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Hindi News ›   India News ›   Former Congressman Ghulam Nabi Azad will give a big blow to Jammu and Kashmir, know how; 'Hindu-Muslim' card

जम्मू-कश्मीर में तगड़ा झटका देंगे 'आजाद': 'हिंदू-मुस्लिम' कार्ड से दूर रहे 'गुलाम नबी' बन सकते हैं 'किंग मेकर'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 30 Aug 2022 08:14 PM IST
सार

गुलाम नबी आजाद को जम्मू-कश्मीर में 'हिंदू मुस्लिम' राजनीति से दूर सेक्यूलर नेता बताया जाता है। नई पार्टी का गठन करने के उनके एलान के बाद से ही जम्मू कश्मीर कांग्रेस में भगदड़ मच गई है।

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Former Congressman Ghulam Nabi Azad will give a big blow to Jammu and Kashmir, know how; 'Hindu-Muslim' card
गुलाम नबी आजाद - फोटो : एएनआई

विस्तार

कांग्रेस पार्टी को अलविदा कहने वाले 'गुलाम नबी आजाद' अब जम्मू-कश्मीर में ताल ठोकेंगे। उनकी न्यू पॉलिटिक्स को समझ रहे लोग एकाएक सक्रिय हो उठे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 'भद्रवाह' से छात्र राजनीति में कदम रखने वाले गुलाम नबी का करियर बेदाग रहा है। उन्हें जम्मू-कश्मीर में 'हिंदू मुस्लिम' राजनीति से दूर सेक्यूलर नेता बताया जाता है। नई पार्टी का गठन करने के उनके एलान के बाद से ही जम्मू कश्मीर कांग्रेस में भगदड़ मच गई है। चार दर्जन से अधिक नेता, जिनमें पूर्व डिप्टी सीएम, पूर्व मंत्री एवं विधायक शामिल हैं, एक झटके में 'आजाद' के पाले में आ गए। गुलाम नबी आजाद को जम्मू और कश्मीर, दोनों जगहों पर लोगों का समर्थन हासिल है। विधानसभा चुनाव में गुलाम नबी, इतनी सीटें जीत सकते हैं, जो उन्हें 'किंग मेकर' की भूमिका में ला सकती हैं। 
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कांग्रेस पार्टी को जम्मू-कश्मीर में लग रहा झटके पे झटका ... 

जम्मू-कश्मीर कांग्रेस कमेटी को झटके पर झटका लग रहा है। भले ही कांग्रेस पार्टी, गुलाम नबी आजाद के जाने के बाद डैमेज कंट्रोल करने के प्रयासों में जुटी है, मगर नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला थम नहीं रहा है। मंगलवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद और पूर्व मंत्री अब्दुल मजीद वानी सहित करीब चार दर्जन से ज्यादा नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी है। इनमें पूर्व मंत्री डॉ. मनोहर लाल शर्मा, पूर्व विधायक बलवान सिंह व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव विनोद मिश्रा भी शामिल हैं। सोमवार को पूर्व डिप्टी स्पीकर गुलाम हैदर मलिक, पूर्व विधायक हैदर मलिक, पूर्व एमएलसी सुभाष गुप्ता और श्याम लाल भगत ने भी कांग्रेस नेतृत्व को अपना इस्तीफा भेज दिया था। आने वाले दिनों में भी इस्तीफों का यह सिलसिला जारी रह सकता है। 
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विवाद से दूर रहे 'गुलाम नबी' आजाद को मिलेगा फायदा ...

प्रदेश कांग्रेस की यूथ इकाई के पूर्व अध्यक्ष अमीन भट्ट ने तो शनिवार को ही यह बयान दे दिया था कि गुलाम नबी आजाद, जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे। जम्मू-कश्मीर की राजनीति को गहराई से समझने वाले कैप्टन अनिल गौर बताते हैं, यहां पर गुलाम नबी आजाद की छवि बेदाग रही है। किसी विवाद में उनका नाम नहीं रहा। भ्रष्टाचार में उनका नाम नहीं आया। लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री एवं 2005 में जम्मू-कश्मीर के सातवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले आजाद ने यहां काम भी खूब कराए थे। हालांकि मुफ्ती मोहम्मद सईद पर ऐसे आरोप भी लगे थे कि उन्होंने आजाद को काम नहीं करने दिया। आजाद का बातचीत करने का तरीका बहुत सुलझा हुआ है। मूल रूप से तो वे किश्तवाड़ के ही हैं। जैसे दूसरे नेताओं की विवादित स्टेटमेंट देखने को मिलती हैं, ऐसा कुछ आजाद के साथ नहीं रहा। जम्मू या कश्मीर, दोनों ही जगह पर आजाद की छवि एक सेक्यूलर नेता की रही है। जम्मू में भी उन्हें घाटी जितना ही सम्मान मिलता रहा है।
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संजय गांधी के करीब आ गए थे गुलाम नबी आजाद ... 

