अगर आप हेयर ट्रांसप्लांट कराने का सोच रहे हैं तो जानिए इसकी लागत और प्रक्रिया
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- जानिए हेयर ट्रांसप्लांट के बारे में सबकुछ
- हेयर ट्रांसप्लांट में आता है कितना खर्च
- हेयर ट्रांसप्लांट की कीमत कैसे तय होती है
- आखिरकार पुरुषों को ही क्यों होता है सबसे ज्यादा गंजापन
- मेल पैटर्न बॉल्डनेस/ऐन्ड्रोजेनेटिक एलोपीशिया के कारण क्या हैं
- हेयर ट्रांसप्लांट में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
- हेयर ट्रांसप्लांट के बाद किन बातों का ख्याल रखें
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विस्तार
व्यक्तित्व निखारकर उसे प्रभावशाली बनाने में बालों के योगदान को शायद ही कोई नकार सकता है। इसका गंभीर असर आपके सामाजिक-पारिवारिक जीवन के साथ ही प्रोफेशनल लाइफ पर भी पड़ता है। आपको शायद ही पता हो कि असमय गंजेपन के कारण बड़ी संख्या में युवक-युवतियां मनोवैज्ञानिक समस्याओं के शिकार हो जाते हैं। उनके अंदर हीनता विकसित हो जाती है।
इसका असर उनकी जिंदगी पर भी पड़ता है। यह इतना अधिक गंभीर और चिंतनीय विषय बन चुका है कि इसके लिए अलग चिकित्सा विधा शुरू हो चुकी है। हाल ही में बॉलीवुड में इसी विषय पर दो फिल्में और एक वेबसीरीज भी बनाई गई है। आज हम आपको गंजेपन के कारण, इसका असर, इसे दूर करने के उपाय और हेयर ट्रांसप्लांट (केश प्रत्यारोपण) समेत सभी पक्षों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।
क्या है हेयर ट्रांसप्लांट
हेयर ट्रांसप्लांट या केश प्रत्यारोपण एक शल्य क्रिया (सर्जिकल) है। जिसमें सिर के पीछे और कांख (बगल) से बाल लेकर सिर के गंज वाले स्थान पर लगाए जाते हैं। इन बालों को परिपक्व होने में तीन से चार महीने का समय लगता है। उसके बाद सिर के उक्त स्थान पर प्राकृतिक बाल बढ़ने लगते हैं।
प्रत्यारोपण के दौरान दाढ़ी व छाती के बाल भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन जो बाल जैसा होगा वह उसी प्रकार से बढ़ेगा। व्यक्ति चाहे कितना भी बूढ़ा हो या गंजा, उसके सिर के पीछे और कांख (बगल) में बाल जरूर होते हैं। इसे परमानेंट हेयर जोन कहा जाता है। आमतौर पर यहीं से बालों को निकालकर प्रत्यारोपित किया जाता है।
आखिरकार पुरुषों को क्यों होता है गंजापन?
- पुरुषों में होने वाले गंजेपन को मेल पैटर्न बॉल्डनेस/एन्ड्रोजेनेटिक एलोपीशिया (Male Pattern Baldness/Androgenetic Alopecia) कहा जाता है।
- इसमें पुरुषों के माथे की तरफ से या फिर सिर के ऊपरी हिस्से से बाल झड़ने लगते हैं। इसके बाद बालों की आकृति लगती बिगड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे पतले होने लगते हैं। उसके बाद वे झड़ने लगते हैं।
