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टीकाकरण: अभी कोरोना की लड़ाई में स्वदेशी टीके ही दिखाएंगे दम, विदेशी वैक्सीन का करना होगा इंतजार

Tue, 17 Aug 2021 06:39 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Tue, 17 Aug 2021 06:39 PM IST
सार

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी टीका कंपनियों फाइजर और मॉडर्ना ने वैक्सीनेशन के बाद शरीर पर प्रतिकूल असर की स्थिति में कानूनी बचाव की मांग की है। सरकार की विदेशी कंपनियों के साथ वैक्सीन को लेकर बातचीत जारी है...

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Foreign vaccine manufacturers seeking indemnity clause from indian government from the adverse effects of the vaccine
टीकाकरण - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

कोरोना के विदेशी टीके लगवाने वाले लोगों को अभी थोड़ा ओर इंतजार करना होगा। दरअसल कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीका निर्माण करने वाली विदेशी कंपनियां टीके के प्रतिकूल असर से कानूनी बचाव की मांग कर रही है। लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय सीधे तौर पर कंपनियों की इस मांग को स्वीकार में तैयार नहीं है।

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स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अमेरिकी टीका कंपनियों फाइजर और मॉडर्ना ने वैक्सीनेशन के बाद शरीर पर प्रतिकूल असर की स्थिति में कानूनी बचाव की मांग की है। सरकार की विदेशी कंपनियों के साथ वैक्सीन को लेकर बातचीत जारी है। लेकिन इसे लेकर राय यही बन रही है कि टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति में कानूनी बचाव सभी टीका कंपनियों को दिया जाए न कि केवल कुछ ही कंपनियों को। सरकार ने अभी तक इस मामले में कोई भी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। मौजूदा स्वरुप में कंपनियों को यह राहत नहीं दी जा सकती है इसलिए सरकार ने कुछ प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है।

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सरकार राजी हुई तो जल्द मिलेंगी वैक्सीन

हाल ही में डीजीसआई ने अमेरिकी दवा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को आपात स्थिति में इस्तेमाल की अनुमति प्रदान की है। लेकिन कंपनी कब से टीके उपलब्ध करवाएगी इसकी समय सीमा नहीं बताई है। इस पर कंपनी का कहना था कि हम जल्द से जल्द टीके उपलब्ध करवाएंगे, लेकिन ये कब से उपलब्ध होंगे इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

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विश्वस्त सूत्र ने अमर उजाला को बताया कि अभी भी सरकार और जॉनसन एंड जॉनसन के बीच बातचीत ही चल रही है। अगर सरकार की तरफ से कुछ ठोस नतीजे सामने आते हैं तो टीके आपूर्ति शुरू हो जाएगी। जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी टीका बनाने वाली स्वदेशी कंपनी बायोलॉजिकल-ई को टीका बनाने का अनुबंध देगी। वह जॉनसन एंड जॉनसन के लिए 50 करोड़ खुराक बनाएगी, लेकिन भारत में कितनी मात्रा में उपलब्ध होगी ये अभी तय नहीं है। 

जानकारी के अनुसार, जून में फाइजर ने सरकार से कहा था कि कंपनी कौवैक्स समेत सभी समझौतों में प्रतिकूल असर की स्थिति में बचाव चाहती है। लेकिन सरकार का तर्क है कि टीका बनाने वाली कंपनियां स्थानीय मुआवजा शर्तों का पालन करने के लिए राजी हों। इसी शर्त को लेकर अभी सरकार, फाइजर और मॉडर्ना के बीच चर्चा चल रही है। लेकिन अभी तक ठोस निष्कर्ष निकलकर सामने नहीं आया है। सूत्रों की मानें तो सरकार फाइजर और मॉडर्ना को तभी कानूनी बचाव का विकल्प देगी जब सरकार को इनसे ज्यादा टीकों की जरुरत होगी।  

स्वदेशी टीके का उत्पादन पर्याप्त रहा तो नहीं होगी विदेशी टीकों की जरूरत

आज भारत में कोरोना वैक्सीन के कई विकल्प मौजूद हैं। सितंबर से नवंबर में स्वदेशी टीका कंपनियां अपनी आपूर्ति को बढ़ा सकती है। ऐसी स्थिति में देश में चल रहे टीकाकरण अभियान में विदेशी टीकों की कोई भूमिका नहीं रह जाएगी। इधर सरकार जायडस कैडिला के जायकोव—डी, बायलाइजिकल-ई के टीके कॉर्बेवैक्स और सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया कोवोवैक्स द्वारा तैयार नोवावैक्स को अगस्त से अक्तूबर के बीच अनुमति प्रदान कर सकती है।

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