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G-20 Summit: विदेशी मेहमानों की सुरक्षा वाली 'सीक्रेट फाइलों' में सेंध का खतरा, पुलिस ने की व्हाट्सएप से तौबा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 05 Sep 2023 03:31 PM IST
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सार
'जी20' शिखर सम्मेलन के दौरान जो नई व्यवस्था तैयार की गई है, उसमें कहा गया है कि सिपाही से उप निरीक्षक तक कोई संदेश पहुंचाना है तो वह इंस्पेक्टर ही उन्हें फेस टू फेस देगा। कई बार ऐसा भी संभव है कि सभी कर्मचारी एक साथ एकत्रित न हो सकें तो उस स्थिति में इंस्पेक्टर के बाद एसआई या एएसआई ब्रीफिंग करेगा।
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G20 Summit Delhi Police refrains from using Whatsapp as Foreign Guests Security details issued news and update
जी-20 के लिए विशेष तैयारियां। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

'जी20' शिखर सम्मेलन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुरक्षा के मोर्चे पर विशेष सावधानी बरती जा रही है। दिल्ली पुलिस और दूसरी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों का प्रयास है कि विदेशी मेहमानों की हिफाजत में किसी तरह की 'चूक' की संभावना को ही खत्म कर दिया जाए। यही वजह है कि जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच रहे विभिन्न देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों की सिक्योरिटी से जुड़ी फाइलों, अहम जानकारी, सूचनाएं और अलर्ट, इनमें कोई सेंध न लगा सके, इसके लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है। स्पेशल सीक्रेट फाइल एवं मैसेज को सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने 'व्हाट्सएप' के इस्तेमाल से पूरी तरह दूरी बना ली है। अब 'व्हाट्सएप' की जगह 'एनआईसी' द्वारा तैयार किए गए 'संदेश' ऐप का इस्तेमाल करना होगा। शिखर सम्मेलन के दौरान इसी ऐप के माध्यम से संदेशों का आदान प्रदान किया जाएगा। 


सीक्रेट संदेश या अलर्ट के लीक होने का खतरा
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को यह आभास हो रहा था कि विदेशी मेहमानों के सिक्योरिटी कवर से संबंधित सूचनाएं और अलर्ट, इस प्रक्रिया में सेंध लग सकती है। दिल्ली पुलिस में सिक्योरिटी एवं यातायात से जुड़ा स्टाफ व्हाट्सएप ग्रुपों पर ही सूचनाएं एवं अलर्ट साझा कर रहा था। इन ग्रुपों में बड़े अधिकारियों के अलावा निचला स्टाफ भी जुड़ा रहता था। जैसे पुलिस मुख्यालय से कोई आदेश जारी होता है तो वह 'पद सोपान' के माध्यम से नीचे तक पहुंचता है। ऐसे में वह संदेश, बाहर भी जा सकता है।


'जी20' शिखर सम्मेलन के दौरान जो नई व्यवस्था तैयार की गई है, उसमें कहा गया है कि सिपाही से उप निरीक्षक तक कोई संदेश पहुंचाना है तो वह इंस्पेक्टर ही उन्हें फेस टू फेस देगा। कई बार ऐसा भी संभव है कि सभी कर्मचारी एक साथ एकत्रित न हो सकें तो उस स्थिति में इंस्पेक्टर के बाद एसआई या एएसआई ब्रीफिंग करेगा। ट्रैफिक पुलिस में यही काम टीआई और जेडओ करेंगे। 

सिक्योरिटी कवर के कमजोर होने का खतरा 
मौजूदा स्थिति में पुलिस अफसरों से लेकर निचले स्टाफ तक व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन समूहों में सभी पुलिसकर्मी जुड़े रहते थे। अगर कहीं पर कोई सिक्योरिटी बदलाव या ट्रैफिक इंतजाम में परिवर्तन करना होता तो उसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप में ही मैसेज डाल दिया जाता था। साथ ही संबंधित इंचार्ज को फोन पर भी बता दिया जाता था कि उसे फलां निर्देश व्हाट्सएप पर भेजा है। उस पर तुरंत अमल किया जाए। जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान यह महसूस किया गया कि इस तरह से सूचनाओं का आदान प्रदान, विदेशी मेहमानों के सिक्योरिटी कवर को कमजोर कर सकता है। दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने अपने अफसरों से कहा है कि कुछ समय तक किसी भी तरह की जानकारी, सूचना और अलर्ट, भेजने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल का न किया जाए। जी20 शिखर सम्मेलन की सुरक्षा या ट्रैफिक इंतजाम से जुड़ा कोई भी सूचना व्हाट्सएप पर साझा न करें।

'संदेश' ऐप से मैसेज फॉरवर्ड नहीं कर सकेंगे
दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर और उससे बड़े रैंक वाले अफसरों को 'संदेश' ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया है। इस ऐप के साथ दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, डीसीपी, एसीपी और निरीक्षक जुड़े रहेंगे। इससे विदेशी मेहमानों की सुरक्षा से संबंधित कोई भी सूचना या अलर्ट लीक नहीं होगा। खास बात है कि जो भी पुलिस कर्मी संदेश ऐप से जुड़ा है, केवल वही इसका इस्तेमाल कर सकेगा। इस ऐप में आने वाले संदेशों या फाइल को देखा जा सकता है, मगर उसे फॉरवर्ड नहीं किया जा सकता। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक मोबाइल नंबरों पर ही यह ऐप काम करेगा। इस ऐप में किसी संदेश को कॉपी नहीं किया जा सकेगा।
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