- जिस तरह से हमारे शरीर की त्वचा पर रोम होते हैं। ठीक वैसे ही सिर के ऊपर हेयर फॉलिकल्स होते हैं। इन्हीं में से बाल निकलते हैं।
- हेयर फॉलिकल्स जब तक स्वस्थ रहते हैं, बाल मजबूत बने रहते हैं, मगर ठीक इसके विपरीत
- हेयर फॉलिकल्स जब सिकुड़ने लगते हैं, तो बाल पतले होने शुरू हो जाते हैं।
- अगर इसका ख्याल नहीं रखा जाए तो यह समय के साथ गायब भी हो जाते हैं जिसकी वजह से गंजापन होता है।
बाल्डनेस : तीन तरह की वजह मुख्य रूप से सामने आती हैं
एक्सपर्ट के मुताबिक गंजेपन के सबसे बड़े कारण
- आनुवांशिक कारक (जेनेटिक प्रभाव)
- उम्र के बढ़ने के साथ हॉर्मोन्स में परिवर्तन होता है जिसकी वजह से गंजापन होता है।
- बीमारी और हार्मोंस की वजह से
अन्य कारण
- विटामिन्स और मिनरल्स की कमी
- भोजन का असंतुलित होना, न्यूट्रीशन वाला भोजन न करना
- तनावपूर्ण जीवनशैली
- लम्बे समय से चली आ रही कोई बीमारी
छोटी-छोटी टिप्स आपको इस समस्या से दूर रख सकती है
टिप्स: छोटे-छोटे नुस्खे और उपाय आपको इस समस्या से दूर रख सकते हैं। पानी पीना सेहत को तरोताजा रखने का रामबाण उपाय है। हर चार घंटे में पानी पीने जैसा साधारण काम भी आपके बालों को तरावट और नमी पहुंचा सकता है। बालों में प्रोटीन और विटामिन की जो कमी होती है, उसको बादाम, अखरोट, काजू, दूध, चिकन, ब्रॉकली (हरी गोभी) का उपयोग करके पूरा किया जा सकता है।
- जब भी बाल झड़ने जैसी समस्या होती है तो डॉक्टर से इस बारे में सलाह लेनी चाहिए। उसके बाद उपचार करना चाहिए। कई बार नुस्खों से भी नुकसान हो जाता है।
- जब भी ऐसा होता है तो फुल बॉडी टेस्ट कराकर इलाज करना चाहिए।
- हॉर्मोन्स की जांच भी करवा लेनी चाहिए और सम्पूर्ण रिपोर्ट के अनुसार कदम उठाना चाहिए।
- घरेलू नुस्खे अपनाने की जगह सबसे पहले एक्सपर्ट की सलाह पर जाना चाहिए।
अन्य निदान : कुछ उपाय जो अपनाए जा सकते हैं
अगर सभी उपचार के बाद भी बाल गिरने नहीं रुक रहे तो यह उपाय भी अपनाए जा सकते हैं
- विग
- हेयर एक्सटेंशन
- हेयर ट्रांसप्लांट या हेयर ग्राफ्टिंग
यह कोई मामूली बात नहीं है पुरुषों और महिलाओं में गंजापन का प्रभाव विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य परिस्थितियों को प्रभावित कर रहा है। इसका असर व्यक्तित्व विकास से लेकर करियर में आगे बढ़ने पर भी पड़ता है।
हेयर ट्रांसप्लांट और इससे जुड़े सवाल
आज के दौर में हेयर ट्रांसप्लांट लोगों की जरूरत तो बन ही रहा है। साथ ही कई बार इसे बतौर फैशन भी करवाया जाता है। कुछ लोग स्टाइल को बदलने और आकर्षक दिखने के लिए भी इसे करवाते हैं।
मगर इससे संबंधित कुछ सवाल आपके मन में जरूर उठते होंगे:
- क्या हेयर ट्रांसप्लांट वास्तव में सुरक्षित और सफल है?
- क्या यह एक स्थायी प्रक्रिया है
- क्या इसके परिणामस्वरूप शरीर में असमान ऊतक परिवर्तन होते हैं?
- हेयर ट्रांसप्लांट (बाल प्रत्यारोपण) कैसे होता है?
हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया
हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी के करीब दो सप्ताह बाद ही बाल उगने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सर्जरी के बाद पूरे बाल आने में 7 से 10 महीने का समय लग जाता है। ये बाल बिलकुल कुदरती बालों की तरह दिखाई देते हैं और उनकी तरह ही उगते है। इन्हें कटवा भी सकते हैं। जरूरत पड़े तो इन्हें रंगा भी जा सकता है और अपने अनुसार का स्टाइल भी दिया जा सकता है।
केवल सिर के ही नहीं बल्कि आंखों की पलकें, भौंह या दाढ़ी के बालों की समस्या को भी इस तकनीक के माध्यम से ठीक किया जा सकता हैं। बस एक विशेष बात का ख्याल रखना होता है कि डॉक्टर की सलाह लेते रहना चाहिए और उनके बताए अनुसार ही इनका ख्याल रखना चाहिए।
हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया
- व्यक्ति के बालों की पूरी केस स्टडी को पढ़ा जाता है। यह जाना जाता है कि इसके बाल क्यों गायब हुए, वजह क्या थी और किस प्रकार का उपचार दिया जाएगा।
- गंजेपन के क्षेत्र को समझा जाता है।
- डोनर एरिया को भी पहचाना जाता है। यह वो स्थान है जहां से बाल लिए जाते हैं।
- इसमें सिर और शरीर के बालों वाले हिस्सों से बालों के फॉलिकल्स निकालकर बालरहित हिस्से में लगाए जाते हैं।
- जहां गंजापन काफी ज्यादा है, वहां पर फॉलिकल्स निकालकर गंजे हिस्से में लगा दिए जाते हैं।
- आम आदमी के निचले हिस्से में जो बाल होते हैं, वो गंजेपन से जल्दी प्रभावित नहीं होते हैं। उन हिस्सों के फॉलिकल्स का प्रयोग किया जाता है। इसमें सिर और शरीर के बालों वाले हिस्सों से बालों के फॉलिकल्स निकालकर बालरहित हिस्से में लगाते हैं।
- इस सर्जरी में एनसथीसिया देने वाले स्पेशलिस्ट के साथ साथ अन्य आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। पूरी प्रक्रिया को विशेषज्ञों की टीम पूरा करती है।
हेयर ट्रांसप्लांट में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
- पसीने से बचना चाहिए
- सर पर कुछ भी बांधने और पहनने से बचना चाहिए। जैसे, हेलमेट, टोपी और कपड़ा।
- इसलिए सर्दियों में ट्रांसप्लांट का समय बेहतरीन होता है।
हेयर ट्रांसप्लांट दो तरीके से होता है
1 फॉलिक्यूलर ट्रांसप्लांटेशन (Follicular Unit Transplantation)
- फॉलिक्यूलर ट्रांसप्लांटेशन में त्वचा का ( बालों वाला ) एक हिस्सा निकाल लिया जाता है।
- उन निकाले हुए बालों को अलग अलग किया जाता है।
- उसके बाद उस जगह लगा दिया जाता है, जहां पर गंजापन है।
- फॉलिक्यूलर ट्रांसप्लांटेशन प्रक्रिया को स्ट्रिप प्रक्रिया भी कहते हैं क्योंकि इसमें सिर के पीछे से बालों की स्ट्रिप निकाली जाती है।
- सबसे पहले मरीज को लोकल एनसथीसिया दिया जाता है।
- फिर डोनर एरिया से एक 1.6 से 1.7 सेंटी मीटर की चौड़ी स्ट्रिप निकाली जाती है।
- आधे इंच की एक स्ट्रिप में आम तौर पर दो से ढाई हजार तक फोलिकिल्स हो सकते हैं।
- एक फॉलिकल में दो से तीन बाल होते हैं।
- फॉलिकल्स लगाने के बाद डोनर एरिया में टांके लगा दिए जाते हैं। ये टांके एक से दो हफ्ते में सामान्य हो जाते हैं।
- फॉलिक्यूलर एक्सट्रेक्शन के अंतर्गत एक-एक फॉलिकल को निकाला जाता है और अलग किया जाता है ।
- जिस हिस्से में गंजापन होता है, वहां पर उन्हें लगा दिया जाता है ।
- फॉलिक्यूलर एक्सट्रेक्शन में कोई सर्जरी का निशान भी नहीं बनता है ।
