...जिस दिन कश्मीर में गिरेगी 'काली बर्फ', थाम लूंगा भाजपा का दामन- बोले गुलाम नबी आजाद
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया है। उनकी सदस्यता के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2005 की एक घटना को याद किया, जिसके बाद दोनों नेताओं की आंखें नम हो गईं। प्रधानमंत्री ने जिस भावुकता के साथ आजाद के राज्यसभा कार्यकाल और बतौर मुख्यमंत्री उनके काम को याद किया उससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। ऐसे कयास लगाए जाने लगे कि गुलाम नबी आजाद भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं।
दरअसल गुलाम नबी आजाद को इस बार कांग्रेस पार्टी ने राज्यसभा नहीं भेजा है। इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी में बदलाव और चुनाव के जरिये राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन की पैरवी करने वाले धड़े में आजाद भी शामिल हैं। इससे इस बात को बल मिला कि आजाद कांग्रेस से आजाद होकर किसी और दल में जा सकते हैं। हालांकि इन कयासों पर उस समय विराम लग गया जब खुद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जिस दिन कश्मीर में काली बर्फ गिरेगी, उस दिन वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे।
आजाद ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने संबंधों से लेकर भाजपा का हाथ थामने तक कई मुद्दों पर खुलकर बात की। जब गुलाम नबी आजाद से भाजपा में शामिल होने को लेकर पूछा गया, इस पर उन्होंने कहा कि जिस दिन कश्मीर में काली बर्फ गिरेगी, उस दिन मैं भाजपा का दामन थाम लूंगा। भाजपा ही क्यों उस दिन मैं किसी भी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाऊंगा।
टीवी डिबेट लड़ते थे मोदी और गुलाम नबी आजाद
गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों को लेकर कहा कि हम दोनों एक-दूसरे को 90 के दशक से जानते हैं। हम दोनों महासचिव थे और हम विभिन्न विचारों का प्रतिनिधित्व करने वाली टीवी डिबेट में शामिल होते थे। हम डिबेट के दौरान एक-दूसरे से जमकर लड़ते थे, लेकिन जिस दिन हम लोग जल्दी पहुंच जाते थे, उस दिन एक साथ बैठकर चाय पीते थे और आपस में लंबी बातें किया करते थे। उसके बाद हम एक-दूसरे को मुख्यमंत्रियों के रूप में जाने थे। फिर प्रधानमंत्री की बैठकों में, गृह मंत्री की बैठकों में, तब वे मुख्यमंत्री थे और मैं स्वास्थ्य मंत्री था और हम हर 10-15 दिन में अलग-अलग मुद्दों पर बोलते थे। इस तरह हमारी एक-दूसरे से पहचान और रिश्ते बहुत पुराने हैं।
14 साल पीछे चला गया था ...
जब गुलाम नबी आजाद से राज्यसभा में उनके और पीएम मोदी के रोने का पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि हम एक-दूसरे को जानते थे, इसलिए नहीं रो रहे थे। हम रो रहे थे कश्मीर में 2006 में गुजराती पर्यटकों की बस पर हुए हमले को याद कर। जब पीएम मोदी उस घटना का जिक्र कर रहे थे, तो मुझे लगा कि मैं 14 साल पहले उस पल में वापस आ गया था, जब हमला हुआ था... और मैं उस हमले से जुड़ी कहानी को पूरा नहीं कर पाया, खुद को भावुक होने से रोक नहीं पाया।
पीएम के रोने को लोग दिखावा कह सकते हैं, मैं नहीं : आजाद
कांग्रेस नेता शशि थरूर के प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा में भावुक होने को लेकर दिखावे वाली परफॉर्मेंस बताए जाने पर गुलाम नबी ने कहा, अधिकांश लोग पृष्ठभूमि को नहीं जानते हैं। बहुत से लोगों ने सोचा होगा कि प्रधानमंत्री दिखावा कर रहे हैं, क्योंकि एक कांग्रेसी नेता जा रहा है, तो उन्हें परेशान होने की क्या जरूरत है। लेकिन उन्होंने मेरे लिए जो शब्द कहे वो उनकी भावना थी, जो राजनीति से अलग एक इंसान के तौर पर थी। उन्होंने कहा कि पीएम के रोने को लोग दिखावा कह सकते हैं, लेकिन मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता।