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आरटीआई कानून में संशोधन को खारिज करें सांसद, यह सीआईसी की पीठ में ‘छुरा घोंपने वाला’: पूर्व सीआईसी
Mon, 22 Jul 2019 08:48 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 22 Jul 2019 08:48 PM IST
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सूचना का अधिकार कानून (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने सांसदों से सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून पर प्रस्तावित संशोधन विधेयक को खारिज करने की अपील की है। उन्होंने इसे केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की पीठ में ‘छुरा घोंपने वाला’ और कानून पर ‘घातक प्रहार’ करार दिया है।
कई हाई प्रोफाइल मामलों में पारदर्शी आदेशों के लिए चर्चित आचार्युलु ने कहा है कि प्रस्तावित बदलाव सूचना आयोग की स्वायत्तता को ‘गंभीर रूप से कमजोर’ कर देंगे। मशहूर विधि प्रोफेसर आचार्युलु ने कहा कि इस तरह के गलत उपाय सूचना आयुक्तों को खुलासा आदेश जारी करने को लेकर नख-दंत विहीन कर देंगे। वह आरटीआई के उद्देश्यों को लागू करने में विफल हो जाएंगे।
उन्होंने सांसदों को पत्र में लिखा है कि अगर सांसद इस विधेयक को मंजूरी देते हैं तो राज्य और केंद्र सरकार में सूचना आयुक्त वरिष्ठ बाबुओं के महज अनुलग्नक या पिछलग्गू रह जाएंगे। मैं लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों से विधेयक का विरोध करने और इसे खारिज करने की अपील करता हूं।
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उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में राज्यसभा सांसदों की ज्यादा जिम्मेदारी बनती है। आचार्युलु के मुताबिक, संशोधन विधेयक में सूचना आयुक्तों का कद कम कर दिया है। अभी उनकी हैसियत चुनाव आयुक्त और सुप्रीम कोर्ट के जज के समान है।
सरकार सूचना आयुक्त के कार्यकाल और सेवा शर्तों को नई व्यवस्था के तहत बदलना चाहती है। प्रस्तावित संशोधन विधेयक को कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया था।
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कई हाई प्रोफाइल मामलों में पारदर्शी आदेशों के लिए चर्चित आचार्युलु ने कहा है कि प्रस्तावित बदलाव सूचना आयोग की स्वायत्तता को ‘गंभीर रूप से कमजोर’ कर देंगे। मशहूर विधि प्रोफेसर आचार्युलु ने कहा कि इस तरह के गलत उपाय सूचना आयुक्तों को खुलासा आदेश जारी करने को लेकर नख-दंत विहीन कर देंगे। वह आरटीआई के उद्देश्यों को लागू करने में विफल हो जाएंगे।
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उन्होंने सांसदों को पत्र में लिखा है कि अगर सांसद इस विधेयक को मंजूरी देते हैं तो राज्य और केंद्र सरकार में सूचना आयुक्त वरिष्ठ बाबुओं के महज अनुलग्नक या पिछलग्गू रह जाएंगे। मैं लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों से विधेयक का विरोध करने और इसे खारिज करने की अपील करता हूं।
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उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में राज्यसभा सांसदों की ज्यादा जिम्मेदारी बनती है। आचार्युलु के मुताबिक, संशोधन विधेयक में सूचना आयुक्तों का कद कम कर दिया है। अभी उनकी हैसियत चुनाव आयुक्त और सुप्रीम कोर्ट के जज के समान है।
सरकार सूचना आयुक्त के कार्यकाल और सेवा शर्तों को नई व्यवस्था के तहत बदलना चाहती है। प्रस्तावित संशोधन विधेयक को कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया था।