- फॉलिक्यूलर एक्सट्रेक्शन कोई स्ट्रिप नहीं काटी जाती।
- इसमें सिर के पीछे से एक-एक करके फॉलिकल्स (बाल की जड़) को निकाला जाता है।
- सिर के पीछे से निकाले गए बाल की जड़ को गंजे हिस्से में इम्प्लांट किया जाता है।
- इसमें सिटिंग होती है और इसमें मरीज को भर्ती नहीं होना पड़ता है।
- आम तौर पर एक सिटिंग में 2000-3000 फॉलिकल्स लगाए जाते हैं।
- इसमें करीब 6 से 7 घंटे तक का समय लगता है।
- इस सर्जरी की सबसे बेहतरीन बात यह है कि इसमें कोई टांका नहीं लगता और न निशान आते हैं।
- यह एक दर्दरहित प्रक्रिया है।
एक स्वस्थ और प्रौढ़ पुरुष में करीब पांच लाख रोमकूप होते हैं जिनमें से करीब एक लाख केवल सिर पर और बाकी पूरे शरीर पर स्थित होते हैं , जैसे जैसे उम्र बढ़ने लगती है, उसके साथ−साथ रोमकूप भी कम होते जाते हैं।
बालों के विकास की तीन अवस्थाएं होती हैं
केटोजन- यह स्थिति परिवर्तन की होती है
रेस्ट कंडीशन- यह स्थिति आराम की अवस्था होती है।
गंजेपन के प्रकार
पुरुषों में पांच प्रकार का गंजापन होता है
- लेवल वन- पहले प्रकार का गंजापन सिर के मध्य और दाएं तथा बाएं हिस्से में होता है, यह सबसे पहले शुरू होता है।
- लेवल टू - दूसरे प्रकार का गंजापन लंबा, चौरस या गोल आकार लिए होता है जिसमें मध्य भाग के साथ−साथ मध्य भाग के पीछे के बाल भी उड़ जाते हैं।
- लेवल थ्री- तीसरे प्रकार के गंजेपन में सिर के मध्य भाग से लेकर पीछे तक के बाल तेजी से उड़ते जाते हैं।
- लेवल फोर- गंजेपन के चौथे प्रकार में सिर का बीच का भाग पूरी तरह गंजा हो जाता है और नीचे के बाल तीन हिस्सों में बंटे दिखाई देने लगते हैं।
- लेवल फाइव- पांचवें प्रकार के गंजेपन में सिर के तीनों ओर बालों की पतली सी रेखा ही दिखाई पड़ती है।
- लेवल सिक्स और सेवन भी शामिल हैं।
बॉलीवुड में सूपड़ा साफ और बाला के कारण भी गंजापन चर्चा में
फिल्मों में भी चर्चा होती है
आयुष्मान खुराना, यामी गौतम और भूमि पेडनकर फिल्म 'बाला' के साथ आयुष्मान ने एक बार फिर से खुद को हिट मशीन साबित कर दिया है। इस फिल्म के साथ ही आयुष्मान ने लगातार सातवीं हिट फिल्म सिनेमा को दी है। वैसे बात फिल्म की करें तो फिल्म ने सिर्फ दर्शकों को जोरदार एंटरटेनमेंट का डोज देती है, बल्कि साथ ही साथ एक संदेश भी।फिल्म देखकर आप जहां हंसेंगे तो वहीं आपको अंत में ये भी समझ आएगा कि किसी की कमजोरी पर कभी भी हंसना नहीं चाहिए, चाहें फिर कोई गंजा हो, मोटा हो, पतला हो या फिर काला हो। फिल्म के आखिरी में आयुष्मान इस बात को समझाने के लिए एक कविता भी सुनाते हैं जो काफी मजेदार अंदाज में पेश की जाती है। वैसे इस कंसेप्ट पर ही 'बाला' से पहले सनी सिंह स्टारर फिल्म 'उजड़ा चमन' भी रिलीज हुई थी। फिल्म का मैसेज तो यही था, लेकिन फिल्म दर्शकों तक पहुंचने में काफी संघर्ष करती नजर आई।
कितना खर्चा आता है इस ट्रीटमेंट में
कितना आता है खर्च
हेयर ट्रांसप्लांट का खर्च बालों की ग्राफ्टिंग पर निर्भर करता है। यानि सिर पर कितने बाल लगाए जाने हैं। चंडीगढ़ में कास्मेटिक सर्जरी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर दीपक कालिया बताते हैं कि प्राइवेट क्लीनिक में इसमें कितना खर्च होगा ये गंजेपन की अवस्था पर निर्भर करता हैं (आप यह किस जगह और किस तरह के डॉक्टर से करा रहे है इस पर भी निर्भर करता है)जबकि सरकारी डॉक्टरों के मुताबिक पीजीआई या जीएमएसएच 16 में 8 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है।