भद्रवाह से विद्यार्थी राजनीति में कदम रखने वाले गुलाम नबी आजाद की मुलाकात, इंदिरा गांधी के बेटे संजय सिंह से कराई गई थी। संजय सिंह से मुलाकात करने के बाद वे कई दिनों तक दिल्ली में रहे। तब से लेकर अब तक गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस पार्टी में ही थे। बीच में कई बार मन मुटाव जैसी खबरें आईं, मगर उन्होंने कांग्रेस को अलविदा नहीं कहा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री के अलावा पार्टी में कई अहम पदों पर काम किया। बतौर अनिल गौर, जम्मू कश्मीर में कांग्रेस पार्टी का कैडर है। ये अलग बात है कि वो अब सुस्त अवस्था में चला गया है। आजाद ने कहा है कि वे अपनी पार्टी बनाएंगे। इसके बाद न केवल कांग्रेसी कार्यकर्ता, बल्कि पार्टी का वोट बैंक भी आजाद की तरफ शिफ्ट हो सकता है। 

दर्जनभर सीट ले आए तो किंगमेकर बन सकते हैं 'नबी' ... 

राजनीतिक जानकार अनिल गौर कहते हैं, देखिये इतनी जल्दी अपने दम पर कोई सीएम की कुर्सी तक पहुंच जाएगा, ये कहना ठीक नहीं होगा। इसमें समय लगता है, लेकिन जब किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना कम हो तो उस स्थिति में 'किंग मेकर' की भूमिका अहम रहती है। अगर गुलाम नबी आजाद, दर्जनभर सीट ले आते हैं तो वे किंग मेकर बन सकते हैं। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ये तय है कि J&K में गठबंधन ही चलेगा। किसी एक पार्टी को सत्ता मिल जाए, ऐसा कहना बहुत मुश्किल है। जम्मू कश्मीर में बेरोजगारी और विकास से जुड़ी कई सारी दिक्कतें लोगों के सामने हैं। जम्मू के डोडा, रामबन और किश्तवाड़ में गुलाम नबी को चाहने वाले लोगों की संख्या कम नहीं है। अभी तो आजाद ने नए दल का गठन भी नहीं किया है, लेकिन पूर्व डिप्टी सीएम, पूर्व मंत्रियों एवं पूर्व विधायकों का उनके पाले में आना शुरु हो गया है। लोगों के साथ उनके व्यक्तिगत ताल्लुकात हैं। खुद की एक छवि है।   

जम्मू कश्मीर में यूं बड़ी रहेगी 'आजाद' की भूमिका ... 

आजाद को जम्मू के लोग भी खूब सम्मान देते हैं। यहां के लोग भी उनका साथ दे सकते हैं। आज की राजनीति परिस्थिति में अगर यहां चुनाव होता है तो भाजपा के खाते में 90 विधानसभा सीटों में से 30-35 सीट जा सकती हैं। पीडीपी की महबूबा मुफ्ती भी दर्जनभर सीट ला सकती हैं। हालांकि यह आंकड़ा कम भी रह सकता है, वजह उनके अधिकांश नेता दूसरे दलों में चले गए हैं। मार्च 2020 में पूर्व मंत्री अल्ताफ बुखारी की अध्यक्षता में बनी 'अपनी पार्टी' अगर ठीक से चुनाव लड़ती है तो पांच सात सीट ले सकती है। अभी इस पार्टी में अभी सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा। रही बात नेशनल कांफ्रेंस की तो इसके खाते में मुख्य विपक्षी दल बनने लायक सीटें चली जाएंगी। फारुख अब्दुल्ला की पार्टी को अधिकतम डेढ़ से दो दर्जन सीटें आ सकती हैं। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन की पार्टी भी चार पांच सीट लेने की स्थिति में है। कांग्रेस पार्टी के खाते में पांच सात सीट जा सकती हैं। आम आदमी पार्टी भी चुनाव में उतरेगी। उनकी सीटों का गणित अभी तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति में यदि गुलाम नबी आजाद, आठ दस सीटें लेने में कामयाब हो जाते हैं तो वे किंग मेकर की भूमिका में आ सकते हैं।
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