Population Control: जनसंख्या विस्फोट पर बिफरे गिरिराज, इंद्रेश बोले- नियंत्रण के लिए बने सख्त कानून
आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत में बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए दो बच्चों का कानून बनाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इसे किसी धर्म, जाति व संप्रदाय से नहीं जोड़ना चाहिए।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि बढ़ती आबादी भारत के साथ साथ पूरे विश्व की समस्या है। अतः इसपर अतिशीघ्र कानून बनाया जाना चाहिए। साथ ही संघ नेता ने एक देश, एक झंडा, एक कानून का हवाला देते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड पर भी ज़ोर दिया। दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने रविवार को यहां जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लाए जाने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी जनसंख्या को नियंत्रित कर आर्थिक प्रगति का मार्ग अपनाया और भारत को भी अपने सीमित संसाधन देखते हुए ऐसा ही कानून लाना चाहिए। दिल्ली के जंतर-मंतर पर रविवार को जनसंख्या समाधान फाउंडेशन की ओर से जनसंख्या नियंत्रण पर कानून लाए जाने की मांग को लेकर रैली का आयोजन किया गया। रैली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारणी के सदस्य इंद्रेश कुमार भी मौजूद रहे।
पूरे देश को एक मत होकर जनसंख्या कानून पर विचार करना चाहिए: इंद्रेश कुमार
इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत में बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए दो बच्चों का कानून बनाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इसे किसी धर्म, जाति व संप्रदाय से नहीं जोड़ना चाहिए। जनसंख्या में वृद्धि होने से परेशानी सभी को होती है। इंद्रेश कुमार ने कहा कि जहां तक मुसलमानों की बात है तो 74 साल में उनकी स्थिति क्यों नहीं सुधरी है। जबकि उनको अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। आरएसएस का भी मानना है कि पूरे देश को एक मत होकर इससे संबंधित कानून बनाने पर विचार करना चाहिए। जहां तक वर्तमान सरकार की बात है तो वर्ष 2019 में 15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि छोटा परिवार भी देश प्रेम है। इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र के कारण कुछ राजनीतिक दल और नेता सोचते हैं कि मजहब के नाम पर जनसंख्या बढ़ाकर अपने सांसद और विधायक बढ़ा सकते हैं। इसलिए मजहबी जनसंख्या का असंतुलन भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया बढ़ती हुई जनसंख्या से प्रभावित और चिंतित है। विकास के लिए जरूरी है कि जनसंख्या नियंत्रण हो। हमारे देश में जनसंख्या अधिक है और प्राकृतिक संसाधन बेहद कम हैं।
जनसंख्या बेतहाशा बढ़ रही लेकिन जमीन तो उतनी ही है: इंद्रेश कुमार
इंद्रेश कुमार ने कहा कि 1857 में 83 लाख वर्ग किलोमीटर का भारत था और जनसंख्या 35 करोड़ थी। 1950 में 31.5 लाख वर्ग किमी का भारत रह गया और जनसंख्या 34 करोड़ थी। आज भूमि उतनी ही है, लेकिन जनसंख्या 130 करोड़ से अधिक हो गई है। जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि होने से परेशानी सबको हो रही है। वह चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, सिख हो या ईसाई।
जनसंख्या कानून उल्लंघन करने वालों से मतदान का अधिकार छीन लें: गिरिराज
इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि वे जनसंख्या नियंत्रण के लिए लाए जाने वाले कानून का समर्थन करते हैं। भारत के सीमित संसाधन को देखते हुए यह जरूरी है। भारत में दुनिया की 18 से 20 प्रतिशत आबादी है और जमीन ढाई प्रतिशत और जल चार प्रतिशत है। गिरिराज ने कहा कि यह कानून सभी मत, पंथ और संप्रदायों में समान रूप से लागू होना चाहिए। कानून को सख्त बनाया जाना चाहिए। उल्लंघन करने वालों को सरकारी लाभ से वंचित किया जाना चाहिए। वहीं उनका मतदान का अधिकार छीन लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन ने एक बच्चा पैदा करने की नीति से 60 करोड़ तक की आबादी रोकने का काम किया है। चीन में जहां हर एक मिनट में 10 बच्चे और भारत में हर मिनट में 30 से अधिक बच्चे पैदा हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जनसंख्या समाधान फाउंडेशन के प्रयासों से इस दिशा में जागरुकता आई है।
तिब्बत की आजादी के लिए हर भारतीय प्रयास करे : इंद्रेश
उधर, एक अन्य कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने कहा कि तिब्बत की आजादी और कैलाश मानसरोवर की मुक्ति के लिए हर भारतीय को प्रयास करना चाहिए। सभी देशवासियों को इसे मंत्र की तरह रोज याद करना और जपना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और भारत-तिब्बत सहयोग मंच के संयोजक इंद्रेश कुमार ने यह बात सोमवार को कही। वह अखिल भारतीय-तिब्बत समर्थक संगठनों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उमाशंकर दीक्षित मार्ग पर स्थित युवा केंद्र के सभागार में चल रहे इस सम्मेलन में पूरे देश के तिब्बत समर्थक कार्यकर्ता पहुंचे हुए हैं। भारत-तिब्बत मैत्री संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार ने तिब्बत में चीन के अत्याचारों की दास्तां सुनाई।