हेयर ट्रांसप्लांट की कीमत इन बातों पर निर्भर करती है
गंजेपन की स्थिति पर (Grade of Baldness)
कितनी सीटिंग होगी (Number of sitting)
और डोनर एरिया की गुणवत्ता कितनी है (Donor Area Quality)
यह कीमत बहुत सारी बातों पर निर्भर करती है मुख्यता बालों की केस स्टडी और विशेषज्ञ संस्थान।
जानिए : स्ट्रिप मैथड और फॉलिकन मैथड
स्ट्रिप मैथड
- स्ट्रिप मैथड की अगर बात करें तो ग्राफ्टिंग में करीब 30 से 40 हजार रुपए का खर्च आता है,जो केस स्टडी के ऊपर निर्भर करता है ।
- इसके अलावा यह निर्भर करता है सिटिंग्स पर और इसमें अन्य उपकरणों का खर्च जोड़ा जाता है।
- इस तरह का ट्रीटमेंट कहां और किसके द्वारा हो रहा है? इस पर भी खर्चें का हिसाब किताब निर्भर करता है।
फॉलिकन मैथड
- आधुनिक तकनीक यानी फॉलिकन मैथड में अनुमानित खर्चा करीब 50 से 60 हजार रुपए ग्राफ्टिंग का आता है,जो केस स्टडी के ऊपर निर्भर करता है ।
- और यह भी इस बात पर निर्भर करता है कि कौन, किस विशेषज्ञ के द्वारा यह ट्रीटमेंट हो रहा है।
भारत: हेयरकेयर बाजार
- एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में आज हेयरकेयर बाजार लगभग 22 हजार करोड़ रुपए का है।
- भारत में हेयरकेयर बाजार 8 से10 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है।
- देश में 20 फीसदी की दर से हर वर्ष हेयर ट्रांसप्लांट की ग्रोथ तेजी से बढ़ रही है।
- हेयर ट्रांसप्लांट करीब 1 लाख रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक में यह ट्रीटमेंट की प्रक्रिया होती है।
- हेयर ट्रांसप्लांट करवाने वालों की संख्या पिछले पांच सालों में 10 गुना बढ़ गई है।
- भारत में हेयर ट्रांसप्लांट की पहली पसंद फोलिकल यूनिट एक्सट्रेक्शन (एफयूई) या स्ट्रिप विधि सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।
गंजेपन की समस्या से पीड़ित हैं तो ऐसे पाएं निजात
बाल्डनेस यानी गंजेपन की समस्या को दूर करने के लिए इन दिनों मार्केट में कई एडवांस टेक्निक्स मौजूद हैं, जिन्हें हेयर रीस्टोरेशन प्रोसेस के नाम से जाना जाता है।यह दो प्रकार की प्रक्रियाओं के तहत होती है- सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल।
हॉर्मोंस में बदलाव भी एक प्रमुख वजह है:
- हेरिडिटी प्रॉब्लम
- प्रतिरोधक क्षमता में कमी का होना
- बहुत बार बाल गिरने की वजह एलोपीसिया एरीटा हो सकती है, जो शरीर की प्रतिरोधकता क्षमता में कमी आने से होती है। इसमें सिर में एक जगह से नहीं बल्कि बहुत सारी जगह से बाल गिरने लगते हैं।
- टेलोजेन एफ्र लूवियम
- यह भी हार्मोनल होती है, इससे भी गंजेपन की समस्या हो सकती है।
- ट्राईकोटिलोमेनिया
- बालों को बनाते समय उनको बहुत ज्यादा खींचना और गीले बालों में कंघा करने से भी यह होता है।
- सिर में लगातार खुजली का होते रहना।
- बाल अगर जरूरत से ज्यादा कमजोर होने लगे।
- बार बार हेड इंफेक्शन का शिकार होने लगे।
- ज्यादा संख्या में बाल गिरने लगे।
सर्जिकल मेथड- स्ट्रिप मेथड,एसयूई मेथड
नॉन सर्जिकल मेथड- इसमें हेयर वीविंग, बॉन्डिंग, सिलिकॉन सिस्टम और टेपिंग सम्मिलित होते है।
स्रोत: नील्सन स्टडी (एच 2 2017) के मुताबिक, बालों अहमियत होती हैं पर्सनालिटी के तहत।
मेडिकल टूरिज्म बढ़ा रहा है हेयर ट्रांसप्लांट
मेडिकल टूरिज्म बढ़ा रहा है हेयर ट्रांसप्लांट
