लद्दाख में भारतीय फौजियो के सामने पीएम मोदी का ओजपूर्ण भाषण शब्दश: यहां पढ़िए
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शुक्रवार की सुबह हर कोई उस वक्त चौंक गया, जब खबर लगी कि पीएम मोदी अचानक लेह पहुंच गए। समुद्री तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर देश के मुखिया को अपने बीच पाकर भारतीय जवानों का हौसला निश्चित रूप से सातवें आसमां पर होगा। चीन से सरहद पर तनातनी के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत और सेनाध्यक्ष नरवणे के साथ मोदी ने न सिर्फ सेना, वायुसेना के अधिकारियों से जमीनी हकीकत जानी बल्कि 26 मिनट 22 सेकेंड तक गरजते भी रहे। सैनिकों का उत्साह बढ़ाते रहे, उनका धन्यवाद करते रहे।
पीएम मोदी का शब्दश: भाषण
साथियों आपका ये हौसला। आपका शौर्य और मां भारती के मान-सम्मान के लिए आपका समर्पण अतुल्यनीय है। आपकी जीवटता भी दुनिया में किसी से भी कम नहीं है। जिन कठिन परिस्थितियों में, जिस ऊंचाई पर आप मां भारती की ढाल बनकर उसकी रक्षा करते हैं, उसकी सेवा करते हैं, उसका मुकाबला पूरे विश्व में कोई नहीं कर सकता। आपका साहस, उस ऊंचाई से भी ऊंचा है, जहां आप तैनात हैं। आपका निश्चय उस घाटी से भी सख्त है, जिसको रोज आप अपने कदमों से नापते हैं, आपकी भुजाएं उन चट्टानों जैसी मजबूत हैं, जो आपके इर्द-गिर्द खड़ी है। आपकी इच्छाशक्ति, आपके आसपास के पर्वतों जितनी अटल है। आज आपके बीच आकर मैं इसे महसूस कर रहा हूं। साक्षात अपनी आंखों से इसे देख रहा हूं। साथियों जब देश की रक्षा, आपके हाथों में हैं, आपके मजबूत इरादों में हैं तो एक अटूट विश्वास है, सिर्फ मुझे नहीं बल्कि पूरे देश को और देश निश्चिंत भी है। आप जब सरहद पर डटे हैं तो यही बात प्रत्येक देशवासी को देश के लिए दिन-रात काम करने के लिए प्रेरित करती है। आत्मनिर्भर भारत का संकल्प, आप लोगों के कारण आपके त्याग, बलिदान के कारण और मजबूत होता है और अभी जो आपने और आपके साथियों ने वीरता दिखाई है, उसने पूरी दुनिया में ये संदेश दिया है कि भारत की ताकत क्या है अब मैं मेरे सामने महिला फौजियों को भी देख रहा हूं। युद्ध के मैदान में सीमा पर ये दृश्य अपने आप को प्रेरणा देता है।
'जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल, कलम आज उनकी जय बोल'
साथियों, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने लिखा था, जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल। कलम आज उनकी जय बोल। मैं आज अपनी वाणी से आपकी जय बोलता हूं। आपका अभिनंदन करता हूं। मैं गलवां घाटी में शहीद हुए अपने वीर जवानों को भी पुन: श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनमें पूरब से पश्चिम से उत्तर से दक्षिण से देश के हर कोने के वीर अपना शौर्य दिखाते हैं, उनका पराक्रम, उनके सिंहनाद से धरती अब भी उनका जयकारा कर रही है। आज हर देशवासी का सिर आपके सामने अपने देश के वीर सैनिकों के सामने आदरपूर्वक नतमस्तक होकर नमन करता है। आज हर भारतीय की छाती आपकी वीरता और पराक्रम से फूली हुई है। साथियों सिंधु के आशीर्वाद से यह धरती पुण्य हुई है। वीर सपूतों के शौर्य और पराक्रम की गाथाओं को ये धरती अपने आप में समेटे हुए है। लेह लद्दाख से लेकर कारगिल और सियाचिन तक रिजांग ला की बर्फीली चोटियों से लेकर गलवां घाटी के ठंडी पानी की धारा तक हर चोटी, हर पहाड़, हर जर्रा-जर्रा, हर कंकड़, पत्थर भारतीय सैनिकों के पराक्रम की गवाही देते हैं। 