्र भी पुरुष सांसद ही विचार करेंगे

Sun, 02 Jan 2022 05:12 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 02 Jan 2022 05:12 PM IST
सार

लैंगिक समानता व महिला अधिकारों की लंबी चौड़ी बातों की सचाई यह है कि पुरुषों को प्रधानता की सोच बदल नहीं पा रही है। यही कारण है कि महिलाओं से संबंधित मसलों पर भी विचार व फैसला अधिकतर पुरुषों द्वारा ही किया जाता है। 

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Girls Marriage Legal Age: Only one woman in the committee of 31 MPs, male MPs will decide the legal age of marriage of girls
लड़कियों की शादी की उम्र - फोटो : social media

विस्तार

लड़कियों की शादी की वैध उम्र 18 से बढ़ाकर 21 करने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक विधेयक के परीक्षण के लिए बनी संसद की एक समिति में भी पुरुष सांसदों का ही वर्चस्व है। 31 सदस्यीय समिति में मात्र एक महिला सांसद को लिया गया है।

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लैंगिक समानता व महिला अधिकारों की लंबी चौड़ी बातों की सचाई यह है कि पुरुषों को प्रधानता की सोच बदल नहीं पा रही है। यही कारण है कि महिलाओं से संबंधित मसलों पर भी विचार व फैसला अधिकतर पुरुषों द्वारा ही किया जाता है। 
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बाल विवाह निषेष (संशोधन) (The Prohibition of Child Marriage (Amendment) Bill) विधेयक, जिसका समाज विशेषकर महिलाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा, संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में पेश कर दिया गया है। इसके बाद इसे विचार के लिए शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति को भेजा गया है। इस विधेयक को महिला व बाल विकास मंत्रालय ने तैयार किया है। इसमें लड़कियों की शादी की वैधानिक उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रस्ताव है। 
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समिति में एकमात्र महिला सांसद सुष्मिता देव
विधेयक को विचार के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थाई समिति को भेजा गया है। राज्यसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध इस समिति के सदस्यों की सूची के अनुसार 31 सदस्यीय समिति में एकमात्र महिला सांसद तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव हैं। 

इस बारे में चर्चा के लिए जब संपर्क किया गया तो सुष्मिता देव ने कहा कि यदि समिति और महिला सांसद होतीं तो बेहतर होता। देव ने कहा कि वह चाहती हैं कि इसमें और महिला सांसद हों, फिर भी हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी हितसमूहों को सुना जाए। 

सुप्रिया सुले ने भी कही यह बात
इसी तरह के विचार राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने भी व्यक्त किए। सुले संसद में महिलाओं से संबंधित मुद्दे उठाती रही हैं। उन्होंने भी कहा कि समिति में ज्यादा महिला सांसद होने चाहिए, क्योंकि वह महिलाओं संबंधी मुद्दों पर विचार करेगी। सुप्रिया सुले ने कहा कि समिति के अध्यक्ष को यह अधिकार है कि वह समिति के समक्ष लोगों को बुला सकते हैं। व्यापक व समावेशी विचार विमर्श के लिए वह अन्य महिला सांसदों को आमंत्रित कर सकते हैं। 


विभागों से संबंधित स्थायी समितियां स्थाई होती हैं, जबकि संयुक्त व प्रवर समितियां विधेयकों व प्रासंगिक मुद्दों पर विचार के लिए समय समय पर गठित की जाती हैं। इन समितियों का गठन लोकसभा व राज्यसभा द्वारा किया जाता है। शिक्षा, महिला, बच्चों, युवा व खेल मामलों की स्थायी समिति का संचालन राज्यसभा द्वारा किया जाता है। लोकसभा द्वारा गठित समितियों में उसी सदन के ज्यादा सदस्य होते हैं, जबकि राज्यसभा द्वारा गठित समितियों में उसके सदस्य ज्यादा होते हैं। 

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