भारत में तेजी के साथ विदेशों से भी लोग इस ट्रीटमेंट के लिए हर वर्ष आ रहे हैं। चंडीगढ़ में हेयर ट्रांसप्लांट मेडिकल टूरिज्म बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो रहा है। डॉ दीपक कालिया बताते हैं कि उनके पास यूरोप, यूएसए, न्यूजीलैंड, कनाडा और अफ्रीकी देश से काफी मरीज आते हैं। विदेशों में ट्रांसप्लांट का खर्च लाखों रुपये में है, जबकि यहां पर कुछ भी नहीं है।स्रोत: नील्सन स्टडी (एच 2 2017) के मुताबिक, बालों अहमियत होती हैं पर्सनालिटी के तहत।
विशेषज्ञों के अनुसार
अगर रोज 20−25 बालों का झड़ते हैं तो सामान्य सी बात है, परंतु जब यह संख्या 100 या उससे ज्यादा हो जाए तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
बाल प्रत्यारोपित करने के लिए फोलिक्युलर माइक्रो हेयर ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल मेथड है। भारत में हेयर ट्रांसप्लांट के लिए कोई नियम नहीं है, इसलिए टेक्नीशियन भी हेयर ट्रांसप्लांट कर रहा है। मेरा मानना है कि पेशेंट को हेयर ट्रांसप्लांट के लिए प्लास्टिक सर्जन के पास जाना चाहिए। यदि उपयुक्त डॉक्टर से ट्रांसप्लांट कराते हैं तो बाल भी नेचुरल आते हैं।
- डॉ दीपक कालिया, डॉ कालिया कॉस्मेटिक सर्जरी क्लीनिक
चेन्नई में हेयर ट्रांसप्लांट के बाद युवक की मौत के क्या कारण थे, उसके बारे में बता पाना मुश्किल है, लेकिन हेयर ट्रांसप्लांट एक सक्सेसफुल प्रक्रिया है। इसमें बाल पूरी तरह से नेचुरल आते हैं। इसके कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होते।
- डॉ सुनील गाबा, एडिशनल प्रोफेसर, प्लास्टिक सर्जन पीजीआई
हेयर ट्रांसप्लांट का कोई भी खतरा नहीं है। जीएमएसएच १६ में करीब डेढ़ साल की वेटिंग है।
- डॉ चंद्रेश महेंद्रू, हेड हेयर ट्रांसप्लांट क्लीनिक, जीएमएसएच
"एक अच्छा हेयर ट्रांसप्लांट एक लाख रूपये से शुरू होता हैं और इसकी कीमत तय होती है, हेयर ट्रांसप्लांट कराते वक्त डॉ के बारें में जरूर पूरी जानकारी हासिल कर लें ताकि आपको सही तरह से ट्रीटमेंट मिल सके"
डॉ वरुण त्यागी, स्किन एंड हेयर ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट
" भारत हेयर ट्रांसप्लांट के लिए बेहतरीन बाजार हैं यह पर गुणवत्ता भी हैं और दूसरे देशों की तुलना में यह सस्ता और किफायती भी है "
डॉ वरुण त्यागी, स्किन एंड हेयर ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट
हेयर ट्रांसप्लांट के दौरान ध्यान रखने वाली बातें
- हेयर ट्रांसप्लांट के लिए प्लास्टिक सर्जन को चुने डाक्टर की क्वालिफिकेशन और उसके अनुभव की जानकारी ले लेनी चाहिए।
- उसके क्लीनिक के सेटअप को भी देख लेना चाहिए।
- इमरजेंसी सेवाएं है या नहीं डॉक्टर खुद ट्रांसप्लांट करता है या फिर अपने स्टाफ से करवाता है, इन छोटी छोटी बातों का ध्यान भी रखना चाहिए।
कुछ जरूरी बातें
- रिजल्ट के लिए कम से कम चार महीने तक इंतजार करना चाहिए।
- एक हेयर ट्रांसप्लांट में कम से कम छह से आठ घंटे का समय लगता है।
- 20 से 70 साल की उम्र तक व्यक्ति के हेयर ट्रांसप्लांट किए जा सकते है।
- हेयर ट्रांसप्लांट के बाद कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।
- 45 से 50 साल के ऊपर के पेशेंट का अगर हेयर ट्रांसप्लांट कराया जाता है तो कुछ अलग से टेस्ट करवाए जाते हैं।
जानिए कौन कर सकता है हेयर ट्रांसप्लांट
क्या-क्या होता है ट्रांसप्लांट