14 कोर की जांबाजी के किस्से तो हर तरफ है। दुनिया ने आप का अदम्य साहस देखा है, जाना है। आपकी शौर्य गाथाएं घर-घर में गूंज रहीं हैं। भारत माता के दुश्मनों ने आपकी फायर (आग) और फ्यूरी (आक्रोश) भी देखी है। साथियों, लद्दाख का जो ये पूरा हिस्सा, यह भारत का मस्तक है। 130 करोड़ भारतीयों के मान सम्मान का प्रतीक है। ये भूमि भारत के लिए सर्वस्व त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले राष्ट्रभक्तों की धरती है। इस धरती ने कुशल जैसे महान राष्ट्रभक्त देश को दिए।
'वीर भोग्या वसुंधरा'
लद्दाख की राष्ट्रभक्त जनता ने अलगाववाद के हर प्रयास को विफल किया। आज लद्दाख के लोग हर स्तर पर चाहे वो सेना हो या सामान्य नागरिक के कर्तव्य हो, राष्ट्र को सशक्त करने के लिए अद्भुत योगदान दे रहे हैं। साथियों हमारे यहां कहा जाता है, खड्गेन आक्रम्य भुंजीतः, वीर भोग्या वसुंधरा। यानी वीर अपने शस्त्र की ताकत से ही धरती की मातृभूमि की रक्षा करते हैं। ये धरती वीर भोग्या है। वीरों के लिए है, इसकी रक्षा-सुरक्षा को हमारा समर्पण, हमारा सामर्थ्य, हमारा संकल्प हिमालय की तरह ही ऊंचा है। ये सामर्थ्य और संकल्प में इस समय आपकी आंखों में मैं देख सकता हूं। आपके चेहरों पर ये साफ-साफ नजर आता है। आप उसी धरती के वीर हैं, जिसने हजारों वर्षों से अनेकों अक्रांताओं के हमलों का, अत्याचारों का मुंहतोड़ जवाब दिया है और यह हमारी पहचान है। हम वो लोग हैं, जो बांसुरीधारी कृष्ण की पूजा करते हैं, हम वही लोग हैं जो सुदर्शन चक्रधारी कृष्ण को भी आदर्श मानकर चलते हैं। इसी प्रेरणा से भारत हर आक्रमण के बाद और सशक्त होकर उभरा है।' साथियों, राष्ट्र की, दुनिया की मानवता की प्रगति के लिए, शांति और मित्रता हर कोई स्वीकार करता है, हर कोई मानता है यह जरूरी है, लेकिन हम ये भी जानते हैं कि शांति निर्बल कभी नहीं ला सकता। कमजोर शांति की पहल नहीं कर सकता। वीरता ही शांति की पूर्वशर्त होती है। भारत आज जल-थल-नभ और अंतरिक्ष तक अपनी ताकत बढ़ा रहा है और उसके पीछे का लक्ष्य मानव कल्याण ही है। भारत आज आधुनिक अस्त्र-शस्त्र का निर्माण कर रहा है। दुनिया के आधुनिक से आधुनिक तकनीक अगर भारतीय सेना के लिए ला रहे हैं तो उसके पीछे की भावना भी यही है। भारत अगर आधुनिक इंस्फास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से कर रहा है तो उसके पीछे का मकसद भी यही है। विश्व युद्ध हो या फिर शांति की बात जब भी जरूरत पड़ी है विश्व ने हमारे वीरों का पराक्रम भी देखा है और विश्व शांत के उनके प्रयासों को महसूस भी किया है। हमने हमेशा मानवता की, इंसानियत की रक्षा और सुरक्षा के लिए काम किया है। जीवन खपाया है। आप सभी भारत के इसी लक्ष्य को , इसी परंपरा को , भारत की इस संस्कृति को साबित करने वाले लीडर हैं। साथियों महान संत तिरुवल्लुवर जी ने सैकड़ों वर्ष पूर्व कहा था शौर्य, सम्मान, मर्यादापूर्ण व्यवहार की परंपरा और विश्वसनीयता ये चार गुण किसी भी देश की सेना का प्रतिबिंब होते हैं भारतीय सेना हमेशा से इसी मार्ग पर चली है।
'विस्तारवाद ने ही मानव जाति का विनाश किया'
