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सीमा पर चीन से निपटने के लिए भारत की खास तैयारी, ये है रणनीति
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
Updated Mon, 24 Jul 2017 04:38 PM IST
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तिब्बत से लगती भारतीय सीमा पर चीन जिस तरह इन्फ्रास्टक्चर का निर्माण कर रहा है उसने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीन ने दुनिया की छत कहे जाने वाले तिब्बत तक सड़कों का जाल तैयार कर दिया है जिसके सहारे वह युद्ध की स्थिति में कभी भी सैन्य साजो सामान आसानी से भारतीय सीमा पर पहुंचा सकता है।
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चीन के इस आक्रामक रवैये का अब भारत ने तोड़ निकाल लिया है। चीन से निपटने के लिए भारत अब नई रणनीति पर काम कर रहा है जिसमें चीन की सड़कों का जवाब सीमा पर सुरंग बनाकर दिया जाएगा। केंद्रीय गृह और रक्षा मंत्रालय ने इसका जिम्मा दिया है सीमा सड़क संगठन यानि बीआरओ ने। बीआरओ ने इसके लिए अरुणाचल प्रदेश और असम की सरकारों से अनुमति भी मांगी है।
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जानकारी के अनुसार गृह और रक्षा मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में दो लेन वाली सुरंग के निर्माण के लिए बीआरओ को जिम्मेदारी सौंपी है।
तिब्बत सीमा पर बनाई जाएंगी सुरंगें
सुरंग बनने के बाद 13500 फिट की ऊंचाई पर स्थित सेला दर्रे की ज्यादा जरूरत परिवहन के लिए नहीं पड़ेगी। जिसके बाद पहाड़ का सफर लगभग सात घंटे तक कम हो जाएगा। बता दें कि फिलहाल गुवाहाटी से तिब्बत सीमा तक पहुंचने के लिए 496 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।
यहां सुरंग बन जाएगी तो इससे कई घंटे की दूरी बच जाएगी साथ ही सैन्य वाहन भी तेजी से वहां तक पहुंच सकेंगे। कुछ दिन पहले ही बीआरओ के प्रोजक्ट कमांडर आरएस राव ने पश्चिमी कामेंग की उपायुक्त सोनल स्वरूप से मुलाकात कर जमीन के संबंध में जरूरी दस्तावेज सौंपे और जमीन अधिग्रहण कराए जाने का अनुरोध किया था।
जानकारी के अनुसार जमीन अधिग्रहण के बाद इस इलाके में 475 मीटर और 1.80 किलोमीटर लंबाई वाली दो सुरंग का निर्माण किया जाएगा। ये सुरंगे 11000 और 12000 फुट की ऊंचाई पर बनाई जाएंगी। जानकारों की मानें तो इन सुरंगों के बनने के बाद भारत की पहुंच भी चीन सीमा तक तेज हो जाएगी। जिसका फायदा युद्ध की स्थिति में मिलेगा।
यहां सुरंग बन जाएगी तो इससे कई घंटे की दूरी बच जाएगी साथ ही सैन्य वाहन भी तेजी से वहां तक पहुंच सकेंगे। कुछ दिन पहले ही बीआरओ के प्रोजक्ट कमांडर आरएस राव ने पश्चिमी कामेंग की उपायुक्त सोनल स्वरूप से मुलाकात कर जमीन के संबंध में जरूरी दस्तावेज सौंपे और जमीन अधिग्रहण कराए जाने का अनुरोध किया था।
जानकारी के अनुसार जमीन अधिग्रहण के बाद इस इलाके में 475 मीटर और 1.80 किलोमीटर लंबाई वाली दो सुरंग का निर्माण किया जाएगा। ये सुरंगे 11000 और 12000 फुट की ऊंचाई पर बनाई जाएंगी। जानकारों की मानें तो इन सुरंगों के बनने के बाद भारत की पहुंच भी चीन सीमा तक तेज हो जाएगी। जिसका फायदा युद्ध की स्थिति में मिलेगा।