प्लास्टिक सर्जनों के मुताबिक हेयर ट्रांसप्लांट के अलावा आईब्रो, दाढ़ी और मूंछे भी ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं। यह भी एक फैशन स्टेटस हो चुका है जिसके चलते आजकल युवाओं में दाढ़ी और मूंछे रखने का भी काफी क्रेज है, इसलिए दाढ़ी और मूंछे ट्रांसप्लांट कराने में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है।जानिए कौन कर सकता है हेयर ट्रांसप्लांट
प्लास्टिक सर्जन: विशेषज्ञों का कहना है कि हेयर ट्रांसप्लांट काने के लिए उपयुक्त डॉक्टर सिर्फ प्लास्टिक सर्जन ही होते हैं।अनुभव: प्लास्टिक सर्जन के पास पहले तीन साल सर्जरी और फिर तीन साल प्लास्टिक सर्जरी का अनुभव होता है।
ऑपरेशन थियेटर (ओटी) का सेटअप होना चाहिए
एमसीआई से मांगी गई एक सूचना पर यह जवाब दिया गया है कि प्लास्टिक सर्जन ही हेयर ट्रांसप्लांट कर सकते हैं। ट्रांसप्लांट के दौरान व्यक्ति को बेहोश करना होता है। इस तरह की सर्जरी में अन्य दिक्कतें आ सकती हैं, इसको मद्देनजर रखते हुए हेयर ट्रांसप्लांट सेंटर में ऑपरेशन थियेटर (ओटी) का सेटअप होना चाहिए। टेक्नीशियन व ओटी में प्रयोग आने वाले सभी संसाधन होने चाहिए। इन सब सुविधा के बाद ही हेयर ट्रांसप्लांट किया जा सकता हैं ।अच्छा दिखना सबका सपना होता हैं और उसमें सुंदर बाल हो तो पर्सनैलिटी को चार चांद लग जाते हैं, ऐसे में अगर ध्यान रखना है तो बस सही उपाय और सलाह। थोड़ी सी सावधानी आपकी खूबसूरती को निखार सकती है और अगर कभी भी ऐसी सर्जरी या फिर ट्रीटमेंट को आप कराना चाहते हैं तो एक्सपर्ट की राय जरूर लीजिये।
*Source: Bibliography and Research Papers
Research Paper-
- Hair transplantation surgery
- The influence of preservation solution on the viability of grafts in hair transplantation surgery.
- Follicular Unit Extraction Hair Transplant
- New hope in Cicatricial alopecia using Follicular Unit Extraction hair transplantation followed by topical Minoxidil at IADVL – UP Chapter (CUTICON 2008)
New hope in Cicatricial alopecia using Follicular Unit Extraction hair transplantation followed by topical Minoxidil in International Journal For Clinical Research in Mar – Apr 2009. - New hope in Cicatricial alopecia using Follicular Unit Extraction hair transplantation followed by topical Minoxidil in Indian Journal Of Dermatologist Venereologist and Leprologist ( IJDVL) Mar – Apr 2010.
Reference-
- RM Bernstein, A neighbor’s view of the “follicular family unit.” Hair Transplant Forum Int. (1998;8:23–5.)
- A Poswal, Body hair transplant: An additional source of donor hair in hair restoration surgery. Indian J Dermatol. 2007;52:104–5. [Google Scholar]
- G Serdar, Nessin B, Gurcan A. Follicular Unit Extraction in hair transplantation: Personal experience. Ann Plast Surg. 2008;60:127– [PubMed] [Google Scholar]
- NG Bertram,Damkemg P. Follicular Unit Extraction; experience in Chinese population. Hair Transplant Forum Intl. 2009;19:14. 14. Available from: http://www.forhair.com/pdfs/CIT%20info.pdf [last accessed on 2010 Jan 15] [Google Scholar]
- Quote Selected By Andre agassi autobiography Book
- *Expert Views and references.