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PM Modi Appeal:: नेहरू से लेकर मनमोहन सरकार में की गईं अपीलें, पीएम के बयान पर उठे सवाल; छिड़ा सियासी घमासान

Tue, 12 May 2026 11:05 PM IST
Devesh Tripathi आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 12 May 2026 11:05 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की है। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए उन्होंने लोगों से एक साल तक सोने के गहने न खरीदने का आह्वान किया है। पीएम ने कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स फिर से शुरू करने को कहा है, ताकि देश युद्ध के आर्थिक प्रभावों से सुरक्षित रह सके। 

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From Nehru to Manmohan Singh successive governments imposed curbs in emergency situations PM Modi Appeal
पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से व्यावहारिकता और जिम्मेदारी बरतने की अपील को एक दूरदर्शी कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम देश को अनिश्चितता की समय के साथ संभावित रूप से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तेल और ऊर्जा कीमतों का सामना करने के लिए तैयार करने की कोशिश माना जा रहा है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने, वर्क-फ्रॉम-होम मॉडल को फिर से अपनाने और सोने की खरीद घटाने जैसे सात-सूत्रीय सुझाव दिए हैं। इन उपायों का उद्देश्य देश को वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के मुकाबले मजबूत बनाए रखना है। हालांकि, भारत पर अभी तक अन्य देशों जितनी गंभीर मार नहीं पड़ी है, लेकिन पश्चिम एशिया में छाई अनिश्चितता के कारण कई देशों ने अपने खर्चों में कटौती की है।
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आयात पर निर्भरता और महंगाई का खतरा
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि यात्रा, खाद्य पदार्थों, लॉजिस्टिक्स और अन्य जरूरी उपभोग की वस्तुओं में महंगाई को बढ़ा सकती है।
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इतिहास में भी उठाए गए ऐसे ही कदम
ऐतिहासिक रूप से आपातकालीन परिस्थितियों में भारत की सरकारों ने सावधानी बरतने और कई बार कड़े कदम उठाने की सलाह दी है।
  • 1962 का भारत-चीन युद्ध: तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अर्थव्यवस्था पर दबाव के समय भारतीयों से सोना दान करने का आग्रह किया था। उन्होंने नागरिकों से सोने की खरीद कम करने की अपील की और एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया, जिसमें निवासियों से अपने गहने राष्ट्रीय युद्ध कोष में दान करने को कहा गया। देश भर की महिलाओं ने अपने गहने, यहां तक कि मंगलसूत्र भी दान कर दिए थे। इसे सरकार ने एक देशभक्ति अभियान बताया था। इस जन-धन जुटाने के माध्यम से अकेले नकद में 220 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई थी।
  • सोना नियंत्रण अधिनियम, 1962: इस अधिनियम ने सोने के स्वामित्व और व्यापार पर व्यापक प्रतिबंध लगाए। बैंकों को सोने के ऋण वापस लेने का आदेश दिया गया और इसके वायदा कारोबार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया। 1963 तक 14 कैरेट से ऊपर के गहने बनाना एक आपराधिक कृत्य था।
  • 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध: इस युद्ध के बाद देश खाद्य संकट से जूझ रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने हर भारतीय से सोमवार को एक समय का भोजन छोड़ने का आग्रह किया, जिसका उन्होंने स्वयं नेतृत्व किया। उस समय भारत खाद्य संकट में था और एक समय भोजन न करने को एक नागरिक कर्तव्य के रूप में प्रोत्साहित किया गया था।
  • इंदिरा गांधी का कार्यकाल: विश्लेषक बताते हैं कि 1965 के पाकिस्तान युद्ध और सूखे के कारण उत्पन्न वित्तीय दबाव के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखने के लिए 1967 में लोगों को सोना न खरीदने की सलाह दी थी।
  • मनमोहन सिंह सरकार का कार्यकाल: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के अंतिम वर्षों में, तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मार्च और जून 2013 के बीच नागरिकों से सोना खरीदना बंद करने की चार अलग-अलग अपीलें की थीं। उस समय भारत का चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.4 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिसमें सोने का आयात एक प्रमुख कारण था। चिदंबरम ने नागरिकों से उम्मीद जताई थी कि वे इतना सोना नहीं मांगेंगे ताकि आयात को नियंत्रित किया जा सके।

खाद्य संकट के समय में भी की गई थी अपील
इसके अतिरिक्त, सरकारों ने प्रारंभिक 1950 के दशक में खाद्य की कमी को दूर करने के लिए लोगों से अपनी खान-पान की आदतों में मौलिक बदलाव लाने का आग्रह किया था। कुछ जानकारों ने यह भी बताया कि नेहरू ने विशेष रूप से उत्तर भारत के लोगों से, जो गेहूं के आदी थे, चावल का पूरी तरह से परहेज करने का आग्रह किया था ताकि दूसरों को मिल सके।

विपक्ष बोला- ये सरकार की विफलता
इन ऐतिहासिक मिसालों के बावजूद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील को विफलता की स्वीकारोक्ति करार दिया है। उनका आरोप है कि लोगों को बताया जा रहा है कि क्या खरीदना है, कहां यात्रा करनी है और कैसे खर्च करना है। आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी पूछा कि क्या यह आर्थिक आपातकाल का संकेत है।


भाजपा का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने इतिहास का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस का नियम रहा है कि वह प्रधानमंत्री का विरोध करे, जबकि उनके पिछले कार्यों को आर्थिक नीति कहा जाए। उनका कहना है कि ऐसे ही दबाव वाले समय से बचने के लिए प्रधानमंत्री मोदी समय रहते अपील कर रहे हैं।

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