{"_id":"607f42898ebc3e8d384ba21c","slug":"from-may-1-more-and-more-people-will-be-able-to-get-vaccine-in-the-shortest-time","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना से लड़ाई : कोविड टीकाकरण रणनीति में बदलाव से ज्यादा लोगों को मिलेगा टीका","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कोरोना से लड़ाई : कोविड टीकाकरण रणनीति में बदलाव से ज्यादा लोगों को मिलेगा टीका
Wed, 21 Apr 2021 02:37 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 21 Apr 2021 02:37 AM IST
सार
वैक्सीन निर्माता अपने मासिक दवा उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार को देगा और शेष 50 फीसदी वह राज्यों या खुले बाजार में बेचने को स्वतंत्र होगा।
विज्ञापन
corona vaccine
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना टीकाकरण की केंद्र सरकार की नई रणनीति के कारण अब भारत के ज्यादा से ज्यादा लोगों को कम से कम समय में टीका मिल सकेगा। केंद्र अधिकतम लाभार्थियों को टीके का लाभ पहुंचाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
विज्ञापन
इस साल 16 जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण के पहले चरण में केवल स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को ही टीकाकरण का लाभ मिला। वहीं, 1 मार्च और 1 अप्रैल के दूसरे चरण में टीकाकरण को बीमार और 45 साल से ऊपर के लोगों पर केंद्रित रखा गया।
विज्ञापन
इन चरणों के दौरान सरकार शोध संस्थानों, निजी कंपनियों के साथ बेहतर तालमेल से काम किया और देश में वैक्सीन उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत में वैक्सीन और दवा के नियामकीय प्रणाली में बड़ा बदलाव किया। इसके कारण आपात स्थिति में वैक्सीन के सीमित इस्तेमाल को भी मंजूरी दी गई।
विज्ञापन
सरकार ने टीकाकरण अभियान में शुरू से निजी क्षेत्र को भी शामिल किया। अब जबकि टीकाकरण की क्षमता और प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है, तो सरकारी और निजी क्षेत्रों में तेजी से इसे बढ़ाने का भरोसा हो गया है।
सरकार तीसरे चरण में राष्ट्रीय टीका रणनीति का उद्देश्य वैक्सीन की कीमत को उदार बनाना और टीकाकरण का दायरा बढ़ाना है। इसके तहत वैक्सीन निर्माता अपने मासिक दवा उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार को देगा और शेष 50 फीसदी वह राज्यों या खुले बाजार में बेचने को स्वतंत्र होगा।