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खराब मौसम में 36 घंटे चली मुठभेड़ के बाद रावत की टीम ने मार गिराए थे चार आतंकी
Sat, 15 Aug 2020 02:30 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 15 Aug 2020 02:30 AM IST
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हवलदार दुबे(बाएं प्रथम), मेजर अनिल उर्स(मध्य), लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण सिंह रावत(दाएं प्रथम)
- फोटो : social media
शौर्य चक्र के लिए चुने गए लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण सिंह रावत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अदम्य साहस दिखाते हुए सीमापार से आतंकी घुसपैठ को नाकाम किया था। उनके नेतृत्व में विशेष बल की टीम ने खराब मौसम में 36 घंटे चली मुठभेड़ के बाद चार आतंकियों को मार गिराया था और एक को जख्मी हालत में गिरफ्तार किया था।
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सेना को खुफिया अलर्ट मिला था कि कुछ आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं। इस पर लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने टीम के साथ मोर्चा संभाल लिया। घुसपैठ वाले संभावित इलाकों में बैठी टीम ने आतंकियों को देखते ही उन्हें रोकने के लिए गोलियां दागीं। जवाबी फायरिंग का जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
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खराब मौसम के कारण मुश्किलें बढ़ गईं लेकिन रावत की टीम का हौसला नहीं टूटा। आतंकियों की सटीक लोकेशन जानने के लिए वे पीछे की तरफ गए और सैनिकों को जमीन पर रेंगते हुए पहुंचने का इशारा किया। रावत का इशारा मिलते ही सैनिकों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाई और दो आतंकियों को मार गिराया। इसके बाद दो अन्य आतंकियों को भी ढेर किया और एक को जख्मी हालत में गिरफ्तार किया।
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मेजर अनिल उर्स ने मार गिराए थे पांच आतंकी
खुफिया अलर्ट पर मेजर अनिल उर्स ने भी घुसपैठ की कोशिश कर रहे पांच आतंकियों को मार गिराया था। उनके कुशल नेतृत्व और अदम्य साहस से टीम ने पहले तीन आतंकियों को ढेर किया फिर जान की परवाह किए बिना अनिल ने सीमा के बेहद करीब वाले स्थान पर और इंतजार किया। 15 मिनट बाद वहां दो और आतंकी दिखे और उन्हें भी गोलियों का निशाना बनाया।
हवलदार दुबे ने ‘ए प्लस प्लस’ आतंकी को मारा था
पिछले साल 22 जून को जम्मू-कश्मीर के एक गांव के पास बाग में घेराव व तलाशी के दौरान हवलदार दुबे ने अपनी जान की परवाह किए बगैर एक ‘ए प्लस प्लस’श्रेणी के आतंकी को मार गिराया था। दुबे को घेराव के लिए अंदर की ओर तैनात किया गया था। तभी उन्हें झाड़ियों में हलचल दिखी। आतंकी उनके सामने ग्रेनेड लेकर खड़ा हो गया और गोलीबारी शुरू कर दी। दुबे ने साहस और तेज तर्रार रुख अपनाते हुए आतंकी को ढेर कर दिया।
60 जवानों को सेना मेडल भी मिलेगा
राष्ट्रपति ने शुक्रवार को शौर्य चक्र के साथ 60 सेना के जवानों को सेना मेडल, 4 नौसैनिकों को नौ सेना मेडल और 5 वायु सैनिकों को वायुसेना मेडल देने को भी मंजूरी दी। इसके अलावा राष्ट्रपति ने विभिन्न सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सेना के 19 जवानों के लिए मेंशन-इन-डिस्पैच को भी मंजूरी दी। इसमें ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन रक्षा के आठ मरणोपरांत जवान भी शामिल हैं।