{"_id":"5acc6e3d4f1c1bae1a8b45d5","slug":"found-a-leopard-lying-unconscious-gets-a-life-saving-ride-on-motorbike-in-up","type":"story","status":"publish","title_hn":"और जान की बाजी लगा कर बचाई तेंदुए की जान","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
और जान की बाजी लगा कर बचाई तेंदुए की जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:26 PM IST
विज्ञापन
leopard
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिंदगी इंसान की ही नहीं जानवरों की भी बहुत कीमती है और जब बात तेंदुए की जान बचाने की हो तो इंसान अपनी जान की बाजी लगा देता है। मामला उत्तर प्रदेश के महारजगंज का है जब वन विभाग के कर्मचारी एक तेंदुए की जान बचाने के लिए खुद की जान की बाजी लगा दी और उसे मोटर बाइक पर बिठाकर अस्पताल पहुंचाया। बताया जा रहा है कि तेंदुए की हालत गंभीर थी और पिंजरा आने में देरी हो रही थी और तेंदुए की हालत गंभीर बनी हुई थी। आनन फानन में वन विभाग के कर्मियों ने तेंदुए को बाइक पर बिठाकर अस्पताल पहुंचाया।
बात दो दिन पहले की है जब सुबह 11 बजे इन कर्मियों ने सड़क पर एक तेंदुआ बेहोशी की हालत में पड़ा देखा। उन्होंने तुरंत रेंजर को सूचना दी। रेंजर दया शंकर तिवारी घटनास्थल पर पहुंचकर डीएफओ मनीष सिंह को इस बारे में सूचित किया।
कर्मचारियों ने तेंदुए के लिए पिंजरा मंगाया, लेकिन वो जानते थे कि उसे आने में समय लगेगा और थोड़ी सी और देर इस तेंदुए के जीवन के लिए घातक साबित हो सकती है। उनमें से दो कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह के बिना मोटरबाइक पर तेंदुए को बिठाया और नजदीक के पशु हॉस्पिटल ले गए।
विज्ञापन
डीएफओ मनीष सिंह ने बताया, 'पिछले दिनों दक्षिणी चौक के पास एक तेंदुए के बेहोशी की हालत में पाए जाने की सूचना मिली थी। वन विभाग के कर्मचारी उसे बाइक पर वन विभाग के ऑफिस लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि उसका इलाज किया गया और उसे खाना भी खिलाया गया। तेंदुआ अब तंदरुस्ती की राह पर है उसकी हालत में सुधार हो रहा है।' बीते 22 मार्च को इसी इलाके में एक तेंदुआ मरा हुआ मिला था।
विज्ञापन
बात दो दिन पहले की है जब सुबह 11 बजे इन कर्मियों ने सड़क पर एक तेंदुआ बेहोशी की हालत में पड़ा देखा। उन्होंने तुरंत रेंजर को सूचना दी। रेंजर दया शंकर तिवारी घटनास्थल पर पहुंचकर डीएफओ मनीष सिंह को इस बारे में सूचित किया।
विज्ञापन
कर्मचारियों ने तेंदुए के लिए पिंजरा मंगाया, लेकिन वो जानते थे कि उसे आने में समय लगेगा और थोड़ी सी और देर इस तेंदुए के जीवन के लिए घातक साबित हो सकती है। उनमें से दो कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह के बिना मोटरबाइक पर तेंदुए को बिठाया और नजदीक के पशु हॉस्पिटल ले गए।
विज्ञापन
डीएफओ मनीष सिंह ने बताया, 'पिछले दिनों दक्षिणी चौक के पास एक तेंदुए के बेहोशी की हालत में पाए जाने की सूचना मिली थी। वन विभाग के कर्मचारी उसे बाइक पर वन विभाग के ऑफिस लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि उसका इलाज किया गया और उसे खाना भी खिलाया गया। तेंदुआ अब तंदरुस्ती की राह पर है उसकी हालत में सुधार हो रहा है।' बीते 22 मार्च को इसी इलाके में एक तेंदुआ मरा हुआ मिला था।