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Shashi Tharoor: शशि थरूर ने कहा- सियासत और पत्रकारिता के बीच घालमेल घातक, पूर्व सांसद की पुस्तक का विमोचन

Wed, 31 May 2023 06:43 AM IST
वीरेंद्र शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Wed, 31 May 2023 06:43 AM IST
सार

यह पुस्तक सार्वजनिक क्षेत्र में हाल की कई महत्वपूर्ण घटनाओं की पड़ताल से परिपूर्ण राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय लेखों का विस्तृत संग्रह है। राजनीति के विद्यार्थियों, पत्रकारों, आर्थिक बदलाव को समझने में रुचि रखने वालों को ये किताब रास आएगी।

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Former Union Minister Shashi Tharoor believes that a journalist should not mix his profession with politics
शशि थरूर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर का मानना है कि एक पत्रकार को अपने पेशे और सियासत के बीच घालमेल नहीं करना चाहिए। दोनों का साथ आना देश के लिए नुकसानदेह है। मीडिया और राजनीति सही रास्ते पर चलकर ही देश की एकता और संप्रभुता को ताकतवर बना सकते हैं। 
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वे मंगलवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में लोकमत मीडिया ग्रुप के संपादकीय बोर्ड के चेयरमैन विजय दर्डा की पुस्तक ‘रिंग साइड-अप क्लोज एंड पर्सनल ऑन इंडिया एंड बियॉन्ड’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। इस मौके पर किताब के हिंदी संस्करण ‘कुछ जख्म कुछ आवाज’ को भी लॉन्च किया गया।
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थरूर ने कहा कि यह पुस्तक सार्वजनिक क्षेत्र में हाल की कई महत्वपूर्ण घटनाओं की पड़ताल से परिपूर्ण राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय लेखों का विस्तृत संग्रह है। राजनीति के विद्यार्थियों, पत्रकारों, सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक बदलाव को समझने में रुचि रखने वालों को ये किताब रास आएगी। शशि थरूर ने माना कि विजय दर्डा ने पत्रकारिता और राजनीति को कभी मिक्स नहीं होने दिया, उनके जीवन के ऐसे अनगिनत अनुभव इस किताब में समावेशित हैं। समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सलाहकार संजय बारू, राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल पटेल, नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला, भाजपा सांसद वरुण गांधी, वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, राजदीप सरदेसाई, जैन मुनि लोकेश समेत कई लोग शामिल हुए।
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संजय बारू ने कहा कि विजय दर्डा कांग्रेसी विचारधारा से ओतप्रोत हैं, लेकिन बिना लाभ हानि के बारे में सोचे उन्होंने पत्रकारिता के लिए विचारधारा को सदैव किनारे रखा। शेखर गुप्ता ने कहा कि देश में तमिल, तेलगू, मलयालम और हिंदी में अनगिनत अखबार हैं और मराठी में लोकमत अखबार जनमानस को सच से रूबरू कराता है। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की विजय दर्डा के साथ वन टू वन दिलचस्प बातचीत हुई। राजदीप ने अपने व दर्डा के बीच के कुछ अनुभव भी लोगों के बीच साझा किए। विजय दर्डा ने बताया कि उनको पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जवाहरलाल दर्डा से पत्रकारिता विरासत में मिली। उनके पिता ने 1971 में मिशन के तौर पर नागपुर से दैनिक समाचार पत्र शुरू किया था। वह हमेशा से कहते कि सम्मान चाहिए तो राजनीति से दूर रहो। उनकी किताब में ऐसे किस्सों का विस्तृत संग्रह है।
 
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