जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल का इस्तीफा, कंपनी को तत्काल मिली 1,500 करोड़ की मदद
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वित्तीय संकट में फंसी निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज के चेयरमैन और संस्थापक नरेश गोयल ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी पत्नी अनीता गोयल ने भी कंपनी के बोर्ड निदेशक का पद छोड़ दिया है। इसके साथ ही बैंकों के समूह ने जेट एयरवेज के प्रबंधन में बदलाव कर उसे डेढ़ हजार करोड़ की तत्काल सहायता मुहैया कराई है।
कर्ज के बोझ तले दबी कंपनी की संचालन प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही थी और नए निवेशक नहीं मिलने पर एसबीआई की अगुवाई में कर्जदाताओं ने ऋणशोधन प्रक्रिया अपनाई। बैंकों ने गोयल से चेयरमैन पद छोड़ने और कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाने की बात कही थी।
सोमवार को बोर्ड बैठक के दौरान इस पर फैसला हुआ और नरेश गोयल, अनीता गोयल व एतिहाद एयरवेज की नामित निदेशक केविन नाइट को इस्तीफा देना पड़ा।
बैंक अब जेट एयरवेज के निदेशक मंडल में अपने दो सदस्य शामिल करेंगे और एयरलाइन के दैनिक परिचालन और नकदी प्रवाह बनाए रखने के लिए अंतरिम प्रबंधन समिति बनाई जाएगी। पिछले दिनों कंपनी के 80 से ज्यादा विमान जमीन पर आने से उसकी हालत बहुत खस्ता हो गई थी और पायलटों ने वेतन न मिलने पर अप्रैल से उड़ाने रोकने की चेतावनी दी थी।
आधी हो गई गोयल की हिस्सेदारी
चेयरमैन पद छोड़ने के साथ ही जेट एयरवेज में नरेश गोयल की हिस्सेदारी घटकर आधी रह गई। पहले कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 51 फीसदी थी, जो अब 25.5 फीसदी पर आ गई है। उन्हें कर्ज को परिवर्तित कराने के लिए 11.4 करोड़ इक्विटी शेयर कर्जदाताओं को देने पड़े। इसके बदले बैंकों ने कंपनी को तत्काल प्रभाव से 1,500 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई है। कंपनी की साझेदार एतिहाद एयरवेज के पास अब भी 24 फीसदी हिस्सेदारी है।
कर्ज के बोझ ने आसमान से उतारा
करीब ढाई दशक पहले पत्नी अनीता के साथ जेट एयरवेज की नींव रखने वाले नरेश गोयल ने इसे देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइंस बनाया लेकिन कर्ज के बढ़ते बोझ ने उसकी उड़ान थाम ली। कंपनी पर केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सिंडीकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और इलाहाबाद बैंक सहित कुछ विदेशी बैंकों के 8,000 करोड़ का कर्ज चढ़ गया और लीज का किराया न चुकाने से विमान खड़े कर लिए गए। लगातार ऋण भुगतान चूक से कंपनी आईबीसी के तहत आने को मजबूर हो गई।