साथियों विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है। यह युग विकासवाद का है। तेजी से बदलते हुए समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है। विकासवाद के लिए ही अवसर है और विकासवाद ही भविष्य का आधार है। इतिहास गवाह रहा है कि ऐसी ताकतों ने ही मानवजाति का विनाश किया है। इतिहास बताता है कि ऐसा करने वाली ताकतें खत्म हो गईं है। इसी अनुभव के आधार पर हम इस बार फिर से पूरे विश्व में विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है। आज विश्व विकासवाद को समर्पित है औऱ विकास की खुली स्पर्धा का स्वागत कर रहा है। दोस्तों जब तक मैं राष्ट्र निर्माण से जुड़े किसी निर्णय के बारे में सोचता हूं तो मैं सबसे पहले दो माताओं का स्मरण करता हूं। पहली- हम सभी की भारत माता, दूसरी- वे वीर माताएं जिन्होंने आप जैसे योद्धाओं को जन्म दिया है। मेरे निर्णय की कसौटी यही है, इसी कसौटी पर चलते हुए, आपके सम्मान, आपके परिवार के सम्मान और भारत माता की सुरक्षा को देश सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। सेनाओं के लिए आधुनिक हथियार हो या आपके लिए जरूरी साजो-सामान इस सभी पर हम बहुत ध्यान देते रहे हैं। अब देश में बॉर्डर इंस्फास्ट्रक्चर पर खर्च करीब-करीब तीन गुना कर दिया गया है, इसे बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट और सीमा पर सड़कें, पुल बनाने का काम भी तेजी से हुआ है। इस वजह से आप तक सामान भी कम समय तक पहुंचता है। साथियों सेनाओं में बेहतर समन्वय के लिए चीफ ऑफ डिफेंस के गठन की बात हो या फिर नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण। वन रैंक वन पेंशन का फैसला हो या फिर आपके परिवार की देख-रेख से लेकर शिक्षा तक की सही व्यवस्था के लिए लगातार मजबूत कर रहा है।
भगवान बुद्ध का भी जिक्र किया
मित्रों, भगवान गौतम बुद्ध ने कहा है साहस का संबंध प्रतिबद्धता से है। साहस करुणा है। साहस वो है, जो हमें निर्भीक और अडिग होकर सत्य के पक्ष में खड़े होना सिखाए। साहस वो है, जो हमें सही को सही कहने और करने की ऊर्जा देता है। साथियों, देश के वीर सपूतों ने गलवां घाटी में जो अदम्य साहस दिखाया, वो पराक्रम की पराकाष्ठा है। देश को आप पर गर्व है। आप पर नाज है। आपके साथ ही हमारे आईटीबीपी के जवान हो, बीएसएफ के साथी हो, हमारे बीआरओ के जवान हो। मुश्किल हालात में काम कर रहे इंजीनियर हो, श्रमिक हो आप सभी अद्भुत काम कर रहे हैं। हर कोई कंधे से कंधा मिलाकर मां भारती की सेवा में समर्पित है। आज आप सभी की मेहनत से, देश अनेक आपदाओं से एकसाथ लड़ रहा है। आप सभी से प्रेरणा लेते हुए, हम मिलकर, मुश्किल से मुश्किल चुनौती पर विजय प्राप्त करते रहे हैं, विजय प्राप्त करते रहेंगे। हम सबने जिस भारत के सपने को लेकर सरहद पर देश की रक्षा कर रहे हैं, हम उस सपने का भारत बनाएंगे, आपके सपनों का भारत बनाने के लिए, 130 करोड़ देशवासी पीछे नहीं रहेंगे, ये मैं आज आपको विश्वास दिलाने आया हूं। हम सशक्त और आत्मनिर्भर भारत बनाएंगे और बनाकर ही रहेंगे। जब आपसे प्रेरणा मिलती है तो आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी और ताकतवर हो जाता है और फिर एकबार आप सभी को ह्रदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए- भारत माता की जय..भारत माता की जय..भारत माता की जय..वंदे मातरम...वंदे मातरम....वंदे मातरम