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हाईटेक हुआ गंगासागर मेला, गुमशुदगी की समस्या से निपटने के लिए मिलेंगे फ्री क्यूआर बैंड्स

Wed, 15 Jan 2020 05:44 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 15 Jan 2020 05:44 AM IST
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Gangasagar fair became high tech, QR bands will be used to tackle problem of missing people
गंगासागर मेले में तीर्थयात्री - फोटो : एएनआई

पश्चिम बंगाल के मशहूर गंगासागर मेले में लोगों की गुमशुदगी की समस्या से निपटने के लिए इस बार प्रशासन ने लोगों को क्यूआर बैंड बांटने का फैसला किया है। इसके अलावा प्रशासन कुछ खास तरह के एप और सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करेगा ताकि लोगों को कम से कम समस्या का सामना करना पड़े। मकर संक्रांति के अवसर पर हर साल लाखों तीर्थयात्री राज्य के दक्षिण 24 परगना जिले में आते हैं ताकि वे हुगली नदी और बंगाल की खाड़ी के मिलनस्थल के पानी में डुबकी लगा सकें।

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जिलाधिकारी पी. उल्गानाथन ने बताया कि हर साल लगने वाले इस मेले में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं और इतनी बड़ी संख्या का प्रबंधन प्रशासन के लिए चुनौती है। खासकर अपने परिवार से बिछड़ गए लोगों को दोबारा उनके परिवार से मिलने की। इसे देखते हुए इस बार मेले में प्रशासन क्यूआर कोड लिखे बैंडस को बच्चों और बुजुगों को बांटेगा। प्रशासन का मानना है कि इस साल कुंभ मेला नहीं होने की वजह से उम्मीद है कि श्रद्धालुओं की संख्या कहीं अधिक हो सकती है।

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क्या है क्यूआर बैंड

क्यूआर का आशय क्विक रिस्पांस से है। क्यूआर बैँड में एक विशेष किस्म के पट्टे में क्यूआर कोड लगाया जाता है और इसमें कई तरह की जानकारियां शामिल की जाती हैं। बैंड को स्कैन करते ही उस व्यक्ति की सारी जानकारी सामने आ जाती है। जैसे उसका नाम क्या है और वह कहां का रहने वाला है, फोन नंबर और पता क्या है। इससे गुमशुदा बच्चों और बुजुर्गों को उनके परिवार तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इन बैंड का नाम प्रशासन ने परिचय दिया है और यह लोगों को नि:शुल्क मिलेगा।

मेले में हजारों लोग बिछुड़ जाते हैं

इस मेले में करीब पांच से छह लाख वरिष्ठ नागरिक और बच्चे आते हैं और पंजीकृत आंकड़ों के अनुसार इनमें करीब दस हजार अपने परिजन से अलग हो जाते हैं। इनमें से करीब दो हजार मामले बहुत क्रिटिकल माने जाते हैं।

सागर सुरक्षा सॉफ्टवेयर करेगा भीड़ की निगरानी

प्रशासन भीड़ पर नजर रखने के लिए एक विशेष तरह के सॉफ्टवेयर सागर सुरक्षा का प्रयोग करेगा। इससे लोगों की गणना करने और कैमरे से मिलने वाली फीड का विश्लेषण करने में आसानी होगी। यह सॉफ्टवेयर गलत जगह से मेले में घुसने वालों के अलावा भीड़ को लेकर अलर्ट जारी कर सकेगा। इसके अलावा अतिथि पथ नामक एप से मेले के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। साथ ही पार्किंग के लिए वाहन दर्शन नामक विशेष प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा

वेबसाइट से मंगा सकेंगे जल

जो लोग किसी कारणवश मेला नहीं आ पा रहे हैं उनके लिए ई-स्नान की सुविधा प्रदान की गई है। ये लोग गंगाजल के लिए वेबसाइट पर आर्डर दे सकते हैं और प्रसाद, टीका के साथ यह जल उन्हें भेज दिया जाएगा। प्रशासन को अबतक एक हजार से अधिक ऐसे आर्डर मिल चुके हैं। इससे लाइव गंगासागर भी देखा जा सकेगा और लोग शाही स्नान की अनुभूति ले सकेंगे।

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