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बाढ़ में बीमार हुए तो बनाया 'वाटर एंबुलेंस'

Sun, 04 Sep 2016 12:51 PM IST
रवि प्रकाश/बीबीसी, भागलपुर
रवि प्रकाश/बीबीसी, भागलपुर Updated Sun, 04 Sep 2016 12:51 PM IST
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flood water ambulance
- फोटो : BBC

बिहार में भागलपुर जिले के वीरेंद्र मंडल के पिताजी की तबीयत अचानक खराब हो गई। नवगछिया के इस्माइलपुर में रहने वाले वीरेंद्र के पिता ने पेट में दर्द और सांस फूलने की शिकायत की। घर से बाहर बाढ़ का पानी था। रिंग बांध टूटने के कारण नवगछिया से सड़क संपर्क टूट चुका है। नवगछिया शहर भी बाढ़ की चपेट में है। ऐसे में वीरेंद्र की दिक्कत यह थी कि वे अपने बीमार पिता को अस्पताल कैसे ले जाएं।

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बात घर से बाहर निकली तो गांव के सुरेश मंडल, भादो मंडल और मंगलेश यादव ने वीरेंद्र को धैर्य रखने को कहा। गांव के कुछ लड़कों ने ट्रक के दो ट्यूब में हवा भरी। हवा भरे ट्यूब को दो किनारे करने के बाद उसके ऊपर बांस की करची से बैठने लायक जगह बनाई गई। फिर उसके ऊपर चौकी लादकर बना लिया 'वाटर एंबुलेंस'। वीरेंद्र मंडल के 65 वर्षीय पिता खोका मंडल उस पर चढ़ने से डर रहे थे। गांव के लोगों ने समझाया तो उस पर चढ़ने को तैयार हुए।
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10 मिनट तक जुगाड़ कर के बनाए गए एंबुलेंस के सहारे गंगा की लहरों पर चलने के बाद इस्माइलपुर के युवाओं ने उन्हें सूखी जगह तक पहुंचा दिया। वहां से टेंपो पर उन्हें भागलपुर सदर अस्पताल लाया गया। यहां उनका इलाज किया जा रहा है। अब वे स्वस्थ हैं। बाढ़ का पानी घटने पर अपने गांव वापस लौट जाएंगे।

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इसे बनाना किसने सिखाया

flood water ambulance
दरअसल केले के तने पर पटरियां डालकर घर के सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने वालों लोगों ने सोचा कि जब सामान बाहर जा सकता है तो फिर मरीज क्यों नहीं ले जाया जा सकता। भादो मंडल ने बताया कि वाटर एंबुलेंस बनाना बहुत आसान है।

इसे बनाना किसने सिखाया। वे बताते हैं कि गंगा किनारे घर है तो तैरना आता ही है। हमने अपने पूर्वजों को केले के तने की मदद से बाढ़ से सामान निकालते देखा है। ऐसे में लगा कि ट्यूब बड़ा हो तो उस पर चौकी या खटिया भी लादी जा सकती है।

5-6 लोग साथ में पानी में इसको लेकर चलते हैं। ताकि दुर्घटना की स्थिति में कोई अनहोनी नहीं हो। इधर भागलपुर में गंगा के जलस्तर में काफी कमी तो आई है पर यह अभी भी खतरे के निशान 31।09 मीटर से ऊपर बह रही है।
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