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Hindi News ›   India News ›   General Elections 2019: Saroj Dubey, did not get conform train ticket, got ticket to Lok Sabha 

इतिहास के झरोखे से: जिनका रेल टिकट वेटिंग में था, उनका लोकसभा टिकट कंफर्म हो गया

Wed, 03 Apr 2019 06:45 PM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prabudhh Jain Updated Wed, 03 Apr 2019 06:45 PM IST
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General Elections 2019: Saroj Dubey, did not get conform train ticket, got ticket to Lok Sabha 
1991 में सरोज दुबे को इलाहाबाद से मिला टिकट - फोटो : Social media

देश में चुनावों का इतिहास हमेशा से ही दिलचस्प रहा है। चुनावों के दौरान पार्टी और प्रत्याशी दोनों मैदान में अपनी सियासी किस्मत आजमाने के लिए उतरते हैं। 1991 के आम चुनावों के दौरान ऐसी ही एक बेहद दिलचस्प बात हुई जिसका उल्लेख करने पर आज भी चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। 

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1991 के लोकसभा चुनावों में विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री थे। इलाहाबाद की सरोज दुबे भी इलाहाबाद संसदीय सीट की दावेदारी के लिए दिल्ली गई हुई थीं। उन्हें इलाहाबाद सीट के लिए जनता दल से टिकट मिलने की बातचीत चल रही थी। दिल्ली में उनके अलावा भी कई जनता दल के टिकट के कई उम्मीदवार मौजूद थे। दिल्ली में सरोज दुबे की मुलाकात वीपी सिंह से होनी थी और उनके साथ केके श्रीवास्तव भी गए थे।
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केके श्रीवास्तव बताते हैं कि वीपी सिंह से मुलाकात के लिए उनका नंबर आने में काफी देर हो गई। बातचीत करते करते शाम के चार बज गए। मुलाकात के बाद वीपी सिंह ने इलाहाबाद से आए सभी उम्मीदवारों को वापस जाने के कहा और आश्वस्त किया कि सभी की बातें सुन ली गई है, टिकट का फैसला हो जाने पर सूचित किया जाएगा।

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उन दिनों दिल्ली से इलाहाबाद के लिए तिनसुकिया मेल चलती थी। सरोज दुबे और केके श्रीवास्तव उसी ट्रेन में अपनी वापसी का टिकट कराया। लेकिन देर होने के कारण टिकट वेटिंग था। बहुत कोशिशों के बावजूद टिकट कन्फर्म नहीं हो पाया। 

नतीजनत सरोज और केके श्रीवास्तव दोनों बड़ी मुश्किल से ट्रेन के एक कोच में घुस गए। उन्होंने टीटी से बात की लेकिन सीट नहीं मिली। बहुत देर तक खड़े रहने के बाद जब पैरों में दर्द होने लगा तो सरोज ने बोला कि बर्थ नहीं मिल रही है तो कोई बात नहीं, फर्श तो अपना है ही। यह बोलते हुए वो बड़ी सहजता से एक सीट के पास फैले हुए जूते-चप्पलों को हटा कर बैठ गईं। केके श्रीवास्तव भी उनके साथ नीचे ही बैठ गए। 

जैसे-तैसे दोनों लोगों ने सफर तय किया और सुबह इलाहाबाद पहुंच कर स्टेशन पर उतरे। उतरते साथ ही उन्होंने सामान्य आदत के मुताबिक स्टेशन के बुक स्टॉल से अखबार खरीदा। अखबार पर नजर डालते ही दोनों को ऐसा लगा मानो यात्रा के दौरान हुई सभी तकलीफें एकाएक खत्म हो गई हों। अखबार के पहले पन्ने पर छपी लीड खबर में लिखा था कि इलाहाबाद संसदीय सीच पर जनता दल से सरोज दुबे को टिकट दिया गया है। यह पढ़ते ही सरोज दुबे और केके श्रीवास्तव की आंखें भर आई। रेलवे की वेटिंग टिकट से लेकर चुनाव के कंफर्म टिकट तक का यह सफर चुनावी इतिहास के झरोखों की एक मजेदार झलक है।

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