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Tirupati: तिरुपति केस में MP के पूर्व मंत्री ने RSS पर लगाया आरोप, इसलिए आई हिंदू विचारधारा से जोड़ने की बात

Thu, 26 Sep 2024 05:36 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 26 Sep 2024 05:36 PM IST
सार

पटैरिया का कहना है कि संघ जो खुद हिंदू परंपराओं और संस्कृति का संरक्षक बताता है। जो राष्ट्रीय मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से बाहर निकालने की मांग कर रहा है। संघ की यह मांग एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। इसका सीधा उद्देश्य मंदिरों की अपार संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेना है।

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Former MP minister blamed RSS in Tirupati case, hence the talk of linking it to Hindu ideology
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल घी में बीफ टैलो से संबंधित रिपोर्ट के बाद देश विदेश में हड़कंप मच गया है, लेकिन इस बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री राजा पटैरिया ने एक और बड़ा खुलासा किया है। पटैरिया आरोप है कि इस विवाद के पीछे एक गंभीर साजिश चल रही है। इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बड़ी चालाकी से पर्दे के पीछे रह कर चला रहा है।

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पटैरिया का कहना है कि संघ जो खुद हिंदू परंपराओं और संस्कृति का संरक्षक बताता है। जो राष्ट्रीय मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से बाहर निकालने की मांग कर रहा है। संघ की यह मांग एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। इसका सीधा उद्देश्य मंदिरों की अपार संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेना है। तिरुपति बालाजी,सबरीमाला समेत अन्य बड़े मंदिर में आने वाली धनरािश बहुत अधिक होती है। आरएसएस इसी धन का उपयोग हिंदू राष्ट्र की अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहता है। यह सिर्फ मंदिरों का मामला नहीं है। ये सत्ता और नियत्रंण का खेला है। मंदिरों का निजीकरण होने से यह धन सीधे उनके विचारधारा को बढ़ाने में उपयोग किया जाएगा। इससे उन्हें राजनीति में भी प्रभाव और वित्तीय लाभ मिलेगा। यह गठजोड़ बहुत गहरा है। जो सतर्क दृष्टि से देखने से स्पष्ट होता है, लेकिन आम जनता की नजरों से छिपा रहता है।
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पटैरिया का कहना है कि आरएसएस आज मंदिर और किसानों का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए कर रही है। नियंत्रण केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। यह उन किसानों तक भी पहुंच चुका है जो भारत की रीढ़ है। संघ गाय संरक्षण और हिंदू राष्ट्र के नाम पर किसानों को भ्रमित कर रहा है। ये संगठन किसानों के बजाए उनके खून पसीने का दोहन कर रहा है। मैं किसी भी स्थिति में मंदिरों के निजीकरण का विरोध करता हूं। मंदिरों में पारदर्शिता बहुत जरूरी है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिवराज सरकार के दौरान कैसे सप्तऋषि की मूर्तियों के बड़े पैमाने पर घोटाले हुए। यह घटनाएं दर्शाती है कि निजीकरण से मंदिरों का प्रबंधन नहीं सुधरेगा बल्कि और बिगड़ेगा। हम किसानों के अधिकारों की भी मांग करते है। किसानों को अधिक अधिकार,बेहतर मूल्य और शोषण से सुरक्षा मिलनी चाहिए।

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