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जाम और घने कोहरे ने रोका ट्रेन 18 का रास्ता, लांच टला
Fri, 28 Dec 2018 10:14 AM IST
Shani Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shani Mishra
Updated Fri, 28 Dec 2018 10:14 AM IST
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Train 18
- फोटो : ANI
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जाम, घना कोहरा और लंबी दूरी की यात्रा ये वह कुछ कारण है जिसने भारत की सबसे तेज ट्रेन के लांच को टाल दिया है। रेल मंत्रालय की मानें तो ट्रेन 18 को दिल्ली से वाराणसी की यात्रा पूरी करने में कम से कम आठ घंटे का समय लगेगा। अगर ऐसा होता है तो यह एक चेयर कार ट्रेन के लिए ज्यादा होगा।
ट्रेन 18 को 29 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से हरी झंडी दिखाने वाले थे मगर अब इस वह जनवरी के पहले हफ्ते में इस ट्रेन की आधिकारिक शुरुआत करेंगे। साल 2018 में बनने के कारण इसे ट्रेन 18 का नाम दिया गया है।
रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त ने इसे 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने की अनुमति दे दी है। अब रेलवे बोर्ड इसकी आधिकारिक शुरुआत को अनुमति देगा जिसके बाद फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय भेजी जाएगी। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि अभी ट्रेन की शुरुआत में समय लगेगा और यह 2018 में संभव नहीं है। यह ट्रेन भारतीय रेल की छवि बदल देगी। यात्रियों को देखते हुए रुट का निर्धारण भी किया जाना है और लोग आठ घंटे से ज्यादा बैठना नहीं चाहेंगे।
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इस ट्रेन के किराए का निर्धारण भी किया जाना है और माना जा रहा है कि इसका किराया शताब्दी ट्रेनों से ज्यादा होगा।
सुविधाओं से लैस है ट्रेन 18
इस ट्रेन को चेन्नई की इंटरनल कोच फैक्टरी में बनाया गया है। ट्रेन को बनाने में 100 करोड़ रुपये का खर्च आया है। ट्रेन की खासियतों की बात करें तो इसमें डिफ्यूज लाइटिंग और ऑटोमेटिक दरवाजे और फुटस्टेप हैं जो ट्रेन के रुकने पर खुद ही खुल जाएंगे। ट्रेन में 52 सीट का एग्जीक्यूटिव कंपार्टमेंट है। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें वाईफाई के अलावा जीपीएस आधारित पेसेंजर इनफॉर्मेशन सिस्टम भी है।
शुरुआत में रेलवे 16-17 बोगियों की दो ट्रेन 18 ट्रेनें शुरू कर सकता है।
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ट्रेन 18 को 29 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से हरी झंडी दिखाने वाले थे मगर अब इस वह जनवरी के पहले हफ्ते में इस ट्रेन की आधिकारिक शुरुआत करेंगे। साल 2018 में बनने के कारण इसे ट्रेन 18 का नाम दिया गया है।
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रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त ने इसे 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने की अनुमति दे दी है। अब रेलवे बोर्ड इसकी आधिकारिक शुरुआत को अनुमति देगा जिसके बाद फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय भेजी जाएगी। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि अभी ट्रेन की शुरुआत में समय लगेगा और यह 2018 में संभव नहीं है। यह ट्रेन भारतीय रेल की छवि बदल देगी। यात्रियों को देखते हुए रुट का निर्धारण भी किया जाना है और लोग आठ घंटे से ज्यादा बैठना नहीं चाहेंगे।
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इस ट्रेन के किराए का निर्धारण भी किया जाना है और माना जा रहा है कि इसका किराया शताब्दी ट्रेनों से ज्यादा होगा।
सुविधाओं से लैस है ट्रेन 18
इस ट्रेन को चेन्नई की इंटरनल कोच फैक्टरी में बनाया गया है। ट्रेन को बनाने में 100 करोड़ रुपये का खर्च आया है। ट्रेन की खासियतों की बात करें तो इसमें डिफ्यूज लाइटिंग और ऑटोमेटिक दरवाजे और फुटस्टेप हैं जो ट्रेन के रुकने पर खुद ही खुल जाएंगे। ट्रेन में 52 सीट का एग्जीक्यूटिव कंपार्टमेंट है। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें वाईफाई के अलावा जीपीएस आधारित पेसेंजर इनफॉर्मेशन सिस्टम भी है।
शुरुआत में रेलवे 16-17 बोगियों की दो ट्रेन 18 ट्रेनें शुरू कर सकता है।