केंद्रीय गृह मंत्री के बयान पर पलटवार: चिदंबरम ने शाह को क्यों दिलाई ‘राफेल’ की याद
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था, सरकार का संवैधानिक कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन जब सरकार लोगों का भरोसा खो देती है, तब सरकार की आत्मा नहीं रहती है। जिस सरकार की आत्मा नहीं होती है, वह सरकार फैसले नहीं ले सकती। किसी भी तरह का परिवर्तन नहीं कर सकती है...
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 'भ्रष्टाचार' को लेकर दिए गए एक बयान पर देश के पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने उन्हें घेर लिया है। गृह मंत्री शाह ने शुक्रवार को 'फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' (फिक्की) के 94वें वार्षिक सम्मेलन में कहा था कि हमारी सात साल की सरकार में आलोचकों को भी ये स्वीकार करना होगा कि इन वर्षों में बहुत परिवर्तन आया है। इस सरकार पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। आपको फैसला गलत लग सकता है, लेकिन नीयत गलत हो, ये कोई नहीं कह सकता। शनिवार को पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री एवं वित्त मंत्री रहे कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने अमित शाह को उनके इस बयान पर घेर लिया। चिदंबरम ने ट्विटर पर लिखा, विमुद्रीकरण कुछ लोगों को काले धन को कानूनी रूप से सफेद धन में बदलने की अनुमति देने की एक योजना थी। भ्रष्टाचार को लेकर फ्रांस में लड़ाकू विमान 'राफेल' सौदे की जांच अभी चल रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था, सरकार का संवैधानिक कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन जब सरकार लोगों का भरोसा खो देती है, तब सरकार की आत्मा नहीं रहती है। जिस सरकार की आत्मा नहीं होती है, वह सरकार फैसले नहीं ले सकती। किसी भी तरह का परिवर्तन नहीं कर सकती है। पीएम मोदी के नीतिगत निर्णयों से देश में लोकतंत्र की जड़ें गहरी हुई हैं। लोकतंत्र, हर गांव तक पहुंचा है। इसे हमने अपना स्वभाव बनाया है। आजादी के 75 सालों में 17 लोकसभा चुनाव हुए, 22 सरकारें बनीं और दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार के साथ लोगों ने नरेंद्र मोदी को देश चलाने का मौका दिया। शाह ने कहा, 2014 से पहले 30 वर्षों तक देश ने पूर्ण बहुमत की और निर्णायक सरकार नहीं देखी थी। सब मानते थे कि सरकार को पॉलिसी पैरालिसिस हो गया था। निवेशकों का भरोसा उठ गया था। क्रोनी कैपिटलिज्म चरम पर था। बैंकिंग व्यवस्था चरमराई हुई थी। 12 लाख करोड़ के घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार से पूरी व्यवस्था चरमरा गई थी। आज मोदी सरकार पर लोगों का भरोसा जगा है।
पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम ने अमित शाह द्वारा भ्रष्टाचार को लेकर कही गई बात को पकड़ लिया। उन्होंने लिखा, विमुद्रीकरण कुछ लोगों को काले धन को कानूनी रूप से सफेद धन में बदलने की अनुमति देने की एक योजना थी। इलेक्टोरल बॉन्ड ने रिश्वतखोरी को कानूनी कवर दिया है। 95 फीसदी फंड कॉरपोरेट्स द्वारा भाजपा को 'दान' किया गया। चिदंबरम ने भ्रष्टाचार को लेकर फ्रांस में चल रही 'राफेल' सौदे की जांच का मुद्दा भी उठा दिया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कई नेता राफेल मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग करते रहे हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गत माह एक प्रेस वार्ता में मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था, मोदी सरकार द्वारा राफेल डील में भ्रष्टाचार को दफनाने के लिए ऑपरेशन कवर अप चल रहा है।
यूपीए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय टेंडर के बाद 526.10 करोड़ रुपये में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सहित एक राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए सौदा आगे बढ़ाया था। मोदी सरकार ने वही राफेल लड़ाकू विमान (बिना किसी निविदा के) 1670 करोड़ में खरीदा। इतना ही नहीं, भारत को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के बिना 36 जेट की लागत में अंतर लगभग 41,205 करोड़ रहा है। बतौर पवन खेड़ा, ये सबसे बड़ा रक्षा घोटाला है। सरकार, जेपीसी का गठन करने से डर रही है। अमित शाह ने कहा था, हर क्षेत्र में स्टेकहोल्डर्स के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद नई नीतियां बनी हैं। इन नीतियों के कारण आज देश में एक नया आत्मविश्वास जगा है। कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ का कहना है, अगर यह सरकार भ्रष्टाचार नहीं होने का दावा कर रही है तो वह विदेशी बैंकों में पैसा जमा कराने वाले भारतीयों के नामों का खुलासा क्यों नहीं कर रही है। स्विस बैंक ने जून में डाटा साझा किया था। उसमें पता चला कि पिछले एक साल में भारतीयों द्वारा जमा कराए गए पैसों में रिकॉर्ड 286 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ये संख्या पिछले 13 वर्षों में सर्वाधिक है। दूसरी तरफ भारतीय नागरिकों के प्रति बैंक की कुल देनदारियां साल 2019 में 7200 करोड़ रुपये से बढ़कर 2020 में 20706 करोड़ रुपये हो गई हैं। यह बढ़ोतरी नकद जमा नहीं, बॉंड सहित दूसरी होल्डिंग से हुई हैं। ऐसे मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नहीं बोलते हैं। वे नोटबंदी पर कुछ नहीं कहते।
केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा, सात साल पहले जिन लोगों का भरोसा सरकार पर से उठ गया था, वह अब बढ़ा है। देश के 130 करोड़ लोगों का लोकतंत्र, बहुपक्षीय लोकतांत्रिक प्रणाली व संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली पर भरोसा बढ़ाना मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में कहा था, 'पीएम संसद में नहीं आते हैं। हमें राष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज उठाने नहीं दी जाती है। ये लोकतंत्र की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या है। लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने गुरुवार को कहा था, प्रधानमंत्री इतना असुरक्षित और कमजोर हैं कि वे पूर्व प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लेते। कांग्रेस पार्टी की भूमिका और पूर्व की सरकार के काम को पीएम स्वीकार नहीं करते। 1971 में भारत ने पाकिस्तानी सेना की कमर तोड़ दी थी। पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए थे। यह सब सेना के शौर्य और इंदिरा गांधी के साहसिक नेतृत्व के कारण संभव हुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी को मां दुर्गा का अवतार बताया था। दूसरी तरफ मोदी सरकार ने अपने किसी कार्यक्रम में इंदिरा गांधी का नाम लेना ठीक नहीं समझा। ये लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत करने के लक्षण नहीं हैं।